प्लास्टिक रोज -लव, मिस्ट्री, मर्डर और पर्यावरण उपदेश देती फ़िल्म.

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पटकथा लेखक, निर्देशक – सदाशिवम राव जिनकी मार्मिक परिकल्पना से हाट कर सवेदनशील मुद्दों को लेकर, उनकी भावनाओं के अनुरूप ऐसा परिदृश्य सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत करना, वहीं कहीं न कही जीवन की सच्चाई को भी दर्शकों तक पहुंचने के लिए प्रतिब्ध हैं, इसी सोच को एक बार फिर आगे बढ़ाते हुए ‘प्लास्टिक रोज’ फीचर्स फ़िल्म की शूटिंग शुरू की जिसमे जानी मानी अभिनेत्री जिन्होंने कई फिल्मो में निदेशक सदाशिवम् राव के निदेशन में काम किया दीपाली जैन,मुख्य भूमिका में हैं एक ऐसी महिला का अभिनय किया हैं जो मानसिक रूप से थोड़ी विछुब्ध हैं, वहीं अपने नये मकान में आने पर एक मक्खी का घर में सजाये प्लास्टिक के रोज और सूरज मुखी के फूलों पर बैठ जाना, प्यार एक गुलाब जैसा होता है और यह चुभ भी सकता है। लेकिन क्या होगा अगर प्यार प्लास्टिक जैसा, नरम हो जाए? क्या वह भी चुभ सकता है? एक प्लास्टिक का गुलाब अमर प्रेम का प्रतीक है – इसे सालों-साल चलने के लिए बनाया जाता है, यह कभी मुरझाता नहीं और इसे कचरे से बार-बार रीसायकल भी किया जा सकता है।


सदाशिवम् राव निदेशक ने पूछने पर बताया कि, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वी पी सिंह ने एक बार कहा था “मक्खी ऐसा जीव हैं जो भगवान की मूर्ति,फूलों,गोबर,कचरे, खाने और शरीर पर विचरण करती हैं, वहीं इससे जहाँ पर्यावरण सरक्षण में भी लाभ मिलता हैं,
उन्होंने बताया ऐसी ही प्लास्टिक रोज़’ एक मक्खी की कहानी है, जिसका सामना ‘इची’ से होता है -अचानक मक्खी के हमले से इची को गुस्सा जाहीर कर उस पर हमला करती हैं लेकिन घटना कर्म में अचानक उसके प्रेमी के आने और उस पर हुये हमले से कुछ ऐसा होता हैं जिस पर फ़िल्म आगे बढ़ती हैं,,,। इची, जो एक थिएटर अभिनेत्री है, जब एक नए फ्लैट में रहने आती है, तो उसका सामना उस मक्खी से होता है। इची के पास प्लास्टिक के गुलाबों और सूरजमुखी के फूलों का एक गुलदस्ता है। किसी अजीब वजह से, उस मक्खी को प्लास्टिक के गुलाब पसंद आ जाते हैं और वह फ्लैट छोड़कर जाने से मना कर देती है। मक्खी मारने वाले रैकेट लेकर, इची, उसके नाटक का निर्देशक और उसकी सह-अभिनेत्री मिलकर उस मक्खी को मारने की कोशिश करते हैं। वे मक्खी को मारने में कामयाब तो होते हैं, लेकिन उसे पूरी तरह खत्म नहीं कर पाते। फिर इची की एक अवास्तविक (surreal) पर्यावरणीय यात्रा शुरू होती है, जिसका अंत एक हत्या के साथ होता है। इची की प्रेम कहानी भी इस अवास्तविक यात्रा का ही एक हिस्सा बन जाती है।


अभिनेत्री दीपाली जैन ने बताया, डायरेक्टर जी किसी भी कहानी का खुलासा पहले नहीं करतें, वहीं उनकी भावनाये, कहानियो के साथ बढ़ती हैं, सवेदनशील मुद्दों और आत्मीयता को नजदीक से दिखाने में माहिर हैं, फ़िल्म ‘प्लास्टिक रोज’ऐसी ही उनकी सोच को समर्पित हैं और में इस फ़िल्म का हिस्सा हूँ.

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