
दिल्ली के साकेत कोर्ट परिसर में महाराजा अग्रसेन जी की जयंती बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर वैश्य समाज के अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर महाराजा अग्रसेन जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके बताए सामाजिक समानता, सेवा, सहयोग और भाईचारे के आदर्शों को याद किया। कार्यक्रम में BCI सदस्य पीयूष गोयल, BCD सदस्य रमेश गुप्ता और साकेत बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
साकेत कोर्ट परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ और महाराजा अग्रसेन जी के स्मरण से हुई। पूरे वातावरण में श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता की झलक देखने को मिली। इस आयोजन में वैश्य समाज के अधिवक्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और महाराजा अग्रसेन जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। महाराजा अग्रसेन जी को समाज में समानता, परोपकार और आपसी सहयोग की भावना को बढ़ावा देने वाले महान शासक के रूप में याद किया जाता है। उनसे जुड़ी एक प्रसिद्ध परंपरा के अनुसार, उनके राज्य में आने वाले जरूरतमंद परिवार को एक ईंट और एक सिक्का दिया जाता था, ताकि समाज के सहयोग से वह अपना घर बसा सके और अपना जीवन शुरू कर सके। यह परंपरा आज भी सामाजिक समरसता और सहयोग का प्रतीक मानी जाती है। पूजा-पाठ के बाद कार्यक्रम में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस पूरे आयोजन में मुख्य आयोजक पवन गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने साकेत कोर्ट परिसर में वैश्य समाज के लोगों और अधिवक्ताओं के साथ मिलकर कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराया। आयोजन के जरिए समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान का संदेश दिया गया। महाराजा अग्रसेन जी की जयंती का यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज में समानता, सेवा, सहयोग और भाईचारे का संदेश भी दिया। साकेत कोर्ट परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित किया कि सामाजिक एकता और परंपराओं का सम्मान ही एक मजबूत समाज की पहचान है।

