गुरु -द्रोही को पंजाब पर राज करने का कोई अधिकार नहीं’: सरना ने भगवंत मान के तत्काल इस्तीफे और सामाजिक बहिष्कार की अपील की।

कुलवंत कौर की रिपोर्ट :-

नई दिल्ली, 16 जून — दिल्ली अकाली दल के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने एक तीखा बयान जारी करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के तत्काल इस्तीफे की मांग की। यह बयान उस समय आया जब श्री अकाल तख्त साहिब — सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था — ने उन्हें धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन का दोषी ठहराते हुए “गुरु-द्रोही” और “खालसा पंथ विरोधी” घोषित किया।

सरना ने कहा, “जिस व्यक्ति को पाँच सिंह साहिबानों ने गुरु का द्रोही करार दिया हो, उसे न कोई नैतिक अधिकार है, न कानूनी वैधता और न ही गुरुओं की धरती पंजाब के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई अधिकार है। भगवंत मान को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। उनका पद पर बने रहना हर सिख और हर पंजाबी का अपमान है।”

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह द्वारा जारी फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सरना ने कहा कि वायरल वीडियो, जिसमें भगवंत मान जैसा दिखने वाला एक व्यक्ति सिख गुरुओं की तस्वीरों पर शराब छिड़कता हुआ दिखाई दे रहा है, वास्तविक है। दो स्वतंत्र फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की जांच के अनुसार यह वीडियो न तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से बनाया गया है और न ही इसके साथ कोई छेड़छाड़ की गई है। पाँचों सिंह साहिबानों ने इस निष्कर्ष को सर्वसम्मति से स्वीकार किया है।

उन्होंने कहा, “जत्थेदार बोल चुके हैं। पंथ बोल चुका है। अब कोई भ्रम नहीं बचा है। फॉरेंसिक साक्ष्य निर्णायक हैं। इसके बावजूद भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता चंडीगढ़ में बैठकर बहाने बना रहे हैं। यह बेशर्मी इस बेअदबी को और अधिक गंभीर बना रही है।”

सरना ने सभी सिख विधायकों, मंत्रियों और अन्य जनप्रतिनिधियों से, जिन्हें अकाल तख्त द्वारा 29 जून को तलब किया गया है, बिना किसी देरी के उपस्थित होने की अपील की।

उन्होंने कहा, “अकाल तख्त ने उन सभी सिख विधायकों को बुलाया है जिन्होंने उस विवादित बेअदबी विरोधी कानून को पारित करने में सहयोग दिया था, जिसे जत्थेदार ने ‘काला कानून’ कहा है। यह कोई राजनीतिक बुलावा नहीं, बल्कि पंथ का आदेश है। जो भी सिख विधायक इस आदेश की अवहेलना करेगा, वह अपनी पार्टी को नहीं बल्कि वाहेगुरु को जवाबदेह होगा।”

आम आदमी पार्टी के सिख विधायकों को चेतावनी देते हुए सरना ने कहा:

“आपको सिख संगत ने चुना है। यदि आप अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने के लिए एक गुरु-द्रोही का साथ देते हैं, तो संगत इसे याद रखेगी। अकाल तख्त के आदेश का पूर्ण और बिना शर्त पालन होना चाहिए।”

उन्होंने आम सिखों से भी अपील की कि वे जत्थेदार के आह्वान के अनुसार भगवंत मान से सामाजिक दूरी बनाए रखें।

उन्होंने कहा, “मैं प्रत्येक गुरसिख और समस्त सिख संगत से अपील करता हूँ कि वे जत्थेदार के आह्वान का पालन करते हुए भगवंत मान का सामाजिक बहिष्कार करें। उनके साथ मंच साझा न करें, उनके कार्यक्रमों में भाग न लें, अपने गुरुद्वारों में उनका स्वागत न करें और उन्हें वह सम्मान न दें जिसे पंथ उनसे वापस ले चुका है। पंजाब के हर गाँव, हर शहर और हर गुरुद्वारे में उन्हें पंथ के निर्णय का भार महसूस होना चाहिए।”

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