अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस की पूर्व संध्या पर हंसराज कॉलेज में महिला शिक्षा पर विशेष कार्यक्रम आयोजित

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नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस (8 सितंबर) की पूर्व संध्या पर दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में ‘वृद्धि—Empowering Minds, Elevating Nations’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘Women Education Towards Nation Growth’ रहा, जिसमें महिला शिक्षा को राष्ट्र निर्माण और सामाजिक विकास की आधारशिला के रूप में रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) रमा के सान्निध्य में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सत्र की अध्यक्षता कॉलेज की उप-प्राचार्या प्रो. विजय रानी राजपाल ने की।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. (श्रीमती) उमा कुमार, प्रोफेसर एवं संस्थापक प्रमुख, रूमेटोलॉजी विभाग, एम्स तथा अध्यक्ष, इंद्रप्रस्थ शक्ति, विभा दिल्ली प्रांत ने महिला शिक्षा के व्यापक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है और इसका उद्देश्य केवल संस्थागत ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिक्षा को संस्थानों की चारदीवारी से बाहर समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है।


डॉ. उमा कुमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा के सूत्र ‘सा विद्या या विमुक्तये’ का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य को अज्ञान, निर्भरता और बंधनों से मुक्त करना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सशक्तीकरण इसी मुक्ति की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने मां को मनुष्य की प्रथम शिक्षिका और मानव विकास की प्रथम आधारशिला बताते हुए कहा कि परिवार और समाज में सीखने की पहली पाठशाला मां ही होती है।
उन्होंने सावित्रीबाई फुले और सिस्टर निवेदिता के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि महिला शिक्षा को केवल साक्षरता तक सीमित न रखकर उसे रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार एक मध्यमवर्गीय परिवार की दसवीं कक्षा की छात्रा से चिकित्सा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए उन्होंने एम्स में विभागाध्यक्ष के पद तक का सफर तय किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ी है, लेकिन निर्णय लेने और नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की संख्या और बढ़ाने की आवश्यकता है।


डॉ. उमा ने महिला सशक्तीकरण के लिए समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण साधन बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी माताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करें, उनके मूल्यों का सम्मान करें और परिवार से ही समानता की शुरुआत करें। उन्होंने पितृसत्तात्मक सोच से प्रभावी ढंग से निपटने तथा महिलाओं को अपनी भावनाओं और विचारों को स्पष्ट एवं निर्भीकता से व्यक्त करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
इस अवसर पर आशी जैन, केपीएमजी में कंसल्टेंट एवं पूर्व ट्रैफिगुरा/आईआईपीएस एमबीए (रैंक होल्डर), तथा वीडी. प्रीति बोसले, संस्थापक, प्रथा आयुर्वेदा एवं महासचिव, NASYA ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। दोनों वक्ताओं ने विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व को समझने तथा स्वयं शिक्षित होने के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों को भी साक्षर और जागरूक बनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों के लिए निःशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर की भी व्यवस्था की गई। प्रतिभागियों को उपहार भी प्रदान किए गए।
कार्यक्रम ने इस संदेश को प्रभावी रूप से रेखांकित किया कि महिला शिक्षा केवल महिलाओं के व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है। साक्षरता से शिक्षा, शिक्षा से आत्मनिर्भरता और आत्मनिर्भरता से नेतृत्व की ओर बढ़ता यह क्रम एक अधिक समान और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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