
नई दिल्ली, :राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) के नए दिशा-निर्देशों के विरोध में बुधवार को किसानों और संरक्षित खेती (प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन) से जुड़े किसानों, उद्यमियों एवं प्रतिनिधियों ने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नेटहाउस, पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस जैसी संरक्षित खेती परियोजनाओं को लेकर लागू किए गए नए नियमों पर आपत्ति जताते हुए उन्हें किसान हित में संशोधित करने की मांग की।
किसानों का कहना है कि नए नियमों के कारण संरक्षित खेती में निवेश करने वाले किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसानों ने अपनी पूंजी लगाकर आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाया है, ऐसे में नीतियां बनाते समय उनके निवेश, जोखिम और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने छह प्रमुख मांगें रखीं। इनमें 21 अगस्त 2026 के बाद नए नियमों के आधार पर जारी पत्रों और निर्णयों की समीक्षा कर पूर्व व्यवस्था बहाल करने, नेटहाउस, पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस परियोजनाओं के लिए 50 प्रतिशत अनुदान बहाल करने तथा ‘एक परिवार-एक लाभार्थी’ नियम को समाप्त करने की मांग शामिल है।
इसके अलावा किसानों ने कहा कि अन्य पात्रता पूरी करने वाले पेंशनभोगी किसानों को केवल पेंशन प्राप्त करने के आधार पर संरक्षित खेती की सब्सिडी से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने नेटहाउस, पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस जैसी कृषि संरचनाओं पर पांच प्रतिशत जीएसटी लागू करने की मांग पर भी सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
किसानों ने कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी प्रभावी और किसान हितैषी नीतियां बनाने की मांग की, ताकि उन्हें घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सके।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने ‘हम अन्नदाता हैं, हमारे साथ न्याय होना चाहिए’ और ‘किसान हित में पुराने नियम पुनः लागू करो’ जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि संरक्षित खेती आधुनिक कृषि का महत्वपूर्ण माध्यम है और इससे उत्पादन की गुणवत्ता एवं उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों की आय बढ़ाने के अवसर भी मिलते हैं।
किसानों ने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड और केंद्र सरकार से उनकी मांगों पर जल्द विचार कर उचित निर्णय लेने की अपील की। साथ ही कहा कि संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए नीतियों में किसानों की आर्थिक स्थिति और व्यावहारिक कठिनाइयों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

