बंसी लाल के साथ कुलवंत कौर की रिपोर्ट :-

नई दिल्ली :' मैं तेरी बाहों के झूले में पली बाबुल जा रही हु छोड के तेरी गली बाबुल,खूबसूरत ये जमाने याद आएंगे,चाह के भी हम तुम्हे न भूल पाएंगे',
जी हां किसी जमाने में आपने इस गीत को कही न कही शादी समारोह मे जरूर सुना होगा,इस गाने के बोल का मतलब पिता के कंधे और गोद से है,लेकिन जरा गौर कीजिए अगर कोई लड़का या लड़की जन्म लेते हैं, औऱ उसे उनके परिवार वालों की जानकारी के बारे में जानकारी ही नही मिले तो आप क्या कहेंगे या सोचेंगे?,समाज की यह विडंबना ही है कि इन्हें किसी और नाम से जाना जाएगा।वहीं,समाज ने भी यही किया,इन बच्चों को मुख्य धारा से अलग कर दिया,जिस उम्र में बच्चे मॉल में जाकर झूला झूलते है महंगे प्ले स्कूल में पढ़ते है,उस उम्र में ये बच्चे दिल्ली में अनाथ की तरह किसी के द्वारा दी गई भिक्षा, दान,पर पल रहें होते हैं ।

और बचपन इनका,दिहाड़ी मजदूरी या भीख मांगना रहा जाता हैं ,इनका भविष्य किस और जायेगा इन्हें कुछ नही मालूम।वहीं अगर कोई इनके जीवन मे नई रौशनी की लौ लगाने की कोशिश मात्र करतें हैं, इनके लिए किसी शक्ति से कम नही, जो दूसरे की मदद करे या दूसरे के जरूरत के समय काम आ सके।
करीब दो दशक से पत्रकारिता कर रहे पवन मिश्रा ने भी कुछ ऐसा ही समाज को प्रेरित करने की ठानी हैं ,दिल्ली के पटेल नगर के रहने वाले समाजसेवी श्रवण चौबे के संग मिलकर इन्होंने उन लड़कियों के विवाह करवाने का संकल्प लिया जो अनाथ है और बेहद गरीबी की हालात में जी रही है,आपको बता दे कि इनकी ‘टीम फाटक’ के नाम से अपनी एक संस्था की स्थापना भी की है और इसी संस्था के बैनर तले इस विवाह के आयोजन करने का प्लान किया गया। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह थी कि ऐसी लड़कियों को कहा से ढूंढा जाए,इसके लिए बाकायदा जगह-जगह पोस्टर लगाकर यह जागरूक किया गया कि टीम फाटक की तरफ से 5 अनाथ लड़कियों को विवाह करवाने का संकल्प लिया गया है,जरूरतमंद संपर्क कर सकते है।
इस अपील के बाद करीब 27 लड़कियों ने संपर्क किया गहन जाँच कर केवल 5 बच्चियों का चयन किया गया,क्योंकि इस विवाह के आयोजन की पहली प्राथमिकता यह थी कि सिर्फ अनाथ लड़कियों का ही विवाह कराया जाएगा।
अब दूसरी समस्या यह सामने आ गई कि इनके लिए सही वर कहा से ढूंढा जाए।
कहते है न कि अगर आपकी नियत ठीक है तो आपके साथ हमेशा ही बढ़िया होगा। इन लड़कियों को बेहतर वर भी मिल गया जो बढ़िया जॉब और पैसे कमा रहे है। फिर क्या था इनकी शादी की तैयारिया शुरू कर दी गई।
सवंददाता पवन मिश्रा ने बताया कि इस समाजिक कार्य के लिए कई वरिष्ट लोगों ने बढ़ चढ़कर मदद की। आपको बता दे कि भी इस पुण्य और नेक काम मे अपना अहम योगदान कई वरिष्ठ पत्रकार, ब्यूरोक्रेट, अधिकारीगण, प्रबुद्ध समाजसेवी ने भी बढ़ चढ़ कर सहयोग दिया है।

इस आयोजन का उद्देश्य उन बेटियों के हाथ पीले करना था जिनका इस दुनिया में कोई सहारा नहीं है।विवाह सादे समारोह मे आयोजित किये गए और परिवार भरण पोषण के लिए जरूरी सामान भी दिए गये।
पवन मिश्रा ने कहा,इस तरह के सामूहिक प्रयास न केवल आर्थिक बोझ कम करते हैं, बल्कि समाज में एकजुटता का संदेश भी देते हैं। आज ये बेटियां कल तक बेसहारा थीं लेकिन आज अपने नए जीवन की शुरुआत कर रही हैं।
उन्होंने ने बताया,सामूहिक विवाह न केवल फिजूलखर्ची को रोकता है, बल्कि यह बेटियों को वह सम्मान और अधिकार दिलाता है जिसकी वे हकदार हैं।

