एक कदम—एक उद्देश्य: कैंसर के विरुद्ध एकजुट हुई दिल्लीजवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित हुई कैंसपोर्ट की 19वीं ‘वॉक फॉर लाइफ – स्ट्राइड अगेंस्ट कैंसर’

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एक कदम—एक उद्देश्य: कैंसर के विरुद्ध एकजुट हुई दिल्ली
जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित हुई कैंसपोर्ट की 19वीं ‘वॉक फॉर लाइफ – स्ट्राइड अगेंस्ट कैंसर’
नई दिल्ली, 8 फरवरी 2026 – कैंसर तथा अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को उपशामक देखभाल उपलब्ध कराने वाली अग्रणी गैर-लाभकारी संस्था कैंसपोर्ट ने विश्व कैंसर दिवस के उपलक्ष्य में जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम, नई दिल्ली में अपने प्रमुख आयोजन 19वीं ‘वॉक फॉर लाइफ – स्ट्राइड अगेंस्ट कैंसर’ का सफल आयोजन किया। इस वॉकथॉन में कैंसर सर्वाइवर्स, देखभालकर्ता, चिकित्सक, विद्यार्थी और कॉरपोरेट जगत के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न वर्गों के हजारों लोग शामिल हुए, जिन्होंने कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने और पीड़ितों के साथ एकजुटता व्यक्त करने का संकल्प लिया।


वर्ष 2008 से आरंभ यह पहल आज दिल्ली की सबसे बड़ी कैंसर जागरूकता पदयात्रा बन चुकी है। प्रतिभागियों ने आशा, साहस और समय पर जांच के महत्व से जुड़े संदेशों वाले बैनर लेकर पूरे उत्साह के साथ कदम बढ़ाए।
कैंसपोर्ट की संस्थापक-अध्यक्ष हरमाला गुप्ता ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा, “आपकी उपस्थिति यह दर्शाती है कि आप कैंसर के विरुद्ध खड़े होने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमें आपके सहयोग की आवश्यकता है ताकि कैंसर रोकथाम और प्रारंभिक जांच का संदेश दूर-दूर तक पहुँच सके। आज हमारे बीच मौजूद कैंसर सर्वाइवर्स इस बात के जीवंत प्रमाण हैं कि समय रहते पहचान हो तो कैंसर का इलाज संभव है।”
इस वर्ष 6,000 से अधिक लोगों ने भाग लेकर इस मुहिम को और सशक्त बनाया। रॉयल मैवरिक्स तथा रेड फोर्ट हार्ले राइडर्स के सदस्यों ने भी वॉक में शामिल होकर मरीजों का हौसला बढ़ाया। म्यूज़िक फैक्ट्री, आई कैन डू इट थिएटर ग्रुप और साईं एरोबिक्स की प्रस्तुतियों ने माहौल को ऊर्जा से भर दिया।


कैंसपोर्ट के बारे में:
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा सम्मानित संस्था कैंसपोर्ट, भारत में निःशुल्क होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर प्रदान करने वाली अग्रणी संस्था है। 1996 से अब तक यह संगठन 6 लाख से अधिक मरीजों और उनके परिवारों को सम्मान, राहत और संबल प्रदान कर चुका है। वर्तमान में 47 बहुविषयक टीमें दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र सहित 7 राज्यों में लगभग 4,000 मरीजों की निरंतर देखभाल कर रही हैं, जिनमें लगभग 75 प्रतिशत लाभार्थी वंचित वर्ग से हैं

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