
एनएएफसीयूबी के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “को-ऑप कुंभ 2025” मे बैंक औऱ ग्राहकों के लिए समन्वय बनेगा।
नई दिल्ली। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें नैशनल फेडरेशन ऑफ अर्बन को आपरैटिव बैंक एण्ड क्रेडिट सोसायटीज एनएएफसीयूबी द्वारा आयोजित होने वाले आगामी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को-ऑप कुंभ 2025 की औपचारिक घोषणा की गई। यह शीर्ष संगठन देशभर के 1,500 से अधिक शहरी सहकारी बैंकों और लगभग 60,000 क्रेडिट सोसाइटीज़ का प्रतिनिधित्व करता है।
यह दो दिवसीय वैश्विक सम्मेलन 10–11 नवम्बर 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसे भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है। डिजिटलाइजिंग ड्रीम्स – एम्पावरिंग कम्युनिटीज़ विषय पर आधारित यह सम्मेलन भारत की सहकारी यात्रा में एक ऐतिहासिक अवसर है और अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 का उत्सव भी मनाएगा। पत्रकारों को मीडिया को संबोधित करते हुए लक्ष्मी दास, अध्यक्ष, एनएएफसीयूबी ने कहा कि को-ऑप कुंभ 2025 केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि डिजिटल युग में सहकारी वित्त को पुनर्परिभाषित करने का एक सामूहिक आंदोलन है। संवाद, नवाचार और साझा दृष्टिकोण के माध्यम से हम समुदायों को सशक्त बनाने और वित्तीय समावेशन की सहकारी नींव को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। सुरेश प्रभु, अध्यक्ष, राष्ट्रीय सहयोग नीति समिति भारत सरकार, पूर्व अध्यक्ष, सारस्वत सहकारी बैंक, पूर्व बोर्ड सदस्य, कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र मेंकेंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। श्री सुरेश प्रभु, अध्यक्ष, राष्ट्रीय सहयोग नीति समिति (भारत सरकार), पूर्व अध्यक्ष, सारस्वत सहकारी बैंक, पूर्व बोर्ड सदस्य, एनएएफसीयूबी एवं एनसीयूआई तथा पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता करेंगे। एवं एनसीयूआई तथा पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता करेंगे।
को-ऑप कुंभ 2025 में नीति नवाचार, सुशासन सुधार, तकनीकी प्रगति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। चर्चाओं में यह भी विचार किया जाएगा किभारत सरकार के “सहकार से समृद्धि” मिशनके अनुरूप किस प्रकार व्यावसायिकता को बढ़ाया जाए, पारदर्शिता को प्रोत्साहित किया जाए, और शहरी सहकारी बैंकों व क्रेडिट सोसाइटीज़ के डिजिटल परिवर्तन को तीव्र किया जाए।
इस आयोजन की एक प्रमुख विशेषता“दिल्ली घोषणा 2025 – रोडमैप टू 2030”का अंगीकरण होगा, जो एक दूरदर्शी नीति दस्तावेज़ है और सहकारी संस्थाओं में सुशासन, पूंजी पर्याप्तता, जोखिम प्रबंधन और डिजिटल समावेशन को सुदृढ़ करने की रणनीतियों को रेखांकित करेगा।
मीडिया को संबोधित करते हुए ज्योतिन्द्र मेहता, अध्यक्ष, एनयूसीएफडीसी ने कहा कि “को-ऑप कुंभ 2025 सहकारी ऋण आंदोलन के लिए एक नए युग का प्रतीक है। यह विचारों, नवाचार और समावेशन का संगम है; जहाँ तकनीक और विश्वास एक साथ आते हैं। हमारा लक्ष्य एक ऐसा डिजिटल रूप से सशक्त सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जो समाज के हर सदस्य की समृद्धि सुनिश्चित करे।”
इस सम्मेलन के अपेक्षित परिणामों में “दिल्ली घोषणा 2025” का अंगीकरण, सहकारिता मंत्रालय, भारतीय रिज़र्व बैंक और राज्य सरकारों के लिए नीतिगत अनुशंसाएँ प्रस्तुत करना, देशी और अंतर्राष्ट्रीय सहकारी संस्थानों के बीच नई साझेदारियाँ एवं समझौता ज्ञापनों (एमओयू) की स्थापना, डिजिटल नवाचार और सुशासन पर आधारित ज्ञान-संग्रह का निर्माण, तथा सहकारी आंदोलन में महिलाओं और युवाओं के नेतृत्व को सशक्त बनाना शामिल हैं।
