C&I क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन भारत के हरित विकास के अगले चरण को देगा नई गति

नई दिल्ली, 10 जून 2026: नवीकरणीय ऊर्जा अब केवल पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता नहीं रह गई है, बल्कि यह एक रणनीतिक आर्थिक शक्ति बन चुकी है, जो भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता, ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक विकास को नई दिशा देगी। यह बात उद्योग जगत के नेताओं ने फिक्की द्वारा एएमपिन एनर्जी ट्रांजिशन के सहयोग से आयोजित “उत्तरी क्षेत्र के वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन” विषयक सम्मेलन में कही। इस कार्यक्रम में क्रिसिल एवं सुमितोमो कॉर्पोरेशन नॉलेज पार्टनर के रूप में जुड़े थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अध्यक्ष श्री घनश्याम प्रसाद ने भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति और उपभोक्ताओं तथा वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) दोनों के हितों की रक्षा करने वाली संतुलित नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “भारत प्रतिवर्ष 50 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने का महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर चुका है और आने वाले वर्षों में 60-70 गीगावाट की वार्षिक क्षमता वृद्धि हासिल करने की दिशा में अग्रसर है। अब चुनौती पूर्वानुमान योग्य कनेक्टिविटी, ग्रिड की तैयारी और ऊर्जा के विश्वसनीय एकीकरण को सुनिश्चित करने की है।” उन्होंने कहा कि औद्योगिक उपभोक्ताओं को किफायती हरित ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ-साथ वितरण कंपनियों की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। “भारत की विकास यात्रा के लिए दोनों उद्देश्य समान रूप से आवश्यक हैं।”

केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) में मुख्य (नियामक मामले) श्री एस. के. चटर्जी ने भारत के ऊर्जा परिवर्तन में वाणिज्यिक एवं औद्योगिक (C&I) उपभोक्ताओं की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, “देश की कुल बिजली खपत का लगभग आधा हिस्सा वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं द्वारा किया जाता है। इसलिए स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की दिशा में भारत की यात्रा में उनकी भूमिका निर्णायक है।” उन्होंने मांग-पक्ष की भागीदारी के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “ऊर्जा परिवर्तन केवल नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है। डिमांड रिस्पॉन्स, ऊर्जा दक्षता, वितरित ऊर्जा संसाधन और वर्चुअल पावर प्लांट भी एक लचीली और मजबूत बिजली व्यवस्था बनाने में समान रूप से महत्वपूर्ण होंगे। भविष्य नवीकरणीय ऊर्जा को ऊर्जा भंडारण और लचीले संसाधनों के साथ जोड़ने में है, जिससे ग्रिड की स्थिरता और किफायत दोनों सुनिश्चित की जा सकें।”
उद्योग जगत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए एएमपिन एनर्जी ट्रांजिशन के संस्थापक, सीईओ एवं प्रबंध निदेशक श्री पिनाकी भट्टाचार्य ने कहा कि भारत आर्थिक लाभ, नीतिगत समर्थन और ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकताओं के कारण नवीकरणीय ऊर्जा की ओर एक अपरिवर्तनीय बदलाव का साक्षी बन रहा है। भारत के हरित ऊर्जा परिवर्तन पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “भारत का नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन मूल रूप से राष्ट्र निर्माण का अभियान है। ऊर्जा आत्मनिर्भरता आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है और नवीकरणीय ऊर्जा भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व स्थापित करने का ऐतिहासिक अवसर प्रदान करती है।” उन्होंने बताया कि औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ता हरित ऊर्जा अपनाकर आज ऊर्जा लागत में 20 से 40 प्रतिशत तक की बचत कर रहे हैं। “इससे नवीकरणीय ऊर्जा केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी बन जाती है।”
मुख्य वक्तव्य देते हुए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के पूर्व सचिव श्री भूपिंदर सिंह भल्ला ने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा की व्यवहार्यता सिद्ध करने के चरण से आगे बढ़ चुका है और अब इसे देश के औद्योगिक एवं ऊर्जा तंत्र में बड़े पैमाने पर एकीकृत करने के महत्वपूर्ण दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल स्वच्छ ऊर्जा का निर्माण करना नहीं है, बल्कि हरित विकास सुनिश्चित करना है। भारत का ऊर्जा परिवर्तन ऐसा होना चाहिए जो एक साथ स्थिरता, किफायत, विश्वसनीयता और ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करे। हमारा मजबूत घरेलू बाजार, नीतिगत प्रतिबद्धता और तेजी से परिपक्व होता पारिस्थितिकी तंत्र हमें यह संतुलन हासिल करने की विशिष्ट क्षमता प्रदान करता है।”
पंजाब सरकार के ऊर्जा विभाग के श्री बसंत गर्ग ने नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने में प्रगतिशील राज्य नीतियों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, “नवीकरणीय ऊर्जा केवल पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी बढ़ावा देती है।” उन्होंने कहा कि पंजाब ने रूफटॉप सोलर अनुमोदनों को सरल बनाने, वर्चुअल नेट मीटरिंग लागू करने और नवीकरणीय ऊर्जा सीमाओं को बढ़ाने जैसे उपभोक्ता-अनुकूल सुधार लागू किए हैं, जिससे उपभोक्ताओं और उद्योगों के बीच हरित ऊर्जा अपनाने को प्रोत्साहन मिला है।
अपने उद्योग संबोधन में बीएसईएस राजधनी पावर लिमिटेड के सीईओ श्री अभिषेक रंजन ने कहा, “भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा को एक साथ उपभोक्ता-केंद्रित और ग्रिड-केंद्रित होना होगा। भविष्य ऐसी नवोन्मेषी तकनीकों, मजबूत नीतियों और टिकाऊ व्यावसायिक मॉडलों में निहित है जो उपभोक्ताओं को अधिकतम लाभ प्रदान करें तथा ग्रिड सुरक्षा, विश्वसनीयता और निवेशकों का विश्वास बनाए रखें।” उन्होंने आगे कहा, “जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ेगी, हमारा ध्यान केवल हरित ऊर्जा जोड़ने तक सीमित नहीं रह सकता। हमें एक मजबूत और लचीली बिजली व्यवस्था तैयार करनी होगी। ऊर्जा भंडारण, सहायक सेवाएं, वितरित ऊर्जा संसाधन और स्मार्ट ग्रिड योजना भविष्य की मांग को पूरा करने और बिजली की गुणवत्ता तथा प्रणाली की स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”
‘ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों और नीतिगत क्रियान्वयन में सामंजस्य: डिस्कॉम और उपभोक्ताओं के लिए संतुलन’ विषयक सत्र में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री राज प्रताप सिंह ने कहा, “ऊर्जा परिवर्तन तभी सफल हो सकता है जब नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स, उपभोक्ता और वितरण कंपनियां सभी वित्तीय रूप से सक्षम बने रहें। इसका समाधान ऐसा संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने में है जो सभी हितधारकों के हितों की रक्षा करे।”
वीडियो संदेश के माध्यम से राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. रोहित गुप्ता ने कहा, “वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्ता भारत की कुल बिजली खपत के आधे से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे वे देश के नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन के सबसे महत्वपूर्ण प्रेरक तत्वों में शामिल हो जाते हैं।” उन्होंने कहा कि राजस्थान औद्योगिक उपभोक्ताओं के बीच नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने को बढ़ावा देने के लिए प्रगतिशील नीतियां, सरल अनुमोदन प्रक्रियाएं और ऊर्जा भंडारण आधारित प्रोत्साहन योजनाएं लगातार लागू कर रहा है।
सम्मेलन के दूसरे सत्र “उत्तरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन में तेजी” में नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स तथा वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं के बीच RE100 प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने में तेजी लाने पर व्यापक चर्चा हुई। इस दौरान औद्योगिक संचालन में स्थिरता को शामिल करने, स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से विकास के अवसरों को बढ़ाने, नवोन्मेषी खरीद मॉडलों, नीतिगत प्रोत्साहनों, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा सफल नवीकरणीय ऊर्जा पहलों से प्राप्त व्यावहारिक अनुभवों पर विचार-विमर्श किया गया।

