
युवा भारत को बेहतर पोषण देने की दिशा में एम्वे इंडिया का एक और कदम
पहले चरण में 40 हजार लोगों को मिला लाभ, अब लगभग 15 हजार और लोग होंगे लाभान्वित
नई दिल्ली, 1 जुलाई 2026: बच्चों को पोषण की सही जानकारी देना, एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण निवेशों में से एक है। इसी विश्वास के साथ, स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के क्षेत्र में देश की अग्रणी कंपनी एम्वे इंडिया ने आज नई दिल्ली में अपने प्रमुख पोषण कार्यक्रम, ‘पावर ऑफ 5’ (Po5) के तहत स्कूल पोषण शिक्षा कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत की घोषणा की है। पहले चरण के बेहतरीन नतीजों को देखते हुए, एम्वे इंडिया इस कार्यक्रम का दायरा बढ़ाने, इसके प्रभाव को और गहरा करने तथा पोषण शिक्षा को स्कूली शिक्षा का एक अहम हिस्सा बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत कर रहा है। दूसरे चरण का उद्देश्य पोषण शिक्षा को रोज़मर्रा की पढ़ाई का हिस्सा बनाना है। इसके लिए क्लासरूम की दिलचस्प गतिविधियों, डिजिटल लर्निंग टूल्स और समुदाय के स्तर पर चलाए जाने वाले अभियानों को आपस में जोड़ा जाएगा, ताकि बच्चे बचपन से ही खाने-पीने की स्वस्थ आदतें अपना सकें।

एम्वे इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर, श्री रजनीश चोपड़ा ने कहा,
“हमारा ‘पावर ऑफ 5’ स्कूल पोषण शिक्षा कार्यक्रम केवल जागरूकता बढ़ाने से कहीं आगे बढ़कर है—यह बच्चों को हर दिन स्वास्थ्यवर्धक विकल्प चुनने के लिए ज्ञान और आत्मविश्वास से सशक्त बनाने के बारे में है। वास्तविक प्रभाव तब दिखता है जब बच्चों में पोषण की गहरी समझ विकसित होती, और उन्हें पता चलता है कि कैसे जागरूकता, आदतें और रोज़मर्रा के चुनाव मिलकर उनके स्वस्थ विकास और जीवनभर की भलाई में मदद करते हैं। कार्यक्रम के पहले चरण ने बिल्कुल यही कर दिखाया है। 10,000 बच्चों को सीधे तौर पर शामिल करने के साथ-साथ, 40,000 से अधिक लोगों तक पहुँचकर हमने उनके व्यवहार में सार्थक बदलाव देखा है—जिसमें बच्चों द्वारा स्वास्थ्यवर्धक भोजन चुनना, बेहतर स्वच्छता प्रथाओं को अपनाना और अधिक पौष्टिक जीवन शैली को अपनाना शामिल है। इसी गति को आगे बढ़ाते हुए और लोगों को बेहतर जीवन जीने में मदद करने के हमारे दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, मुझे दूसरे चरण की घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है। यह अगला चरण स्कूली प्रणालियों में पोषण साक्षरता और तकनीक-आधारित शिक्षा को शामिल करके हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है, साथ ही इसके प्रभाव को कक्षाओं से परे परिवारों और समुदायों तक पहुँचाता है। अंततः, यह पहल केवल इस बारे में नहीं है कि बच्चे क्या खाते हैं; बल्कि यह उन्हें स्वस्थ जीवन के लिए जागरूक वक्ता बनने, अपने घरों और समुदायों में सकारात्मक बदलाव को प्रेरित करने और देश के एक स्वस्थ भविष्य में योगदान देने के लिए सक्षम बनाने के बारे में है।”
श्री प्रवीण खंडेलवाल, चांदनी चौक, दिल्ली से लोकसभा सांसद ने कहा,
“आज हमारे क्लासरूम में ही भारत का भविष्य आकार ले रहा है, और यह सुनिश्चित करना कि हर बच्चे को पौष्टिक भोजन मिले, हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है। इसी दिशा में, कुपोषण को खत्म करना और एक स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण करना माननीय प्रधानमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। ‘पोषण अभियान’ जैसी पहलों के ज़रिए यह सुनिश्चित करने के लिए अहम कोशिशें की गई हैं कि बच्चों को उनके सर्वांगीण विकास के लिए ज़रूरी पोषण मिले। हालाँकि, देश के भविष्य को सुरक्षित करना सिर्फ़ सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं हो सकती। यह एक सामूहिक कर्तव्य है जिसके लिए नागरिकों, समुदायों और ज़िम्मेदार कॉर्पोरेट संस्थानों की सक्रिय भागीदारी की ज़रूरत है। मैं ‘पावर ऑफ़ 5 | स्कूल न्यूट्रिशन एजुकेशन प्रोग्राम’ के ज़रिए इस साझा विज़न को आगे बढ़ाने के लिए एमवे इंडिया की तारीफ़ करता हूँ, जो स्कूली बच्चों के बीच पोषण के प्रति जागरूकता और उनकी सेहत को बेहतर बना रहा है। यह पहल दिखाती है कि कैसे कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में मददगार साबित हो सकती है और अगली पीढ़ी के लिए एक स्वस्थ और मज़बूत भविष्य बनाने में सार्थक प्रभाव डाल सकती है।“
चाइल्डफंड इंडिया के सहयोग से चलाया जा रहा यह कार्यक्रम वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान दक्षिण दिल्ली के 10 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में लागू किया जाएगा। इससे लगभग 15,000 लोग लाभान्वित होंगे। इनमें पहली से आठवीं कक्षा तक के करीब 2,500 छात्र-छात्राएं, उनके शिक्षक, अभिभावक और पूरा स्कूल समुदाय शामिल है।
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन दक्षिण दिल्ली के लाजपत नगर स्थित शहीद हेमू कालानी सर्वोदय बाल विद्यालय में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सुश्री मनीषा तनेजा (स्टेट नोडल ऑफिसर, एजुकेशन एंड लिटरेसी, दिल्ली सरकार), श्री रजनीश चोपड़ा (मैनेजिंग डायरेक्टर, एम्वे इंडिया) और श्री आनंद विश्वकर्मा (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, चाइल्डफंड इंडिया) उपस्थित रहे। इस दौरान पोषण पर आधारित किचन गार्डन और हर्ब पॉट तैयार किए गए, छात्रों के लिए रोचक खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया तथा उन्हें पौष्टिक भोजन परोसा गया।
चाइल्डफंड इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, श्री आनंद विश्वकर्मा ने कहा,
‘’एम्वे इंडिया के साथ इस महत्वपूर्ण पहल का हिस्सा बनकर हमें गर्व है। स्कूली उम्र में पोषण संबंधी सही जानकारी बच्चों के स्वस्थ और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव रखती है। इस कार्यक्रम के माध्यम से हम बच्चों, शिक्षकों और समुदाय के साथ मिलकर ऐसी अच्छी आदतों को बढ़ावा देंगे, जो जीवनभर उनके साथ रहें।”
एक वर्ष की अवधि वाला यह पोषण कार्यक्रम चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—बच्चों के लिए पोषण शिक्षा, शिक्षकों की क्षमता विकास, तकनीक आधारित शिक्षण और अभिभावकों व समुदाय की सक्रिय भागीदारी।
रोचक और सहभागितापूर्ण मॉड्यूल के माध्यम से बच्चों को संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली, स्वच्छता तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों के बारे में जानकारी दी जाती है। इसके साथ ही ‘न्यूट्रिशन एंबेसडर’ कार्यक्रम के जरिए बच्चों को एक-दूसरे से सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। वहीं शिक्षक ‘न्यूट्रिशन चैंपियंस’ की भूमिका निभाते हुए कहानियों, खेलों और रोल-प्ले जैसी गतिविधियों के माध्यम से पोषण संबंधी विषयों को रोजमर्रा की स्कूली पढ़ाई से जोड़ते हैं। डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग कियोस्क भी बच्चों में जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ आदतों को अपनाने में मदद करते हैं। स्कूल से बाहर भी यह कार्यक्रम परिवारों और समुदाय को सक्रिय रूप से जोड़ता है, ताकि घरों में भी स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा मिल सके।एक साल का यह पोषण कार्यक्रम चार मुख्य स्तंभों पर आधारित है: बच्चों के लिए पोषण शिक्षा, शिक्षकों की क्षमता बढ़ाना, टेक्नोलॉजी की मदद से पढ़ाई, और माता-पिता व समाज की भागीदारी।
कार्यक्रम के प्रभाव का आकलन करने के लिए शुरुआत और समापन, दोनों चरणों में व्यापक मूल्यांकन किया जाता है। केएपी (नॉलेज, एटीट्यूड एंड प्रैक्टिस) असेसमेंट के माध्यम से बच्चों के पोषण संबंधी ज्ञान, खान-पान की आदतों, बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) और अन्य स्वास्थ्य संकेतकों में आए सुधार का मूल्यांकन किया जाता है। इस पहल का लक्ष्य है कि कम से कम 70 प्रतिशत छात्र पोषण संबंधी जानकारी और अपने पोषण स्तर में न्यूनतम 30 प्रतिशत सुधार हासिल करें। साथ ही, शिक्षकों की दीर्घकालिक क्षमता को मजबूत करना और परिवारों व समुदाय में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है।
यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों—एसडीजी 2 (ज़ीरो हंगर) और एसडीजी 3 (अच्छी सेहत और तंदुरुस्ती)—को आगे बढ़ाने में योगदान देती है। साथ ही यह भारत सरकार की प्रमुख पहलों, जैसे पोषण अभियान और आयुष्मान भारत के तहत संचालित स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम, को भी मजबूती प्रदान करती है।
पावर ऑफ 5 स्कूल न्यूट्रिशन एजुकेशन प्रोग्राम — पहले चरण के परिणाम
वित्त वर्ष 2025-26 में नरिशिंग स्कूल्स फाउंडेशन के सहयोग से संचालित ‘पावर ऑफ 5’ स्कूल पोषण शिक्षा कार्यक्रम के पहले चरण ने दिल्ली और चेन्नई में उल्लेखनीय और मापनीय परिणाम दिए। नरिशिंग स्कूल्स फाउंडेशन द्वारा संचालित कार्यक्रम के मूल्यांकन अध्ययन में सामने आए प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं:
• 40,000 से अधिक लोग लाभान्वित हुए, जिनमें 10,000 स्कूली बच्चे सीधे तौर पर शामिल थे। जागरूकता के विस्तार के माध्यम से उनके परिवारों के लगभग 30,000 सदस्य भी इस पहल से जुड़े और लाभान्वित हुए।
• रिपोर्ट में पता चला
o सामान्य बीएमआई वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी: दिल्ली में 11% और चेन्नई में 8% अधिक बच्चे सामान्य बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की श्रेणी में पहुंचे।
o कुपोषण और मोटापे में कमी: कम वजन तथा अधिक वजन/मोटापे की समस्या में लगभग 5% की कमी दर्ज की गई।
o स्वच्छता संबंधी आदतों में सुधार: साबुन से हाथ धोने वाले बच्चों की संख्या में दिल्ली में 31% और चेन्नई में 38% की वृद्धि दर्ज की गई।
o खान-पान की आदतों में सकारात्मक बदलाव: बच्चों ने अधिक संतुलित भोजन अपनाया और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम किया।
o कार्यक्रम को मिला व्यापक समर्थन: 80 से 100 प्रतिशत छात्रों ने इस कार्यक्रम को आगे भी जारी रखने की इच्छा जताई, जो इसकी उपयोगिता और समुदाय में इसकी व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
• सबसे खास बात यह रही कि 80 से 100% छात्रों ने इस प्रोग्राम को आगे भी जारी रखने की इच्छा जताई—जो यह दिखाता है कि समाज और बच्चों ने इस मुहिम को कितने बड़े स्तर पर स्वीकार किया और पसंद किया है।

