
जयपुर। संयुक्त अभिभावक संघ ने केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पारित लोक परीक्षा (गलत साधन निवारण) संशोधन विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने छात्रों से किए गए वादे के अनुरूप पेपर लीक पर सख्ती दिखाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। दो माह में जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट, संगठित अपराध पर न्यूनतम 7 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने जैसे प्रावधान सकारात्मक हैं।
हालांकि संघ ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक को तैयार करने से पहले छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों से कोई चर्चा नहीं की गई। विधेयक में संयुक्त निगरानी समिति, छात्रों की आत्महत्या रोकने के ठोस प्रावधान, मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा, तथा पेपर लीक से प्रभावित विद्यार्थियों के लिए मुआवजा जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं का अभाव है। साथ ही शिक्षा माफिया और बार-बार अपराध करने वालों के विरुद्ध और अधिक कठोर एवं जवाबदेह प्रावधान जोड़े जाने चाहिए।
संयुक्त अभिभावक संघ की प्रमुख मांगें:
- राज्यसभा से पारित होने से पहले संयुक्त निगरानी समिति का गठन अनिवार्य किया जाए।
- समिति में शिक्षक, विद्यालय और कोचिंग संचालक, छात्र, अभिभावक, काउंसलर, शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं पुलिस प्रशासन को शामिल किया जाए।
- छात्र आत्महत्या रोकथाम एवं मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण के लिए अलग कानूनी प्रावधान जोड़े जाएं।
- पेपर लीक से प्रभावित प्रत्येक छात्र के लिए मुआवजा तय किया जाए।
- शिक्षा माफिया और पेपर लीक गिरोहों पर और अधिक कड़े दंडात्मक एवं निवारक प्रावधान लागू किए जाएं।
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा, “सरकार की पहल सराहनीय है, लेकिन केवल दंड बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक यह कानून अधूरा रहेगा। सरकार राज्यसभा में विधेयक पारित कराने से पहले सभी हितधारकों से चर्चा कर आवश्यक संशोधन करे, ताकि देश के विद्यार्थियों को सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था मिल सके।”

