मनजीत सिंह जी.के. के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज, समन जारी,गुरु की गुलक की लूट : कालका, काहलों। मेँ,इसका जवाब कोर्ट मेँ दूंगा, झूठे प्रचार मेँ फसेंगे केहलो और कालका:जी के.।

मनजीत सिंह जी.के. के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज, समन जारी,गुरु की गुलक की लूट : कालका, काहलों।
मेँ इसका जवाब कोर्ट मेँ दूंगा, झूठे प्रचार मेँ फसेंगे केहलो और कालका:जी के.।

नई दिल्ली, 14 मई: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान हरमीत सिंह कालका और जनरल सचिव जगदीप सिंह काहलों ने बताया कि कमेटी के पूर्व प्रधान मनजीत सिंह जी.के. द्वारा प्रधान रहते हुए गोलक के पैसे के दुरुपयोग के मामले में अदालत ने संज्ञान लेते हुए दो एफआईआर दर्ज की हैं। एक मामले में पहले ही संज्ञान लेते हुए जी.के. को नोटिस जारी किया गया था, जिसमें वह जमानत पर बाहर हैं, जबकि ताजा मामले में अब समन जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आखिरकार जी.के. को अपने किए कर्मों का फल भुगतना ही पड़ेगा।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए हरमीत सिंह कालका और जगदीप सिंह काहलों ने बताया कि पहला केस उनके वर्तमान करीबी सहयोगी गुरमीत सिंह शंटी द्वारा दायर किया गया था। इसमें एफआईआर नंबर 3/2019 नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में दर्ज है। आरोप है कि कनाडा से एक परिवार ने एक लाख कनाडाई डॉलर का चेक दिया था, लेकिन इस मामले में जी.के. और उनके साथियों ने एक्सिस बैंक के फर्जी वाउचर बनाकर यह दिखाया कि यह राशि नकद रूप में बैंक में जमा करवाई गई। उन्होंने बताया कि एक लाख कनाडाई डॉलर की राशि भारतीय मुद्रा में लगभग 51 लाख 5 हजार 773 रुपये बनती है, जिसका गबन किया गया।इस पर जी के का कहना था की रकम खातों मेँ जमा है, फर्जी कौन है यह कोर्ट मेँ पता चलेगा।
कालका ने आरोप लगाया कि मनजीत सिंह जी.के. ने ‘साड़ी विरासत’ नाम की एक पुस्तक प्रकाशित दिखाकर घोटाला किया, जबकि ऐसी कोई पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई। इसके अलावा, रैनबी क्लोथिंग प्राइवेट लिमिटेड, जो जी.के. के घर के पते पर रजिस्टर्ड है और उनकी बेटी की कंपनी बताई जाती है, उससे कमेटी को विभिन्न सामान की सप्लाई दिखाकर भुगतान किए गए और हेराफेरी की गई। उन्होंने बताया कि इस केस में जी.के. को आईपीसी की धाराएं 409, 511, 406, 471, 477A और 120B के तहत समन जारी हुए हैं।
उन्होंने बताया कि इसी प्रकार जगदीप सिंह काहलों की शिकायत पर एफआईआर नंबर 192/2020 दर्ज हुई, जिसमें गबन के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि 30 लाख और 50 लाख रुपये की राशि को एक लाख कनाडाई डॉलर के बदले समायोजित करने की कोशिश की गई। इस केस में भी आईपीसी की धाराएं 406, 409, 420 और 120B लगाई गई हैं।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद अगर मनजीत सिंह जी.के. झूठ बोलना चाहते हैं तो यह उनकी मर्जी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह गुरु घर के पैसे का दुरुपयोग किया गया, वह बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि इन मामलों में मनजीत सिंह जी.के. अगली तारीखों पर जमानत जरूर ले सकते हैं, लेकिन अंत में सच की जीत होगी और उन्हें अपने कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि विदेशों से आने वाली संगत दिल्ली के गुरुद्वारों में माथा टेकते समय पाउंड, डॉलर जैसी विदेशी मुद्रा चढ़ाती है। यह राशि कमेटी में जमा होती है, लेकिन आरोप है कि मनजीत सिंह जी.के. ने विदेशी दौरों के दौरान धर्म प्रचार के नाम पर इसी विदेशी मुद्रा से खर्च दिखा दिए। जबकि वास्तव में विदेशों से संगत कमेटी के लिए दशवंध देती है। उन्होंने कहा कि इस धार्मिक कार्य के लिए खर्च दिखाया गया, लेकिन उसका कोई प्रमाण, रसीद या रिकॉर्ड मौजूद नहीं है, जो एक बड़ा घोटाला प्रतीत होता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले जीटीबी आईटी इंस्टीट्यूट को 10 लाख रुपये देने की अनुमति मनजीत सिंह जी.के. ने साधारण कागज पर दी थी, जबकि उस समय कॉलेज के पास 2 करोड़ रुपये नकद मौजूद थे और उसे अतिरिक्त धन की जरूरत नहीं थी। यह भी दिखाया गया कि अकाउंटेंट हरजीत सिंह के हस्ताक्षर से पैसा जारी हुआ, लेकिन जांच में हरजीत सिंह ने ऐसे किसी हस्ताक्षर से इनकार किया। इस मामले में जी.के. पहले से जमानत पर हैं और उनके विदेश जाने पर रोक लगी हुई है।
उन्होंने कहा कि भले ही मनजीत सिंह जी.के. खुद को बेदाग साबित करने के लिए वीडियो जारी करते हों, लेकिन वे कानून से बच नहीं सकते।

इन सभी आरोपों पर पूर्व अध्यक्ष जी के.ने इंकार करतें हुए कमेटी पर ही आरोप लगाकर कहा कि सभी का जवाब दिया जाएगा, उन्होंने कालका और केहलो पर ही आरोप लगते हुए कहा संगत को सब पता है की कौन कितना सच्चा है, उन्होंने सभी दस्तावेज दिखाते हुए आरोपों से इंकार करतें हुए दोनों पर गंभीर आरोप भी लगये।आने वाले समय मेँ सभी के सामने सचाई आएगी।

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