RTE प्रक्रिया पर सवाल : लॉटरी निकले 150 दिन बीते, फिर भी 1.80 लाख चयनित विद्यार्थी पढ़ाई से वंचित, अभिभावक दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर – संयुक्त अभिभावक संघ

जयपुर। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 12 मार्च 2026 को राज्य सरकार द्वारा आयोजित ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया में लगभग 2.40 लाख विद्यार्थियों का चयन किया गया था। इन विद्यार्थियों को प्रदेश के निजी विद्यालयों में निःशुल्क प्रवेश मिलना था, लेकिन लॉटरी प्रक्रिया को लगभग 150 दिन बीत जाने के बावजूद आज भी करीब 1.80 लाख चयनित विद्यार्थी प्रवेश से वंचित हैं। सैकड़ों बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
इसी गंभीर विषय को लेकर संयुक्त अभिभावक संघ ने मंगलवार को शिक्षा निदेशक, बीकानेर को संबोधित ज्ञापन डाक एवं ई-मेल के माध्यम से प्रेषित कर तत्काल हस्तक्षेप करते हुए प्रभावी कार्रवाई की मांग की। साथ ही संघ के पदाधिकारी प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल और प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू एवं पीड़ित अभिभावक मंगलवार दोपहर लगभग 3 बजे जिला शिक्षा अधिकारी, जयपुर अनुपस्थिति एडीओ संजय यादव से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा तथा शिक्षा निदेशक के नाम ज्ञापन की प्रति सौंपकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
संयुक्त अभिभावक संघ के राजस्थान प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से प्रारंभ हो चुका है। ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त हुए भी काफी समय बीत चुका है और वर्तमान सत्र की लगभग 75 दिनों की नियमित पढ़ाई पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद आरटीई में चयनित लाखों बच्चे आज भी विद्यालय में प्रवेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल शिक्षा का अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत है, बल्कि बच्चों के संवैधानिक शिक्षा के अधिकार का भी खुला उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि प्रदेशभर के अभिभावक पिछले कई महीनों से निजी विद्यालयों, जिला शिक्षा अधिकारियों, ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों एवं शिक्षा विभाग के विभिन्न कार्यालयों के लगातार चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उन्हें केवल आश्वासन मिल रहे हैं, न्याय नहीं। संयुक्त अभिभावक संघ द्वारा इस विषय में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा निदेशक एवं शिक्षा विभाग के विभिन्न अधिकारियों को कई बार पत्र एवं ज्ञापन भेजकर न्याय की मांग की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई प्रभावी समाधान सामने नहीं आया। निजी विद्यालयों की मनमानी के कारण आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद परिवारों के बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
संयुक्त अभिभावक संघ ने अपने ज्ञापन में मांग की है कि आरटीई में चयनित सभी विद्यार्थियों को तत्काल निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाए, प्रवेश देने से इंकार करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध कठोर कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाए तथा लंबित सभी प्रवेशों की समयबद्ध मॉनिटरिंग कर प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को उसका वैधानिक अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो हजारों गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों का पूरा शैक्षणिक सत्र बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शिक्षा विभाग एवं संबंधित अधिकारियों की होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेशभर के अभिभावकों के साथ व्यापक जनआंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।

