मुद्दे की बात :दिल्ली,ऊंचा सुनती है, कबीरा खड़ा बाजार मेँ, मांगे सबकी खैर, ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर, हाँ, गुनहगार मैं भी हूँ।
अलोक गौड़, वरिष्ठ लेखक, संपादक।नई दिल्ली l हाँ, जी हज़ूर…मैं भी इस अपराध में बराबर का भागीदार हूँ। मैंने भी इस देश को नारों के हवाले किया।मैं भी उस भीड़ में शामिल था। मैंने भी “हिंदुत्व खतरे में है”, “देश बदल रहा है”, “विश्वगुरु बनेंगे” जैसे जुमलों पर आँख मूँदकर भरोसा किया।मैंने भी सवाल पूछने […]
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