हंसराज कॉलेज में महिला सुरक्षा, वर्तमान व्यवस्था , चुनौतियों और संभावित समाधानों पर व्यापक एवं व्यावहारिक विचार-विमर्श ।

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नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026:

हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा विषय पर एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक परिचर्चा का आयोजन मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को किया गया। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), हंसराज कॉलेज; परिवहन विभाग, दिल्ली सरकार; दिल्ली ट्रैफिक पुलिस तथा TOLWA Trust द्वारा किया गया।


कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों, परिवहन क्षेत्र के विशेषज्ञों, विभिन्न परिवहन यूनियनों के प्रतिनिधियों, नागरिक समाज के सदस्यों तथा हंसराज कॉलेज के विद्यार्थियों ने भाग लिया। परिचर्चा का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी वर्तमान व्यवस्थाओं, चुनौतियों और संभावित समाधानों पर व्यापक एवं व्यावहारिक विचार-विमर्श करना था।
कार्यक्रम का स्वागत करते हुए प्रो. (डॉ.) रमा, प्राचार्य, हंसराज कॉलेज, ने सभी विशिष्ट पैनलिस्टों एवं युवा प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा के विषय पर खुली, सार्थक एवं समाधानपरक चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे संवादों में युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे सार्वजनिक परिवहन के नियमित उपयोगकर्ता होने के साथ-साथ भविष्य के नीति-निर्माता और जिम्मेदार नागरिक भी हैं।


इस अवसर पर सुश्री निहारिका राय, परिवहन आयुक्त, दिल्ली, ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए वर्तमान में किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन में उपलब्ध पैनिक बटन के प्रभावी एवं सार्थक उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों तथा दिल्ली के दूर-दराज के क्षेत्रों में महिलाओं के लिए विशेष बस सेवाओं के संबंध में किए जा रहे प्रयासों पर भी चर्चा की।
सुश्री राय ने महिलाओं के लिए प्रस्तावित पिंक कार्ड की अवधारणा पर भी प्रकाश डाला, जिसे शीघ्र ही बहुउद्देशीय कार्ड के रूप में उपयोग किए जाने का प्रस्ताव है। उन्होंने उपलब्ध सुरक्षा सुविधाओं के प्रति महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने तथा इन व्यवस्थाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
सुश्री नेहा यादव, DCP, उत्तर दिल्ली, ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति दिल्ली पुलिस की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कानून-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने में नागरिकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विशेष रूप से युवा विद्यार्थियों से अपने अनुभव, सुझाव और विचार साझा करने का आह्वान किया तथा कहा कि विशेषकर युवा छात्रों के सुझावों के लिए पुलिस पूरी तरह खुली है।
TOLWA के अध्यक्ष श्री संजय बटला ने भारत में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नागरिक समाज की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नागरिक समाज के विभिन्न संगठन महिलाओं के लिए सुरक्षित सार्वजनिक स्थान एवं सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं।
श्री बटला ने सभी हितधारकों, सरकारी विभागों, पुलिस, परिवहन संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज एवं आम नागरिकों—से सार्थक एवं सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि परिचर्चा से प्राप्त सुझावों एवं निष्कर्षों को विधिवत संकलित कर भारत सरकार के सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि इस संवाद से निकलने वाले विचारों को नीतिगत एवं प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाया जा सके।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण डॉ. ज़हीर खान द्वारा संचालित विचार-मंथन आधारित पैनल परिचर्चा रही। इसमें परिवहन क्षेत्र के विशेषज्ञों, विभिन्न परिवहन यूनियनों के पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों तथा हंसराज कॉलेज के विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। परिचर्चा में महिलाओं की सुरक्षा को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, पुलिसिंग, आधारभूत सुविधाओं, यात्री व्यवहार तथा संस्थागत जिम्मेदारी सहित विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने का प्रयास किया गया।
हंसराज कॉलेज के विद्यार्थियों ने परिचर्चा में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए निर्भया कांड, संविधान में महिलाओं की समानता एवं सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों तथा वर्तमान समय में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार रखे। विद्यार्थियों ने सार्वजनिक परिवहन को महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित, संवेदनशील एवं उत्तरदायी बनाने के संबंध में अनेक प्रश्न उठाए और सुझाव भी दिए।
परिचर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि महिलाओं की सुरक्षा केवल किसी एक विभाग या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए सरकार, पुलिस, परिवहन विभाग, परिवहन संचालकों, शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। विशेष रूप से युवाओं के अनुभवों और सुझावों को भविष्य की सुरक्षा नीतियों एवं व्यवस्थाओं में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं समन्वय में डॉ. अपूर्वा गुप्ता तथा डॉ. पूजा झा मैत्री की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों ने पूरे कार्यक्रम का कुशलतापूर्वक एवं सटीक समन्वय सुनिश्चित किया।
यह कार्यक्रम नीति-निर्माताओं, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों, परिवहन क्षेत्र, नागरिक समाज और युवा विद्यार्थियों के बीच सार्थक संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच बना। परिचर्चा ने इस बात को रेखांकित किया कि महिलाओं की सुरक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसके लिए निरंतर संवाद, जागरूकता, संस्थागत सहयोग और ठोस कार्रवाई आवश्यक है।
कार्यक्रम का समापन दिल्ली तथा देशभर में महिलाओं के लिए सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुरक्षित, समावेशी, सुगम एवं संवेदनशील बनाने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। परिचर्चा से प्राप्त सुझावों एवं निष्कर्षों को आगे संबंधित सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की दिशा में पहल की जाएगी।

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