
नई दिल्ली, 18 अगस्त 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज की प्रेरक संस्था UDAAN ने “Voice Behind Big Boss” नामक एक ज्ञानवर्धक और संवादात्मक सत्र का सफल आयोजन किया। इस सत्र में अभिनेता, वॉइस आर्टिस्ट, मोटिवेशनल स्पीकर और वॉइस कम्युनिकेशन कोच विजय विक्रम सिंह ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। सत्र में संचार कौशल, सार्वजनिक वक्तृत्व, कहानी कहने की कला, अभिनय, करियर यात्रा और अस्वीकृतियों के बीच दृढ़ता जैसे विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य व्यावहारिक सीख को विद्यार्थियों के व्यक्तिगत और पेशेवर विकास से जोड़ना था।
सत्र का एक प्रमुख विषय प्रभावी संचार का महत्व रहा। चर्चा के दौरान संचार कौशल को बेहतर बनाने के व्यावहारिक तरीकों पर प्रकाश डाला गया और यह बताया गया कि स्पष्टता, आत्मविश्वास और प्रभावी अभिव्यक्ति व्यक्तिगत एवं पेशेवर, दोनों प्रकार के संवादों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही, यह भी चर्चा की गई कि अभिनय, शिक्षा, नेतृत्व और विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में बेहतर संचार कौशल किस प्रकार नए अवसरों के द्वार खोल सकता है।

सत्र में करियर यात्रा को आकार देने में अस्वीकृति और चुनौतियों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। पेशेवर अनुभवों और अभिनय एवं मीडिया जगत से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने के लिए प्रेरित किया गया कि अस्वीकृति किसी व्यक्ति की क्षमता का अंतिम मूल्यांकन नहीं होती, बल्कि यह यात्रा का एक हिस्सा हो सकती है। चर्चा में निरंतर प्रयास, तैयारी और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने के महत्व पर जोर दिया गया तथा विद्यार्थियों को असफलताओं और अस्वीकृतियों को सीखने और आगे बढ़ने के अवसरों के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
बातचीत का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू शैक्षणिक आकांक्षाओं और बदलती पेशेवर यात्राओं के बीच संबंध रहा। चर्चा में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि करियर की राह हमेशा सीधी या पूर्व-निर्धारित नहीं होती और शिक्षा, परीक्षाओं या शुरुआती पेशेवर अवसरों से जुड़ी चुनौतियाँ आगे चलकर सीखने और विकास के अप्रत्याशित अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं। विद्यार्थियों को बदलती परिस्थितियों के प्रति खुले दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने और यह समझने के लिए प्रेरित किया गया कि करियर में सफलता अलग-अलग चरणों में अलग-अलग रूप ले सकती है।
सत्र में सार्वजनिक रूप से बोलने और मंच के डर जैसी आम चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को श्रोताओं के सामने बोलने के संकोच को दूर करने और सार्वजनिक वक्तृत्व में आत्मविश्वास विकसित करने के लिए व्यावहारिक तकनीकों से परिचित कराया गया। चर्चा में नियमित अभ्यास, बेहतर तैयारी और अपने सहज दायरे से बाहर निकलकर नए अनुभव प्राप्त करने के महत्व पर जोर दिया गया।
कहानी कहने की कला भी सत्र का एक प्रमुख विषय रही। चर्चा में बताया गया कि प्रभावी कहानी-कथन किस प्रकार संचार को अधिक रोचक, यादगार और प्रभावशाली बना सकता है। विद्यार्थियों को कहानियों को व्यवस्थित करने और उन्हें इस प्रकार प्रस्तुत करने के व्यावहारिक सुझाव दिए गए, जिससे वे श्रोताओं के साथ बेहतर जुड़ाव स्थापित कर सकें और अपने विचारों को अधिक स्पष्टता से व्यक्त कर सकें।
कार्यक्रम को अत्यंत संवादात्मक स्वरूप दिया गया, जिसमें संचार से जुड़े अभ्यास, व्यावहारिक गतिविधियाँ और एक खुला प्रश्नोत्तर सत्र शामिल रहा। प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से बातचीत में हिस्सा लिया और संचार, सार्वजनिक वक्तृत्व, अभिनय, करियर विकास तथा व्यक्तिगत विकास से जुड़े प्रश्न पूछे। इस संवादात्मक प्रारूप ने विद्यार्थियों को सत्र में चर्चा किए गए विचारों को अपने अनुभवों और आकांक्षाओं से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।
सत्र का प्रमुख संदेश अस्वीकृति के प्रति सही दृष्टिकोण विकसित करने पर केंद्रित रहा। चर्चा ने विद्यार्थियों को चुनौतियों और असफलताओं को अंतिम परिणाम के रूप में देखने के बजाय उनसे सीखने, दिशा प्राप्त करने और नई संभावनाओं की तलाश करने के लिए प्रेरित किया। दृढ़ता, तैयारी और निरंतर आगे बढ़ते रहने की भावना को चुनौतियों का सामना करने और दीर्घकालिक लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण गुणों के रूप में रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम का सफल आयोजन UDAAN काउंसिल और हंसराज कॉलेज के सदस्यों के सामूहिक प्रयासों से संभव हुआ। उनके समन्वय, सहयोग और योगदान ने सत्र तथा उससे जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के सुचारु संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह पहल कक्षा से परे विद्यार्थियों के लिए सार्थक सीखने के अवसर और अनुभव उपलब्ध कराने के प्रति UDAAN की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
“Voice Behind Big Boss” जैसी पहलों के माध्यम से UDAAN विद्यार्थियों को पेशेवरों से संवाद करने, वास्तविक जीवन के अनुभवों से सीखने और अपने अकादमिक अध्ययन के साथ-साथ आवश्यक कौशल विकसित करने के अवसर प्रदान करता है। सत्र का समापन प्रेरणादायक संदेश के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को संचार और सार्वजनिक वक्तृत्व से जुड़े व्यावहारिक सुझावों के साथ दृढ़ता का एक महत्वपूर्ण संदेश मिला—किसी अवसर के लिए मिली अस्वीकृति हमेशा उस अवसर का अंत नहीं होती; कई बार यह एक अलग और अधिक सार्थक अवसर की शुरुआत बन सकती है।

