दिल्ली ऊंचा सुनती है,कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर।ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर।गड्ढे सड़कों में हैं या व्यवस्था में? :-लेखक वरिष्ठ सम्पादक =:-:आलोक गौड़
दिल्ली की सड़कों पर निकलते समय अब ट्रैफिक से ज्यादा गड्ढों पर नज़र रखनी पड़ती है। लाल बत्ती तोड़ने पर चालान कट सकता है, लेकिन गड्ढे में गिरकर जान चली जाए तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? राजधानी की सड़कों की हालत देखकर लगता है कि डामर से ज्यादा भरोसा उखड़ा है। सड़कें केवल टूटी नहीं […]
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