
ग्रेटर नोएडा — इनफ़ॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया ने इंडिया एक्सपो मार्ट, ग्रेटर नोएडा में ‘रिन्यूएबल एनर्जी इंडिया (REI) एक्सपो’ के 19वें संस्करण का औपचारिक शुभारंभ किया। 22 से 24 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच के साथ ‘द बैटरी शो इंडिया’ (TBSI) का चौथा संस्करण और ‘एनर्जी स्टोरेज समिट इंडिया’ का दूसरा संस्करण भी आयोजित किया जा रहा है। एशिया के सबसे बड़े स्वच्छ ऊर्जा आयोजनों में गिने जाने वाले इस तीन दिवसीय एक्सपो में 1,080 से अधिक प्रदर्शक, 1,400 वैश्विक ब्रांड्स और 54,000 से अधिक उद्योग पेशेवर एकत्र हुए हैं, जहां नई तकनीकों के प्रदर्शन और रणनीतिक साझेदारियों पर मंथन हो रहा है।

स्वच्छ ऊर्जा और बैटरी भंडारण के इस रणनीतिक एकीकरण पर प्रकाश डालते हुए इनफ़ॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के प्रबंध निदेशक योगेश मुद्रस ने कहा, “1,080 से अधिक प्रदर्शकों, 1,400 वैश्विक ब्रांडों और 10 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी करने वाले इस संस्करण का अंतरराष्ट्रीय पैमाना भारत के स्वच्छ ऊर्जा विस्तार में वैश्विक रुचि को दर्शाता है। 2030 तक 486 गीगावाट के लक्ष्य की ओर 15% की सीएजीआर (CAGR) से बढ़ रहे भारत के नवीकरणीय ऊर्जा बाजार और 2031 तक 8.5 अरब डॉलर को पार करने के लिए 33% की असाधारण सीएजीआर से बढ़ रहे बैटरी स्टोरेज क्षेत्र के साथ हम उस निष्पादन चरण में पहुंच चुके हैं जहां ऊर्जा उत्पादन और ग्रिड भंडारण का समानांतर विस्तार आवश्यक है।”

नवीकरणीय ऊर्जा की घटती लागत, बड़े पैमाने पर उत्पादन और बाजार में इसकी बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता का उल्लेख करते हुए मध्य प्रदेश शासन के ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (आईएएस) मनु श्रीवास्तव ने कहा, “रिन्यूएबल एनर्जी इंडिया एक्सपो में लगातार बढ़ती भागीदारी और उत्साह स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती क्षमता और आर्थिक व्यवहार्यता को दर्शाता है। घटती लागत और पैमाने की अर्थव्यवस्था (इकोनॉमीज ऑफ स्केल) के कारण नवीकरणीय ऊर्जा दिनों-दिन सस्ती होकर पारंपरिक ऊर्जा के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनती जा रही है। ये रुझान अगले दो से पांच वर्षों में इसे बड़े पैमाने पर अपनाने के महत्वपूर्ण अवसर पैदा करते हैं। इस क्षेत्र के निरंतर विकास के साथ भारत के पास अन्य देशों के साथ साझा करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा की एक सशक्त गाथा है। आर्थिक आधार मजबूत होने के साथ उद्योग की वृद्धि और विस्तार का परिदृश्य बेहद उत्साहजनक बना हुआ है।”
भारत द्वारा 300 गीगावाट गैर-जीवाश्म स्थापित क्षमता पार करने के ऐतिहासिक पड़ाव के बाद अब ग्रिड स्थिरता, भंडारण और नीतिगत क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। देश के दीर्घकालिक रोडमैप पर बात करते हुए सीएसटीईपी इंडिया के कार्यकारी निदेशक डॉ. जय असुंडी ने कहा, “भारत ने अपनी नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में 300 गीगावाट स्थापित क्षमता पार कर स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उल्लेखनीय प्रगति की है। 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए अब हमारा ध्यान एक लचीले, विश्वसनीय और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर केंद्रित होना चाहिए। इसके लिए घरेलू विनिर्माण, ऊर्जा भंडारण, ग्रिड अवसंरचना, अनुसंधान और नवाचार में निरंतर निवेश के साथ-साथ कुशल कार्यबल और मजबूत उद्योग-अकादमिक साझेदारी की आवश्यकता होगी। यह सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि ऊर्जा संक्रमण का लाभ सभी क्षेत्रों के घरों, किसानों और व्यवसायों तक पहुंचे। सीएसटीईपी में हम महत्वाकांक्षा और क्रियान्वयन के बीच की दूरी को पाटने के लिए कठोर शोध, तकनीकी मूल्यांकन और साक्ष्य-आधारित नीतिगत सिफारिशों के माध्यम से इस यात्रा का समर्थन करते हैं।”

द्विपक्षीय संबंधों और साझा आर्थिक समृद्धि में स्वच्छ ऊर्जा की भूमिका को स्पष्ट करते हुए स्कॉटलैंड के प्रथम मंत्री जॉन स्विनी ने कहा, “स्कॉटलैंड और भारत स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी द्वारा संचालित आधुनिक और समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं के निर्माण की साझा महत्वाकांक्षा रखते हैं। यदि हम मिलकर काम करें, तो हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि ऊर्जा संक्रमण के आर्थिक लाभ हमारे समुदायों तक पहुंचें, हमारे व्यवसायों को समर्थन मिले और दोनों देशों के लोगों के लिए स्थायी अवसर बनें। एशिया के सबसे बड़े स्वच्छ ऊर्जा आयोजनों में से एक, आरईआई एक्सपो को संबोधित करना एक सम्मान की बात थी। स्कॉटलैंड भारत के ऊर्जा संक्रमण में भागीदार बनने के लिए तैयार है और स्कॉटिश विशेषज्ञता व नवाचार को भारत के पैमाने, प्रतिभा और क्षमता के साथ जोड़कर हम अपनी महत्वाकांक्षाओं को साकार कर सकते हैं।”
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों और सेल विनिर्माण में सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ओएएम ने कहा, “ऑस्ट्रेलिया के इंजीनियरिंग नवाचार और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों को भारत की विनिर्माण क्षमता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़कर दोनों देशों के पास वैश्विक ऊर्जा संक्रमण को गति देने का एक शानदार अवसर है। ऑस्ट्रेलिया 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके तहत 2030 तक अपने बिजली ग्रिड में 82% नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य रखा गया है। ऑस्ट्रेलिया के 30% से अधिक घरों की छतों पर सौर प्रणाली स्थापित है, और नवीकरणीय ऊर्जा पर बढ़ती निर्भरता ने पिछले वर्ष बिजली की कीमतों को कम करने में मदद की है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा का पक्ष मजबूत हुआ है।”
ऊर्जा को केवल जलवायु पहल न मानकर तकनीकी संप्रभुता और आर्थिक सुरक्षा के रूप में देखने की आवश्यकता पर बल देते हुए फ्राउनहोफर ऑफिस इंडिया की निदेशक आनंदी अय्यर ने कहा, “नवीकरणीय ऊर्जा अब केवल जलवायु से जुड़ी आवश्यकता नहीं रह गई है; यह एक व्यावसायिक प्राथमिकता और तकनीकी संप्रभुता तथा राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है। दुनिया भर में 2025 में लगभग 800 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई, जबकि वैश्विक बैटरी भंडारण 108 गीगावाट तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 40% की वृद्धि है। भारत द्वारा 300 गीगावाट गैर-जीवाश्म स्थापित क्षमता पार करने और 500 गीगावाट के लक्ष्य को देखते हुए ऊर्जा भंडारण, ग्रिड एकीकरण और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति अत्यंत महत्वपूर्ण होती जा रही है। नवीकरणीय ऊर्जा भारत एक्सपो और द बैटरी शो इंडिया अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने, तकनीकी विशेषज्ञता के आदान-प्रदान और स्वच्छ ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में नवाचार को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं। भारत और जर्मनी के पास भारत के विनिर्माण पैमाने और बढ़ते ऊर्जा बाजार को जर्मनी की उन्नत इंजीनियरिंग, बैटरी अनुसंधान, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक स्वचालन विशेषज्ञता के साथ जोड़ने का बेहतरीन अवसर है।”
यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत के हरित ऊर्जा विनिर्माण, तकनीकी आत्मनिर्भरता और नेट-जीरो लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक अहम कड़ी साबित हो रहा है।

