सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी ने केजरीवाल की ‘ईमानदारी की राजनीति’ का मुखौटा उतार दिया

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सत्ता के संरक्षण में भ्रष्टाचार का एक संगठित मॉडल विकसित किया गया-खंडेलवाल

चाँदनी चौक से सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल ने दिल्ली जल बोर्ड घोटाले में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर अरविंद केजरीवाल की तथाकथित ईमानदार राजनीति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकली पार्टी आज स्वयं भ्रष्टाचार के आरोपों और गिरफ्तारियों के बोझ तले दबती दिखाई दे रही है। दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच द्वारा की गई यह कार्रवाई जल बोर्ड से जुड़े कथित अनियमितताओं और टेंडर घोटाले की जांच का परिणाम है।

श्री खंडेलवाल ने कहा की सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो अरविंद केजरीवाल कभी देश को ईमानदारी का पाठ पढ़ाते थे, वही आज हर गिरफ्तारी के बाद उसे राजनीतिक साजिश बताकर अपने सहयोगियों को बचाने का प्रयास क्यों करते हैं? यदि सत्येंद्र जैन निर्दोष हैं तो जांच से डर किस बात का है? और यदि सब कुछ पारदर्शी था तो बार-बार आम आदमी पार्टी के नेताओं के नाम विभिन्न घोटालों और जांचों में क्यों सामने आते हैं?

उन्होंने कहा की दिल्ली की जनता जानना चाहती है कि क्या “कट्टर ईमानदार” सरकार का असली चेहरा अब सामने आ चुका है? शराब घोटाला, विभिन्न वित्तीय अनियमितताओं के आरोप और अब दिल्ली जल बोर्ड प्रकरण—क्या यह केवल संयोग है या फिर सत्ता के संरक्षण में भ्रष्टाचार का एक संगठित मॉडल विकसित किया गया था?

श्री खंडेलवाल ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को देश और दिल्ली की जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर उनकी सरकार के इतने वरिष्ठ मंत्री और सहयोगी लगातार जांच एजेंसियों के घेरे में क्यों आते रहे हैं। केवल राजनीतिक प्रतिशोध का राग अलापना अब जनता को स्वीकार नहीं है। जनता जवाब चाहती है, बहाने नहीं।

श्री खंडेलवाल ने कहा की यह गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि उस राजनीतिक नैरेटिव पर भी सवाल है जिसे वर्षों तक “ईमानदारी का मॉडल” बताकर बेचा गया। आज आवश्यकता है कि जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़े और दोषियों को कानून के अनुसार कठोर दंड मिले, चाहे उनका राजनीतिक कद कितना भी बड़ा क्यों न हो।

दिल्ली की जनता के पैसे की एक-एक पाई का हिसाब होना चाहिए। लोकतंत्र में जवाबदेही से बड़ा कोई सिद्धांत नहीं होता और कानून से ऊपर कोई व्यक्ति या राजनीतिक दल नहीं हो सकता- कहा श्री खंडेलवाल ने।

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