
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को सौंपा गया परिवहन उद्योग की समस्याओं का ज्ञापन
नई दिल्ली :दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर परिवहन उद्योग से जुड़े विभिन्न गंभीर मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल ने वींएलटीडी एवं पैनिक बटन व्यवस्था में कथित अनियमितताओं, ऐप बेस्ड टैक्सीयों के ड्राइवर्स की सुरक्षा की मांग,वाणिज्यिक वाहनों पर 80 किमी प्रति घंटा स्पीड लिमिट, बढ़ते ट्रैफिक चालान, ऑटो -टैक्सी औऱ स्कूल बसों के अनिवार्य विद्युतीकरण, BS-4 वाहनों पर प्रतिबंध, कमर्शियल वाहनों के लिए राहत योजनाओं तथा E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से जुड़ी चिंताओं को प्रमुखता से उठाया।
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि दिल्ली और एनसीआर में हजारों परिवहन संचालक लगातार बढ़ते नियमों, जुर्मानों और महंगी नीतियों के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। स्कूल बस संचालकों ने चेतावनी दी कि सीएनजी बसों को हटाकर इलेक्ट्रिक बसें अनिवार्य किए जाने से परिवहन लागत कई गुना बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर अभिभावकों पर पड़ेगा और स्कूल फीस में वृद्धि हो सकती है।
बैठक के दौरान श्री नितिन गडकरी ने वींएलटीडी एवं स्पीड लिमिट संबंधी मुद्दों पर सकारात्मक विचार करने तथा समाधान का प्रयास करने का आश्वासन दिया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल संबंधी विषय पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है और इस संबंध में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री से संवाद किया जाना चाहिए।
एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि परिवहन उद्योग की समस्याओं के समाधान हेतु सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
बता दें संगठन ने 4 अगस्त 2026 को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में विशाल प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया था , जिसमें देशभर से टैक्सी, टूरिस्ट, स्कूल बस एवं अन्य वाणिज्यिक वाहन संचालक भाग लेना था लेकिन दिल्ली पुलिस द्वारा इजाजत न मिलने के कारण राजघाट पर जाकर मौन प्रदर्शन किया वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल के प्रदर्शन से भी अपने को अलग रखा था।
संगठन ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से परिवहन उद्योग की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए ऐसी नीतियां बनाने की मांग की है जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लाखों लोगों की आजीविका की भी रक्षा कर सकें।

