★ दिल्ली को ‘जीवदया नगरी’ बनाने का होगा संकल्प, पूरे वर्ष जीवदया, गोरक्षा, गौसेवा और अभयदान के विविध सेवा एवं जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे

12 जुलाई को दिल्ली में होगा पूज्य गुरु भगवंतों का भव्य चातुर्मास प्रवेश महोत्सव धर्म, संयम, जिनवाणी और संस्कारों से अनुप्राणित होगा संपूर्ण वातावरण
12जुलाई से चातुर्मास के साथ ‘जीवदया वर्ष का शुभारंभ, वर्षभर होंगे सेवा और जीव संरक्षण के विशेष अभियान।
★ दिल्ली गुजराती श्वेताम्ब्र मूर्तिपूजक जैन संघ के तत्वावधान में चार माह तक प्रवचन, भक्तामर तप, स्वाध्याय, संस्कार शिविर, आराधना एवं विविध धार्मिक कार्यक्रमों की भव्य श्रृंखला
नई दिल्ली : दिल्ली गुजराती श्वेताम्ब्र मूर्तिपूजक जैन संघ (रजि.) के तत्वावधान में आगामी 12 जुलाई 2026 (रविवार) को पूज्य अध्यात्मयोगी आचार्यदेव श्रीमद् विजय कलापूर्ण सूरीश्वर जी महाराज के पावन शिष्य मंडल का भव्य चातुर्मास प्रवेश महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ आयोजित किया जाएगा।
इस शुभ अवसर पर पूज्य आचार्यदेव श्रीमद् विजय तीर्थभद्र सूरीश्वर जी महाराज के सुयोग्स शिष्य, तेजस्वी प्रवचनकार पूज्य मुनिश्री तीर्थनिर्वाण विजयजी महाराज साहेब, आगम एवं ज्योतिष के विद्वान पूज्य मुनिश्री तीर्थतारक विजयजी महाराज साहेब, तथा अन्य पूज्य मुनिराजों का मंगल प्रवेश होगा। गुरु भगवंतों के पावन सान्निध्य में सम्पूर्ण वातावरण धर्म, संयम, जिनवाणी, आराधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठेगा।
आत्मकल्याण और संयम साधना का अनुपम अवसर
भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में चातुर्मास का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। वर्षा ऋतु के इन चार महीनों में जैन साधु-साध्वी भगवंत एक स्थान पर विराजमान होकर धर्मोपदेश, स्वाध्याय, तप, संयम, ध्यान एवं जिनवाणी के माध्यम से समाज को आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग की प्रेरणा प्रदान करते हैं। यह काल केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रहकर आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और जीवन निर्माण का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।
अहिंसा, जीवदया और सर्वजीव मैत्री का संदेश
जैन दर्शन के अनुसार चातुर्मास अहिंसा, करुणा, जीवदया और सर्वजीव मैत्री के भावों को व्यवहार में उतारने का पावन काल है। वर्षा ऋतु में असंख्य सूक्ष्म जीवों की उत्पत्ति होती है, इसलिए साधु भगवंत इस अवधि में एक स्थान पर विराजमान रहकर संयम एवं अहिंसा का पालन करते हैं तथा समाज को प्रत्येक जीव के प्रति संवेदनशीलता दया और यथाशक्ति जीव संरक्षण का संदेश देते हैं।

पूज्य गुरु भगवंत अपने प्रेरणादायी प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को केवल धार्मिक आचरण ही नहीं, बल्कि सेवा, सदाचार, आत्मसंयम, करुणा एवं मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा प्रदान करेंगे। संदेश
इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य दिल्ली को ‘जीवदया नगरी’ के रूप में विकसित करना तथा समाज में प्रत्येक जीव के प्रति करुणा, अहिंसा और संवेदनशीलता का भाव जागृत करना है।
इस अभियान के अंतर्गत वर्षभर जीवदया, गोरक्षा, गौसेवा, अभयदान, पक्षी एवं वन्मजीव संरक्षण, पशु चिकित्सा सहायता, चारा एवं जल सेवा, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जीव मैत्री जागरूकता अभियान तथा सेवा-आधारित जनकल्याण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही युवाओं, बच्चों और समाज के विभिन्न वर्गों को इन सेवा कार्यों से जोड़कर जीवदया को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जाएगा।
जीवन मार्गदर्शन का अनुपम लाभ
पूज्य मुनिश्री तीर्थतारक विजयजी महाराज साहेब अपने गहन आगम अध्ययन, आध्यात्मिक साधना, शास्त्रज्ञान एवं जीवनोपयोगी मार्गदर्शन के लिए विशेष रूप से विख्यात हैं। वे मानव मन की गहरी समझ के साथ जीवन की जटिल परिस्थितियों में शास्त्रसम्मृत दिशा प्रदान करते हैं। उनके प्रेरणादायी प्रवचनों से असंख्य श्रद्धालुओं ने आत्मविश्वास, सकारात्मक दृष्टिकोण, आध्यात्मिक जागृति और जीवन में नई ऊर्जा का अनुभव किया है।
भव्य कार्यक्रम की रूपरेखा
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 6:30 बजे नवकारसी से होगा। इसके पश्चात 7:45 बजे पुष्पांजलि एन्क्लेव, पीतमपुरा से भव्य शोभायात्रा प्रारंभ होगी। प्रातः 9:00 बजे धर्मसभा में पूज्य गुरु भगवंतों के मंगल प्रवचन होंगे तथा कार्यक्रम का समापन 11:45 बजे संघ स्वामी वात्सल्य के साथ होगा।
चार माह तक चलेगी धर्म और संस्कारों की अविरल धारा
पूरे चातुर्मास के दौरान श्रद्धालुओं के लिए अनेक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं संस्कारमय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें भक्तामर तप, प्रवचन श्रृंखला, स्वाध्याय, वाचना, भक्ति संध्या, ज्ञान शिविर, आत्मविकास एवं जीवन निर्माण शिविर, विभिन्न धार्मिक आराधनाएँ तथा विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम सम्मिलित रहेंगे।
श्रद्धालुओं को सामायिक, प्रतिक्रमण, नवकार मंत्र आराधना, आयंबिल, उपवास, एकासन, दान, शील, तप एवं जीवदया जैसे जैन धर्म के मूल आचरणों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा भी दी जाएगी।
बच्चों और युवाओं के लिए विशेष आयोजन
नई पीढी को भारतीय संस्कृति एवं जैन संस्कारों से जोडने के उद्देश से आयोजित किये जा रहें है।

