हिडिमा मंडावी के फर्जी एंकउंटर, आदिवासियों पर हमले, जवाब दे सरकार :किशोर समरीते-राष्ट्रीय अध्यक्ष,सयुंक्त क्रांति पार्टी

हिड़मा मड़ावी के एन्कांउटर पर संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष किशोर समरीते ने उठाये सवाल, महामहिम राष्ट्रपति को लिखा पत्र
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं आंध्रप्रदेश में भी सीज़ फायर की मांग
लांजी। भारत में नक्सलवाद के नाम पर हिड़मा मड़ावी सहित हजारों आदिवासियों की हत्या की जांच करवाने तथा म.प्र. के बालाघाट एवं सिवनी जिले में स्थापित माफिया राज को समाप्त कर बालाघाट एवं सिवनी जिले को माफिया से मुक्त करवाने तथा छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश में नक्सली आपरेशन को सीज फ ायर घोषित करने लांजी-किरनापुर क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष किशोर समरीते ने महामहिम राष्ट्रपति को पत्र लिखकर न्यायोचित कार्यवाही की मांग की है। अपने पत्र में श्री समरीते ने उल्लेख किया है की पूरी दुनिया में इस समय मुख्य रूप से आतंकवाद एवं पर्यावरण संरक्षण बड़े मुद्दे हैं। देश में आदिवासी राष्ट्रपति छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री तथा मध्यप्रदेश में आदिवासी राज्यपाल के रहते आदिवासियों की हत्या कर ईनाम लेने की ईस्ट इंडिया कम्पनी के दौर से चालू परम्परा अभी भी बंद नहीं हो रही है। 2014 से आपरेशन ग्रीन हंट के नाम से चालू नक्सल आपरेशन में पुलिस अधिकारी एवं पुलिस बल द्वारा सर्वोच्च न्यायालय एवं केन्द्रीय गृह मंत्रालय के दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। संसद में महामहिम राष्ट्रपतिए माननीय प्रधानमंत्री तथा माननीय वित्त मंत्री के संसद में भाषण देश में गरीबी, भुखमरी एवं बेरोजगारी समाप्त नहीं कर पा रहे हैं। बेरोजगारी से परेशान युवक ग्राम एवं शहरों में यूट्यूबर तथा आदिवासी अंचलों में नक्सलवादी बन रहे हैं। देश के रोजगार कार्यालय एवं उद्योग केन्द्र बेकार साबित हो रहे हैं। केन्द्र सरकार के कार्यालय में 10786 किसानों ने 2023 तक आत्महत्या की, 2025 तक 13692 छात्रों ने आत्महत्या की, 2023 तक 171418 दिहाड़ी एवं खेतीहर मजदूरों ने आत्महत्या की, 2023 तक 26 हजार बेरोजगारों ने आत्महत्या की, 2023 तक 18 साल की युवतियों एवं नाबालिक बच्चियों के साथ 35 हजार से अधिक बलात्कार किये गये, 2025 तक 2450 हत्यायें तथा पुलिस हिरासत में 669 मौतें हुई। ये घटनायें पूरी सरकार की नाकामी को दिखाती है। इसके विपरीत छत्तीसगढ़ में हंसदेव के जंगलों की कटाई के खिलाफ विद्रोह करने वाला 7वीं पास हिड़मा मड़ावी का अडानी ग्रुप ने सुपारी देकर हत्या करवा दी। मामले की एनआईए एवं केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने जांच तक नहीं की। छत्तीसगढ़ में खनन माफियाओं ने मुख्यमंत्री नंदकुमार साय को 10 हजार करोड़ से अधिक रकम दी, जो सम्पत्ति की जांच में तथ्य सामने आयेंगे। पूरी दुनिया ने हथियारों से संघर्ष का कोई समर्थन नहीं करता किंतु हिड़मा मड़ावी का दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ में फर्जी एनकाउंटर के खिलाफ 20 हजार से अधिक आदिवासियों ने सरकार का विरोध किया। यह गंभीर विषय है। इसके विपरीत म.प्र. के बालाघाट जिले में 2018 से 2025 के बीच 45 पुलिस कर्मियों को निर्दोष आदिवासियों को नक्सली बताकर मारने के मामले में बिना कानून के आउट ऑफ टर्न पदोन्नति दी गयी, जिसकी सीबीआई जांच होनी चाहिये। 2022 में थाना लांजी के ग्राम बोलेगांव में पुलिस द्वारा डबलमनी में सोमेन्द्र कंकरायने एवं हेमराज आमाडारे के निवास में 700 करोड़ रूपये जप्त कर बिना जप्ती बनाये पूरी राशि आपस में बंदरबांट करने वाले तत्कालीन पुलिस अधीक्षक समीर सौरभ एवं उपपुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के विरूद्ध कोई विभागीय जांच नहीं की तथा आदित्य मिश्रा को पुन: बालाघाट पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थापना कर दी। सिवनी के पांडिया छपारा में रेत एवं शराब माफिया ने खुरसुरा निवासी विकास पटले को गोली मार दी। एसपी सिवनी ने अब तक ना तो आरोपियों को गिरफ्तार किया और ना ही हथियार जप्त किया। इसी तरह बालाघाट जिले में 4 वीरता पदक ले चुके आशीष शर्मा निरीक्षक का नक्सली हमले में शहीद होना संदेहास्पद है। मामले की एनआईए द्वारा जांच नहीं हुई और ना ही न्यायिक जांच। इसके विपरीत इनका शव बालाघाट शहर में घुमाकर लोगों की भावना से खिलवाड़ किया गया। जबकि आशीष शर्मा नरसिंहपुर के निवासी थे तथा नरसिंहपुर में इनका राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि किया जाना था। यह मामला पुलिस अधीक्षक के विरूद्ध कार्यवाही करने के लिये पर्याप्त है। भारत में केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, सर्वोच्च न्यायालय, सभी राज्यों के उच्च न्यायालय तथा देश के सभी मानव अधिकार आयोग, पुलिस की गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने में नाकाम हैं। जबकि पुलिस को पुलिस एक्ट, 1861 तथा सेंट्रल सिविल सर्विस कन्डक्ट रूल का पालन करना चाहिये। भारत में नक्सली आंदोलन नक्सलबाड़ी से 9 राज्यों तक 69 लोकसभा क्षेत्रों में फैल चुका है। एक लाख से अधिक युवक एवं युवतियां सरकार के खिलाफ हथियार लेकर खड़े हैं। पुलिस बल इन नक्सलियों का नरसंहार करने पर मदा है। जबकि 24 सांसदों के समर्थन से चलने वाली सरकार 69 लोकसभा सीटों पर इस नरसंहार में कमजोर हो गयी है। चूँकि इन नक्सलियों के गांवों एवं परिवार में 5 करोड़ से अधिक आदिवासी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। पाक अधिकृत काश्मीर पाकिस्तान के हिस्से से तथा आक्साई चीन, चीन के हिस्से से नहीं ला पाना भारत सरकार की बड़ी विफलता है। नक्सलवाद के अलावा भारत की राजधानी दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कलकत्ता, बंगलौर जैसे शहर गैंगस्टरों के कब्जे में है। केन्द्र सरकार गैंगस्टरों के मामले में मौन है। श्री समरीते ने महामहिम राष्ट्रपति से अपने पत्र में केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा आदिवासियों को नक्सलवादी बनाकर किया जा रहा नरसंहार को रोकने तथा म.प्र. में बालाघाट एवं सिवनी जिले को माफिया से मुक्त कराने तथा इन जिलों में शराब एवं रेत बेचने वालों को दिये गये रिवाल्वर एवं पिस्टल के लायसेंसों की जांच करवाने की मांग की है। प्रधानमंत्री के द्वारा 14 वर्षों से बालाघाट एवं सिवनी को माफिया से मुक्त नहीं करवाना बड़ी असफलता है। जिसके लिये प्रधानमंत्री को बालाघाट एवं सिवनी की जनता से माफ ी मांगनी चाहिये।

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