
नई दिल्ली, 25 अगस्त 2026: हंसराज महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय में संस्कृतसाहित्यपरिषद् द्वारा, प्रो. (डॉ.) रमा, प्राचार्या, हंसराज महाविद्यालय के सान्निध्य एवं प्रेरणा से, संस्कृत सप्ताह 2026 के अन्तर्गत “संस्कृतं, शास्त्रं तकनीकी च : परम्परा एवं नवाचारः” विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी, व्याख्यान-सत्र, अन्तरमहाविद्यालयीय प्रतियोगिताएँ एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का सह-आयोजन कला-संस्कृति-भाषा विभाग, दिल्ली सरकार एवं दिल्ली-संस्कृत-अकादमी, दिल्ली सरकार तथा सहयोग संस्कृतभारती का रहा।

इस अवसर पर यह रेखांकित किया गया कि संस्कृत के प्रसार और उसकी वैज्ञानिक उपयोगिता की आज तथा आने वाले कल में अत्यन्त प्रासंगिकता है। संस्कृत न केवल हमारी पुरातन ज्ञान-परम्परा की उद्घोषक है, बल्कि ज्ञान, चिंतन और तकनीक को प्रभावी एवं नवोन्मेषी बनाने की प्रेरक भी है। संस्कृत की समृद्ध शास्त्रीय परम्परा को आधुनिक तकनीकी संदर्भों से जोड़ना वर्तमान समय की महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है।
कार्यक्रम का आयोजन मदनमोहन मालवीय सभागार (लाइब्रेरी ऑडिटोरियम), हंसराज महाविद्यालय में किया गया। उद्घाटन सत्र के पश्चात् “संस्कृतं, शास्त्रं तकनीकी च : परम्परा एवं नवाचारः” विषय पर व्याख्यान-सत्र आयोजित हुआ। इस अवसर पर प्रो. विष्णुपद महापात्र, आचार्य, न्यायवैशेषिक-दर्शन विभाग, लालबहादुरशास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विशिष्ट वक्ता के रूप में; प्रो. सुभाषचन्द्र, आचार्य, संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय मुख्य वक्ता के रूप में; तथा मेजर संजयकुमार, भारतीय सेना अतिथिवक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) रमा, प्राचार्या, हंसराज महाविद्यालय का सान्निध्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
वक्ताओं ने संस्कृत, भारतीय शास्त्र-परम्परा और आधुनिक तकनीकी विकास के पारस्परिक सम्बन्ध पर विचार व्यक्त करते हुए परम्परा एवं नवाचार के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने संस्कृत को केवल प्राचीन भाषा के रूप में देखने के स्थान पर ज्ञान-विज्ञान, तर्क, दर्शन तथा आधुनिक तकनीकी विमर्श से जोड़कर देखने की आवश्यकता रेखांकित की।
अन्तरमहाविद्यालयीय प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
संस्कृत सप्ताह के अन्तर्गत विभिन्न अन्तरमहाविद्यालयीय प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। भाषण-प्रतियोगिता का विषय “भारतीयज्ञानपरम्परायाः मूलं संस्कृतम्” रहा। इसके साथ ही श्लोकगायन-प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
श्लोकगायन प्रतियोगिता के लिए प्रथम पुरस्कार ₹2,500, द्वितीय पुरस्कार ₹2,000, तृतीय पुरस्कार ₹1,800 तथा तीन प्रोत्साहन पुरस्कार निर्धारित किए गए। प्रतियोगिताओं के निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञ निर्णायक-मण्डल की व्यवस्था की गई।
प्रतियोगिताओं के निर्णायक-मण्डल में डॉ. सुशीलकुमार, उत्तरक्षेत्रप्रचारप्रमुख, संस्कृतभारती; डॉ. चन्दनकुमार मिश्र, सहायक आचार्य, मिराण्डा महाविद्यालय; तथा डॉ. शंकरदत्त पाण्डेय, व्याखाता, दिल्ली सरकार का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।
संस्कृत नाटक “पुष्पकस्य अनारकली” का मंचन
संस्कृत सप्ताह के सांस्कृतिक आयाम को समृद्ध करते हुए संस्कृत विभाग, हंसराज महाविद्यालय द्वारा संस्कृत नाटक “पुष्पकस्य अनारकली” का मंचन किया गया। नाटक के नाटककार डॉ. आशीष कुमार तथा निर्देशक डॉ. अवनीश कुमार रहे। नाटक के माध्यम से संस्कृत नाट्यपरम्परा को समकालीन प्रस्तुति एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के साथ दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों एवं उपस्थित दर्शकों ने नाटक का उत्साहपूर्वक अवलोकन किया।
वस्तु एवं पुस्तक प्रदर्शनी रही आकर्षण का केन्द्र
कार्यक्रम के अन्तर्गत वस्तु-प्रदर्शनी एवं पुस्तक-प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। संस्कृतभारती के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आगन्तुकों को संस्कृत, भारतीय ज्ञान-परम्परा तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत से सम्बन्धित सामग्री से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं समन्वय में विभागीय शिक्षकों, संयोजकों एवं छात्र-समन्वयकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डॉ. ज्ञानश्री बरुआ, संस्कृत विभाग-प्रभारी; डॉ. खुशबू शुक्ला, संयोजिका; डॉ. मोहितकुमार पाण्डेय, सह-संयोजक तथा छात्र-समन्वयक पीयूष पाल एवं भूमि ने कार्यक्रम की विभिन्न व्यवस्थाओं के समन्वय में सक्रिय भूमिका निभाई।
इनके मार्गदर्शन एवं समन्वय से पंजीकरण, प्रतिभागियों के मार्गदर्शन, मंच-व्यवस्था, अतिथि-सत्कार, तकनीकी व्यवस्था, प्रतियोगिताओं के संचालन तथा अन्य व्यवस्थाएँ सुचारु रूप से सम्पन्न हुईं।
संस्कृत सप्ताह 2026 का यह आयोजन विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा, साहित्य, शास्त्र एवं भारतीय ज्ञान-परम्परा के प्रति रुचि एवं जागरूकता विकसित करने तथा संस्कृत को आधुनिक तकनीकी और समकालीन संदर्भों से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, विभिन्न महाविद्यालयों से आए प्रतिभागियों एवं अतिथियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। आयोजन ने शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक, तीनों स्तरों पर संस्कृत की समकालीन प्रासंगिकता को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
अन्त में सभी अतिथियों, निर्णायकों, शिक्षकों, प्रतिभागियों, छात्र-स्वयंसेवकों एवं आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इसी के साथ संस्कृत सप्ताह 2026 के कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

