दुल्हनिया ले जायेंगे :फ़िल्म कॉमेडी, इमोशन और पारिवारिक रिश्तों के ताने-बाने के जरिए एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को हल्के-फुल्के लेकिन प्रभावी अंदाज़ में सामने लाती है।

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मूवी रिव्यू:

क्या 30 की उम्र पार करते ही लड़की की शादी कर देना समाज की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए? इसी अहम सवाल को उठाती है निर्देशक आकाशादित्य लामा की फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’। यह फिल्म कॉमेडी, इमोशन और पारिवारिक रिश्तों के ताने-बाने के जरिए एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को हल्के-फुल्के लेकिन प्रभावी अंदाज़ में सामने लाती है।


करीब 2 घंटे 8 मिनट की इस फिल्म की कहानी 32 वर्षीय नव्या (खुशाली कुमार) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके पिता (महेश मांजरेकर) उसकी शादी को लेकर बेहद चिंतित हैं। जल्दबाजी में उसकी शादी एक ऐसे युवक से तय कर दी जाती है, जिसका अतीत संदिग्ध है। सच जानने के बावजूद नव्या अपने पिता का दिल नहीं तोड़ना चाहती और एक अनोखा फैसला लेती है—शादी तो उसी दिन होगी, लेकिन सही जीवनसाथी के साथ। इसके बाद शुरू होती है एक दिलचस्प और भावनात्मक यात्रा, जिसमें कई उतार-चढ़ाव और मनोरंजक घटनाएं देखने को मिलती हैं। ओंकार कपूर का किरदार कहानी में अहम मोड़ लाता है।


फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका क्लाइमैक्स है, जो एक साफ संदेश देता है—शादी की कोई “एक्सपायरी डेट” नहीं होती। लड़की को तभी शादी करनी चाहिए, जब उसे सही साथी मिले। हालांकि पहले हाफ में कहानी की रफ्तार थोड़ी धीमी है और कुछ घटनाएं अनुमानित लगती हैं, लेकिन दूसरा हाफ फिल्म को संभाल लेता है।
अभिनय की बात करें तो खुशाली कुमार ने नव्या के किरदार में ईमानदारी और संवेदनशीलता दिखाई है। उन्होंने एक ऐसी लड़की की दुविधा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है, जो परिवार और अपने फैसलों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। महेश मांजरेकर एक चिंतित पिता के रूप में प्रभावित करते हैं, खासकर उनके और खुशाली के बीच के भावनात्मक दृश्य फिल्म की ताकत बनते हैं। ओंकार कपूर सहज अभिनय से कहानी में हल्कापन लाते हैं, वहीं पीयूष मिश्रा अपनी सीमित उपस्थिति के बावजूद मजबूत छाप छोड़ते हैं।
फिल्म का निर्माण विकास अग्रवाल,आकाशादित्य लामा ,सुमन मौर्य एवं अतुल गंगवार ने किया है
निर्देशक आकाशादित्य लामा ने एक गंभीर विषय को बिना भारी बनाए, मनोरंजक ढंग से पेश किया है, जो फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है। सिनेमैटोग्राफी कहानी के माहौल के अनुरूप है और विजुअल ट्रीटमेंट आकर्षक लगता है। एडिटिंग पहले हाफ में थोड़ी कसी जा सकती थी, लेकिन दूसरे हिस्से में फिल्म रफ्तार पकड़ लेती है। संवाद कई जगह मुस्कुराने पर मजबूर करते हैं, जबकि क्लाइमैक्स भावनात्मक असर छोड़ता है।
संगीत भी फिल्म की एक मजबूत कड़ी है। ‘बिटिया पराई नहीं होती’ गाना दिल को छूता है और फिल्म के संदेश को मजबूती देता है, जबकि ‘जलवा दिखा जाए’ मनोरंजन का तड़का लगाता है।

फाइनल वर्डिक्ट:
‘दुल्हनिया ले आएगी’ एक नई कहानी कहती हैं,और यह समाज में लड़कियों की शादी को लेकर बनी सोच पर जरूरी सवाल उठाती है। कॉमेडी, इमोशन और सामाजिक संदेश का संतुलन इसे परिवार के साथ देखने लायक फिल्म बनाता है।
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ (4/5)

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