ग्रीष्मावकाश के बाद स्कूल खुले, RTE के तहत 110 दिन बाद भी चयनित बच्चों को नहीं मिला प्रवेश; पीड़ित अभिभावकों ने जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी से लगाई गुहार

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जयपुर। ग्रीष्मावकाश समाप्त होने के बाद बुधवार से प्रदेशभर में विद्यालय पुनः खुल गए, लेकिन निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार (RTE) के तहत चयनित हजारों विद्यार्थियों को अब तक प्रवेश नहीं मिल पाने से अभिभावकों में भारी रोष है। इसी क्रम में संयुक्त अभिभावक संघ के तत्वावधान में पीड़ित अभिभावकों ने शिक्षा संकुल पहुंचकर स्थिति पर मंथन किया तथा प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू के नेतृत्व में दो दर्जन से अधिक अभिभावकों ने जयपुर जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी दीपक सिंघल से मुलाकात कर चयनित विद्यार्थियों के शीघ्र प्रवेश सुनिश्चित कराने की मांग की।

इस दौरान अभिभावक प्रतिनिधि दिनेश परमार, नरेंद्र सिंह, अरविंद अग्रवाल, संजय गोयल, एडवोकेट मनोज बडजात्या, इमरान कुरैशी, मोनू कुमावत, धनश्याम सिंह सहित अन्य अभिभावक भी उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) सुशील कुमार सिंघल से भी मुलाकात करने का प्रयास किया, लेकिन उनके कलेक्टर के साथ बैठक में व्यस्त होने के कारण मुलाकात नहीं हो सकी।

प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी है और किसी भी स्तर पर अभिभावकों एवं विद्यार्थियों की सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि पिछले 110 दिनों में संयुक्त अभिभावक संघ द्वारा शिक्षा विभाग को 1,000 से अधिक शिकायतें भेजी जा चुकी हैं तथा शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को भी अनेक बार इस गंभीर विषय से अवगत कराया गया है, लेकिन आज तक कोई प्रभावी समाधान नहीं निकला।

उन्होंने बताया कि 12 मार्च 2026 को राज्य सरकार ने RTE के तहत लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से लगभग 2.40 लाख विद्यार्थियों का निजी विद्यालयों में चयन किया था। इसके बावजूद 110 दिन बीत जाने के बाद भी केवल लगभग 60 हजार विद्यार्थियों को ही प्रवेश मिल सका है, जबकि करीब 1.80 लाख चयनित विद्यार्थी आज भी प्रवेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से प्रारंभ हो चुका था, 17 मई से ग्रीष्मावकाश रहा और अब 1 जुलाई से विद्यालय पुनः खुल चुके हैं, लेकिन हजारों बच्चे अब भी शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं।

अभिषेक जैन ने कहा कि यदि राज्य सरकार अपनी ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत चयनित विद्यार्थियों को समय पर प्रवेश नहीं दिला पा रही है, तो यह शिक्षा विभाग की सबसे बड़ी प्रशासनिक विफलता है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले शैक्षणिक सत्र के लगभग 40 हजार तथा सत्र 2024-25 के लगभग 35 हजार RTE प्रवेश प्रकरण आज भी लंबित पड़े हैं, जिससे स्पष्ट है कि विभाग लगातार अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में असफल रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के हितों के साथ इसी प्रकार खिलवाड़ करती रही, तो लाखों बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा। यह केवल प्रवेश का विषय नहीं, बल्कि बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला है। यदि सरकार निजी विद्यालयों के दबाव में चयनित विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाने में असमर्थ है, तो यह प्रदेश के लाखों अभिभावकों और विद्यार्थियों के साथ अन्याय है।

अभिषेक जैन बिट्टू ने चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य सरकार एवं शिक्षा विभाग शीघ्र सभी चयनित विद्यार्थियों के प्रवेश सुनिश्चित करें। अन्यथा अभिभावक अब केवल तमाशबीन बनकर नहीं बैठेंगे, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन कर बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे।

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