
नई दिल्ली:, गृहा काउंसिल ने 3 नवम्बर को नई दिल्ली में 18वें गृहा सम्मेलन के उद्घाटन सत्र का आयोजन किया, सम्मेलन का विषय है “Pathways for a Low-Carbon Future: Buildings to Infrastructure.** यानि कम-कार्बन के भविष्य की ओरः इमारतों से लेकर बुनियादी ढांचे तक। उद्घाटन समारोह के दौरान कई गणमान्य दिग्गज, सेक्टर के लीडर्स मौजूद रहे। उनके साथ डॉ विभा धवन, महानिदेशक, टीईआरआई एवं प्रेज़ीडेन्ट,गृहा काउन्सिल, श्री संजय सेठ, वाईस प्रेज़ीडेन्ट एवं सीईओ, गृहा काउन्सिल और कार्यकारी निदेशक- स्ट्रैटेजी एंड पार्टनरशिप्स, टीईआरआई ने भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

सीओपी31 से पहले एक प्रारंभिक संवाद के रूप में आयोजित यह सम्मेलन, भारत की बदलती जलवायु प्राथमिकताओं और दृष्टिकोणों पर विचार करने के लिए मंच प्रदान करता है, जो वैश्विक जलवायु एजेंडा में भारत के योगदान को दिशा दे सकते हैं। यह सम्मेलन विभिन्न हितधारकों को ज्ञान के आदान-प्रदान, नई प्रगति और प्रभावशाली सामुदायिक पहलों को प्रदर्शित करने, खामियों को समझने का मौका देता है तथा साथ ही प्रत्यास्थ, संसाधन-कुशल एवं कम कार्बन वाले पर्यावरण के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों के लिए भी प्रेरित करता है।
इस अवसर पर सभा को सम्बोधित करते हुए श्री संजय सेठ, वाईस प्रेज़ीडेन्ट एवं सीईओ, गृहा काउन्सिल और कार्यकारी निदेशक- स्ट्रैटेजी एंड पार्टनरशिप्स, टीईआरआई ने कहा, ‘‘इन्फ्रास्ट्रक्चर ही सुव्यवस्थित एवं प्रत्यास्थ समाज की नींव है, जो भारत की जलवायु महत्वांकांक्षाओं में भी केंद्रीय भूमिका निभाता है। आज हमारा देश बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रहा है, ऐसे में आज हमारे द्वारा चुने गए विकल्प आने वाले कई दशकों के लिए हमारे कार्बन के भवष्यि को आकार दे सकते हैं। इमारतों में अपनाए जाने वाले सस्टेनेबिलिटी के सिद्धान्त अब उन सिस्टम्स तक विस्तारित करने चाहिए, जो उन्हें कनेक्ट करती हैं, और उनका आधार बनाती हैं। इसके लिए हमें सोच में बदलाव लाना होगा, अलग-अलग इमारतों के बजाए एकीकृत इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देना होगा, अलग-अलग सुधारों के बजाए व्यवस्थित बदलाव की ओर रूख करना होगा। जो हमारे कार्बन फुटप्रिन्ट को कम करने तथा कम कार्बन वाले प्रत्यास्थ भविष्य के निर्माण के लिए बेहद ज़रूरी है।

इस अवसर पर सभा को सम्बोधित करते हुए मध्य प्रदेश सरकार में लोक निर्माण विभाग के सचिव और मध्य प्रदेश बिल्डिंग डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक, श्री सिबी चक्रवर्ती एम. ने कहा ‘‘अगर हम प्रदर्शन को माप नहीं सकते, तो हम यह भी तय नहीं कर पाएंगे कि हमारे निर्णयों से अपेक्षित परिणाम मिल रहे हैं या नहीं। मध्य प्रदेश राज्य में, गृहा ग्रीन बिल्डिंग्स के लिए एक मानक रेटिंग फ्रेमवर्क बन गया है। यह इमारतों और भूमि विकास के क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी का आकलन करने के लिए एक मान्यता प्राप्त और व्यापक तरीका प्रदान करता है। सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रति एक अधिक एकीकृत दृष्टिकोण में इसकी बढ़ती भूमिका को देखकर बहुत अच्छा महसूस होता है।’’

अपने विशेष संबोधन में, सेंट-गोबेन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और एशिया पैसिफिक व भारत के सीईओ श्री श्रीधर एन. ने कहा ‘‘ऊर्जा की सबसे स्वच्छ और सबसे सस्ती युनिटवह है, जिसकी किसी इमारत को कभी ज़रूरत ही न पड़े।
भारत के निर्माण परिवेश को बदलना एक ऐसी ज़िम्मेदारी है जिसे कोई भी संगठन अकेले पूरा नहीं कर सकता। गृहा के साथ यह साझेदारी सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत को एक साथ लाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसका उद्देश्य निर्माण के सस्टेनेबल तरीकों को बढ़ावा देना और स्वस्थ एवं प्रत्यास्थ भविष्य का मार्ग प्रशस्त करना है।’’
अपनी विशेष टिप्पणी में वर्ल्ड बैंक ग्रुप के ऑपरेशन्स मैनेजर और एक्टिंग कंट्री डायरेक्टर, श्री पॉल प्रोसी ने कहा, ‘‘ आज के दौर में चुनौती यह समझना नहीं है कि ग्रीन बिल्डिंग क्यों महत्वपूर्ण हैं; बल्कि ऐसी सही नीतियां, वित्तीय प्रणाली बनाने की है, जो सस्टेनेबल निर्माण को आर्थिक रूप से व्यवहारिक और एक पसंदीदा विकल्प बना सकें।
जंगृहा एक महत्वपूर्ण पहल है, खासकर इसलिए क्योंकि यह खुद बनाए गए घरों और छोटे स्तर की इमारतों में सस्टेनेबिलिटी और मजबूती पर ध्यान देती है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो आमतौर पर पारंपरिक ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन की पहुंच से बाहर रहा है। हम गृहा काउंसिल के साथ जुड़ने और स्मॉल स्केल हाउसिंग सेक्टर में मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं।”
उद्घाटन सत्र के दौरान, गृहा काउंसिल ने तीन महत्वपूर्ण प्रकाशन भी जारी किए – मध्य प्रदेश पीडब्ल्यूडी प्रशिक्षण रिपोर्ट; द स्काई मॉडलिंग रिपोर्ट ; और शाश्वतः लेट नेचर बी। इसके अलावा, गृहा काउंसिल ने अपने रेटिंग इकोसिस्टम की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के लिए एआई-आधारित टूल्स भी पेश किए।
इस उद्घाटन सत्र के दौरान ऐसटेक और गृहा काउंसिल के बीच एएमओयू भी साईन किया गया, जो सस्टेनेबल पर्यावरण के लिए आपसी सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में एक और कदम है।
सत्र का समापन गृहा काउंसिल की डिप्टी सीईओ और सचिव, तथा टीईआरआई में सस्टेनेबल बिल्डिंग्स की निदेशक, सुश्री शबनम बस्सी के समापन संबोधन के साथ हुआ।
उद्घाटन सत्र के बाद, सम्मेलन में एक प्रदर्शनी “आरोहण” का शुभारंभ किया गया। प्रदर्शनी में कई डायनामिक ज़ोन्स में अत्याधुनिक सस्टेनेबल मटीरियल, टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन्स पेश किए गए। इसी तरह एक लाईफ-साइज़ मॉक-अप स्पर्श 2.0 भी कार्यक्रम का आकर्षण केन्द्र बन गया, जिसे कम कार्बन वाले पर्यावरण का व्यावहारिक अनुभव देने के लिए डिज़ाइन किया गया था। साथ ही, काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के सहयोग से आयोजित आर्किटेक्चरल डिज़ाइन प्रतियोगिता “इंडियन स्ट्रीट्स रीइमैजिन्ड” के तहत शॉर्टलिस्ट किए गए डिज़ाइन पेश किए गए। इन डिज़ाइनों में भारतीय सड़कों की नई कल्पना के लिए समावेशी, जलवायु-अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार दृष्टिकोणों पर रोशनी डाली गई।

