
दिल्ली में लगभग ₹4,000 करोड़ के व्यापार का अनुमान, ‘वोकल फॉर लोकल’ से ‘लोकल टू ग्लोबल’ की भावना को मिला नया बल
रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के उन शाश्वत मूल्यों का उत्सव है जो प्रेम, विश्वास, सुरक्षा, कर्तव्य, पारिवारिक एकता और सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं। आज भारत के त्योहार केवल सांस्कृतिक परंपराओं तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि वे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के विजन के सशक्त वाहक बनकर देश की अर्थव्यवस्था, स्वदेशी उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं।
चाँदनी चौक से सांसद एवं कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान ने देश के त्योहारों की प्रकृति को बदल दिया है। अब भारतीय उपभोक्ता स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देते हुए देश के कारीगरों, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, लघु उद्योगों और छोटे व्यापारियों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यही कारण है कि आज भारत के त्योहार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के माध्यम भी बन रहे हैं।
श्री खंडेलवाल ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर इस वर्ष जहां दिल्ली में लगभग ₹4,000 करोड़ के व्यापार होने की संभावना है वहीं देश में लगभग 30 हज़ार करोड़ रुपए के व्यापार का अनुमान है जिसमें राखियों के अतिरिक्त मिठाइयाँ, उपहार, परिधान, सजावटी सामग्री, सूखे मेवे, इलेक्ट्रॉनिक उपहार, गृह सज्जा उत्पाद तथा पूजा सामग्री शामिल हैं। बाजारों में ग्राहकों की बढ़ती भीड़ और उत्साह इस अनुमान को मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं।
श्री खंडेलवाल ने कहा कि रक्षाबंधन का पावन पर्व कल पूरे देश में श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। दिल्ली सहित देशभर के बाजारों में पिछले कई दिनों से जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। पुरानी दिल्ली, चाँदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, कमला नगर, लाजपत नगर, गांधी नगर, राजौरी गार्डन तथा विभिन्न स्थानीय बाजारों में ग्राहकों की भारी आवाजाही से व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी आई है।
श्री खंडेलवाल ने कहा कि रक्षाबंधन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आजीविका को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण अवसर भी है। इस पर्व से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार और आय प्राप्त होती है। राखी बनाने वाले कारीगर, महिला स्वयं सहायता समूह, गृह उद्योग, मिठाई विक्रेता, फूल विक्रेता, उपहार सामग्री व्यापारी, परिवहन क्षेत्र, पैकेजिंग उद्योग, कुरियर सेवाएं, ई-कॉमर्स डिलीवरी नेटवर्क तथा छोटे दुकानदार इस पर्व से विशेष रूप से लाभान्वित होते हैं। विशेषकर गरीब एवं निम्न आय वर्ग के लाखों परिवारों के लिए यह त्योहार अतिरिक्त आय और रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत बनता है।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों के कारीगरों, महिलाओं और छोटे उद्यमियों द्वारा तैयार की गई राखियां उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनी हुई हैं। विशेष रूप से ‘विकसित भारत’, ‘मोदी गारंटी’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘ऑपरेशन सिंदूर’, ‘ब्रह्मोस’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘हर घर तिरंगा’ तथा भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों पर आधारित विशेष राखियों को ग्राहकों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। इससे स्थानीय उत्पादन, रोजगार और उद्यमिता को नया प्रोत्साहन प्राप्त हुआ है।
श्री खंडेलवाल ने कहा कि कैट द्वारा पिछले वर्षों से चलाए जा रहे चीनी उत्पादों के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के प्रोत्साहन अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। इसका परिणाम यह है कि देशभर के त्योहारों में अब भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। रक्षाबंधन इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित राखियां न केवल देश के बाजारों में लोकप्रिय हैं, बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय तक भी बड़े पैमाने पर पहुंच रही हैं। यह वास्तव में ‘लोकल टू ग्लोबल’ की भावना का सशक्त प्रमाण है।
श्री खंडेलवाल ने कहा कि भारत के त्योहार अब केवल उत्सव नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के बड़े माध्यम बन चुके हैं। इन त्योहारों के माध्यम से करोड़ों लोगों को रोजगार, व्यापार और नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं, जिससे विकसित भारत के निर्माण की दिशा को और अधिक गति मिल रही है।

