दुर्गा पूजा के लिए दिल्ली सरकार कीओर से कोई सहयोग नहीं,:आराम बाग पूजा समिति।

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आराम बाग दुर्गा पूजा में अखबारों, पुस्तकों और लिखित शब्द की शक्ति होगी केंद्र में

आराम बाग दुर्गा पूजा 2026 पत्रकारिता, साहित्य और मुद्रित शब्द को समर्पित।

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: राजधानी के प्रमुख दुर्गा पूजा आयोजकों में से एक, आराम बाग पूजा समिति ने 2026 के उत्सव की थीम ‘प्रिंट की शक्ति कभी फीकी नहीं पड़तीः राष्ट्रों को आकार देने वाली स्याही भविष्य के लिए हमारी रची कहानी’ की घोषणा की है। अपने 38वें वर्ष में प्रवेश कर रही समिति, पहाड़गंज स्थित आराम बाग के पूजा स्थल को मुद्रित शब्द के प्रति एक दृश्य श्रद्धांजलि के रूप में सजाएगी। इसके माध्यम से पत्रकारिता, साहित्य, शिक्षा, सार्वजनिक विमर्श और ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण में प्रिंट के योगदान को रेखांकित किया जाएगा।वहीं दिल्ली सरकार से कोई सहयोग दुर्गा पूजा समितियों को नहीं मिलता, महंगी बिजली, पार्क का किराया अन्य सुरक्षा जमा को लेकर समितियों में रोष है उन्होंने कहा कि कावड़ यात्रा, छठ पूजा और रामलीलाओ को कई प्रकार की सहायता lसरकार की ओर से मिलती है,यह कहना था आराम बाग़ पूजा समिति के पदाधिकारियों का।
अध्यक्ष इंद्र नील सरकार ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि इस वर्ष की अवधारणा मुद्रण के इतिहास और समाज पर उसके प्रभाव से प्रेरित है। विषय आधारित इंस्टॉलेशन और दृश्य कथाकथन के माध्यम से आयोजक यह दिखाएंगे कि अखबारों, पुस्तकों, पत्रिकाओं और प्रकाशित दस्तावेजों ने किस तरह जनमत को दिशा दी, महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को दर्ज किया और विचारों के आदान-प्रदान के जरिए पीढ़ियों को जोड़ा। इस प्रस्तुति में पत्रकारों, संपादकों, प्रकाशकों, मुद्रण क्षेत्र के पेशेवरों और वितरकों के योगदान को भी सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने पाठकों तक जानकारी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस वर्ष की प्रस्तुति की प्रेरणा के बारे में बताते हुए आराम बाग पूजा समिति के अध्यक्ष अभिजीत बोस ने मुद्रित संचार की निरंतर प्रासंगिकता और समाज पर उसके प्रभाव पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “मानव सभ्यता के विकास में प्रिंट की असाधारण भूमिका रही है। ऐतिहासिक आंदोलनों का दस्तावेजीकरण करने से लेकर महत्वपूर्ण खोजों को सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाने तक, इसका योगदान अमूल्य है। अखबारों ने नागरिकों को जानकारी दी है, पुस्तकों ने स्वतंत्र चिंतन को प्रोत्साहित किया है और प्रकाशित रचनाओं ने समुदायों को अपने अनुभव भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने में सक्षम बनाया है। इस वर्ष की दुर्गा पूजा के माध्यम से हम उन व्यक्तियों और संस्थानों के योगदान को पहचानना चाहते हैं, जिन्होंने इस उल्लेखनीय परंपरा को बनाए रखा है।


तैयारियां जारी हैं और समिति अपने वार्षिक उत्सव में श्रद्धालुओं तथा आगंतुकों का स्वागत करने के लिए उत्सुक है।उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार रामलीलाओ,कावड़ और छठ पूजा के लिए सहयोग करती है लेकिन दुर्गा पूजा के लिए नहीं।दिल्ली में लाखों बंगाली भाषी रहते है वहीं दुर्गा पूजा में सर्वधर्म संभाव से लोग आते है,आज दिल्ली में सेकड़ों दुर्गा पंडाल लगते है, परम्परागत तरीके से कार्यक्रम की शुरुआत 16 अक्टूबर को महाषष्ठी से होगी। इसके बाद 17 अक्टूबर को महासप्तमी, 18 अक्टूबर को उत्सव कार्यक्रम, 19 अक्टूबर को महाष्टमी, 20 अक्टूबर को महानवमी और 21 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी।
दुर्गा पूजा उत्सव में जीवंत सांस्कृतिक कार्यक्रम, बच्चों के लिए रोचक गतिविधियां और आयोजन-संबंधी स्टॉल भी होंगे। इनमें एक फूड कोर्ट शामिल होगा, जहां लोकप्रिय व्यंजनों के साथ प्रामाणिक बंगाली पकवान परोसे जाएंगे।”

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