कुलवंत कौर रिपोर्ट :-

84 दंगा पीड़ित सिखों को नौकरी
का इंतजार, प्रशासन अनावश्यक जाँच के नाम पर कर रहा परेशान हैं :लुबाना ।
दिए गए मकानों का बकाया माफ कर पूरा बिजली का बिल माफ किया जाये।
नई दिल्ली : पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को सुरक्षा गार्ड द्वारा की गई हत्या के बाद, सिखों के खिलाफ पुरे देश में उपजा व्यापक रोष और सिखों का क़त्ले आम हुआ सेकड़ों परिवार आहत हुआ था। जिसके बाद 84 सिख दंगा पीड़ितों की राहत के लिए सरकारों ने कई योजनाएं लागू करने का एलान किया गया था, समय-समय पर कुछ योजनाएं लागू हुई परन्तु दिल्ली के पीड़ित परिवार आज भी नौकरी पाने के लिए इंतजार में हैं।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैंनेजमेंट कमेटी, भी लगातार दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने का भरसक प्रयास कर रही हैं।
आत्मा सिंह लुबाना उपाध्यक्ष दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैंनेजमेंट कमेटी और अध्यक्ष 84 राइट्स संस्था ने एक वार्ता में बताया कि प्रशासन हमारी समस्याओं पर ध्यान नहीं दें रहा सरकारें बदल गयी लेकिन समस्याएं ख़त्म नहीं हो रही, कोई न कोई अडचन लगाकर प्रशासन लगातार पीड़ितों को परेशान कर रहा हैं,उन्होंने बताया कि दिल्ली में रिकॉर्ड के अनुसार 2733 सिखों का क़त्ले आम हुआ हम जब से ही पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं,कई योजनाएं दंगा पीड़ितों के लिए चलाई गयी जिसमे घर दिए गए, मुआवजा दिया गया, वही, पीड़ितों के परिवार से किसी एक को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान हैं।
लुबाना ने आरोप लगाया कि दिल्ली में सरकारे बदलती चली गयी लेकिन सैधान्तिक फैसला नहीं हो पा रहा आज भी हम नानावटी कमीशन जो 16जनवरी 2006 से लागू हुआ था उसके अनुसार हमारी मांगो को माना जाये
लुबाना ने बताया कि अभी तक 2733पीड़ित परिवारों में केवल 643 लोगों ने नौकरी के लिए आवेदन दिया और उसमे केवल 70पीड़ितों के परिवार से एक को नौकरी के लिए ऑफर लेटर दिया गया और केवल 19लोगों को नौकरी मिली हैं.।वहीं,कई जगह आज भी लोगों ने नौकरी ज्वाइन नहीं कि उनका कहना हैं कि उनके अनुरूप नौकरी नहीं मिली किसी को सफाई कर्मचारी, किसी को चतुर्थ कर्मचारी की नौकरी मिली उसका भी हम ने विरोध किया कि सिख समाज चतुर्थ श्रेणी की नौकरी नहीं करेगा, लेकिन उनको भी परेशान किया जा रहा हैं,एक पीड़िता ने नाम न बताने की शर्त पर बताया हमारे परिवार में चार लोगों का क़त्ल हुआ परिवार बाद में बढ़ गया, और नौकरी के दावेदार कई हो गये, कमेटी के लोग परिवार के सभी सदस्यों से एनओसी पत्र मांगता हैं, जबकि नौकरी एक को ही मिलनी हैं,अब परिवारिक परेशानियों के चलते न कागजात पुरे हो रहे हैं न ही नौकरी मिल रही हैं।
आत्मा सिंह लुबना ने कहा कि हम दिल्ली कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मान्य उपराज्य पाल से मांग करते हैं कि हमारी समस्याओं का समाधान निकाले और जितनो ने भी अभी तक सभी कागजात और आवेदन पूरा कर लिया हैं, विभिन्न तरह से कई कई बार जाँच के नाम पर पीड़ितों को तंग न किया जाये, उन्हें सम्मानजनक नौकरी दिलाई जाये।
आत्मा सिंह लुबाना ने मांग कि हैं पीड़ितों को मिले मकान, उनका किराया माफ कर,बिजली के बिलो को भी माफ किया जाये मकानों का मालिकाना हक़ दिया जाये और हमारी प्रॉपर्टी फ्री होल्ड की जाये।

