
मुख्य अथिति रहे,दिल्ली विधानसभा
अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता।
साहित्य अकादेमी एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला
महाविद्यालय के संयुक्त तत्त्वावधान में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर ‘डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती : बौद्धिक विरासत, राष्ट्रीय दृष्टि और विकसित भारत की अनवरत यात्रा’ विषयक द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजेन्द्र गुप्ता रहे, साहित्य अकादेमी के उपसचिव एन. सुरेश बाबू, इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक के. जी. सुरेश विशिष्ट अतिथि रहे।
प्राचार्या प्रो. नीलम गोयल ने अपने स्वागत-भाषण में संगोष्ठी के विषय की प्रासंगिकता रेखांकित करते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व, बौद्धिक अवदान तथा राष्ट्रीय दृष्टि पर प्रकाश डाला।

महाविद्यालय की शासी निकाय अध्यक्षा प्रो. सुदेशना मजूमदार ने विकसित भारत की संकल्पना में मातृभूमि के प्रति निष्ठा, राष्ट्रीय अखण्डता, शिक्षा के उद्देश्यों तथा सभ्यतागत मूल्यों के महत्त्व को रेखांकित किया।
साहित्य अकादेमी के उपसचिव श्री एन. सुरेश बाबू ने रवीन्द्रनाथ ठाकुर, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी तथा उनके पिता डॉ. आशुतोष मुखर्जी के योगदानों का उल्लेख किया।
इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक श्री के. जी. सुरेश ने डॉ. मुखर्जी के व्यक्तित्व के विविध पक्षों का उल्लेख करते हुए उन्हें विधिवेत्ता, राष्ट्रवादी नेता, योद्धा एवं शिक्षाविद् के रूप में स्मरण किया।
मुख्य अतिथि एवं दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजेन्द्र गुप्ता ने छात्राओं को इतिहास के गहन अध्ययन, तथ्यों के परीक्षण तथा राष्ट्रनिर्माण में महापुरुषों के योगदान को समझने की प्रेरणा दी।
संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. राजकुमार फलवारिया ने धन्यवाद-ज्ञापन दिया। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. सुरेन्द्र खान तथा सह-संयोजक डॉ. संजीव कुमार एवं डॉ. बलराम नायक रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. आमना मिर्जा ने किया।

