
नई दिल्ली, : मीडिया उद्यमी और दूरदर्शी डॉ. सुभाष चंद्र द्वारा स्थापित मेंटरशिप एवं संवाद मंच SACH – सारथी ऑफ योर लाइफ अपने तीसरे सीजन के साथ लौट रहा है। इस बार यह पहल शैक्षणिक संस्थानों से आगे बढ़कर ग्रामीण भारत के समुदायों तक अपनी पहुंच का विस्तार करेगी।
पिछले दो सीजनों में SACH एक सार्थक संवाद मंच के रूप में उभरा है, जिसने नेतृत्व, उद्यमिता, व्यक्तिगत विकास और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर छात्रों, युवा पेशेवरों, उद्यमियों, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों और भावी नेताओं को एक साथ जोड़ने का कार्य किया है।
सीजन 3 इस पहल के विस्तार का महत्वपूर्ण चरण है, जिसके तहत ये संवाद अब केवल शैक्षणिक परिसरों और शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहकर कस्बों और गांवों तक पहुंचेंगे, जहां स्थानीय समुदायों को अपनी आकांक्षाओं, अनुभवों और विचारों को साझा करने का अवसर मिलेगा।
नए सीजन के बारे में बात करते हुए ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के संस्थापक, डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा,
“भारत की वास्तविक ताकत उसके लोगों में निहित है और प्रत्येक व्यक्ति की अपनी एक कहानी है, जिसे सुना जाना चाहिए। हम अक्सर शहरों और शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले संवादों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जबकि हमारे गांवों और छोटे कस्बों में भी अपार ज्ञान, दृढ़ता और आकांक्षाएं मौजूद हैं। SACH के सीजन 3 के माध्यम से मैं विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से मिलने, उनके अनुभवों को सुनने और ऐसा मंच तैयार करने के लिए उत्सुक हूं, जहां वे अपने सपनों, चुनौतियों और भविष्य की उम्मीदों पर खुलकर बात कर सकें।”
सीजन 3 शैक्षणिक संस्थानों, युवा मंचों और उद्यमी समुदायों के साथ अपनी सहभागिता जारी रखेगा, वहीं ग्रामीण भारत में अपने संपर्क का भी व्यापक विस्तार करेगा। इस दौरान उद्देश्य, अध्यात्म और तेजी से बदलती दुनिया में आत्म-जागरूकता; शिक्षा, आजीवन सीखने और करियर के भविष्य; उद्यमिता, नवाचार और नेतृत्व; संचार, मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का प्रभाव; व्यक्तिगत विकास, धैर्य और लक्ष्य निर्धारण जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी।
नया सीजन 28 जून, रविवार, रात 10 बजे – ZEE मीडिया के सभी चैनलों पर प्रसारित होगा। इसके एपिसोड Z5 पर भी स्ट्रीम किए जाएंगे तथा ज़ी एंटरटेनमेंट के चैनलों पर भी प्रसारित किए जाएंगे।
SACH के पिछले संस्करणों में शैक्षणिक संस्थानों और क्षेत्रीय समुदायों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली थी। प्रतिभागियों ने इन संवादों को व्यावहारिक, ज्ञानवर्धक और अपने जीवन से जुड़ा हुआ बताया।

