विकसित भारत के निर्माण में सहकारिता मॉडल है मुख्य आधार, समावेसी विकास पर जोर।

दीपक आनंद रिपोर्ट :-

विकसित भारत” के निर्माण में सहकारिता मॉडल है मुख्य आधार : श्री दिलीप संघानी ने NIPM नैटकॉन 2025 में समावेशी विकास पर दिया जोर

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2025:
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पर्सनल मैनेजमेंट (NIPM), जो भारत में मानव संसाधन प्रबंधन पेशेवरों की शीर्ष संस्था है, अपनी 41वीं वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन — NATCON 2025 का आयोजन 30 और 31 अक्टूबर 2025 को होटल पुलमैन, एरोसिटी, नई दिल्ली में कर रहा है।

इस वर्ष का विषय है — “विकसित भारत@2047: टेक्नोलॉजी और समावेशी एचआर नेतृत्व के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का सशक्तिकरण।”
इस सम्मेलन का उद्देश्य यह समझना है कि भारत का एचआर समुदाय किस प्रकार देश के “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य में योगदान दे सकता है।

दो दिवसीय इस सम्मेलन में देश और विदेश से कई नीति-निर्माता, उद्योग जगत के नेता, शिक्षाविद और एचआर पेशेवर भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में पैनल चर्चा, मुख्य भाषण, केस प्रेजेंटेशन, इंटरएक्टिव सत्र और नेटवर्किंग अवसर शामिल होंगे।

NIPM के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एम. एच. राजा ने कहा –

“NATCON 2025 का उद्देश्य संगठनों को स्थायी और मानव केंद्रित नेतृत्व अपनाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि लोगों का विकास देश के समग्र विकास से जुड़ सके।”

कार्यक्रम में एचआर एक्सीलेंस अवॉर्ड्स भी प्रदान किए जाएंगे और NIPM द्वारा आयोजित राष्ट्रीय एचआर क्विज़ प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।


“सहकारिता ही ‘सबका साथ, सबका विकास’ की सच्ची भावना है” — श्री दिलीप संघानी

सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री दिलीप संघानी, चेयरमैन – IFFCO, NCUI एवं GUJCOMASOL, ने कहा कि समावेशी विकास और समान अवसर ही विकसित भारत की नींव हैं। उन्होंने कहा कि NIPM ने एक बहुत ही सार्थक और भविष्यदर्शी विषय चुना है।

“विकसित भारत 2047 हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की दूरदर्शी सोच को आगे बढ़ाने वाला विषय है। वास्तविक विकास तभी संभव है जब समाज में सभी को समान अवसर मिले। सहकारिता मॉडल ‘सबका साथ, सबका विकास’ की सच्ची मिसाल है,” उन्होंने कहा।

श्री संघानी ने बताया कि IFFCO ने मजदूरों के कल्याण के लिए एक बड़ा कदम उठाया है –

“IFFCO ने संविदा कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन बढ़ाकर ₹20,000 प्रति माह कर दिया है, जो 1 नवंबर 2025 से लागू होगा। यह समान विकास और हर श्रमिक के सम्मान की दिशा में हमारा दृढ़ संकल्प है।”

उन्होंने IFFCO की अनुसंधान और नवाचार से जुड़ी उपलब्धियों का भी उल्लेख किया –

“गुजरात के कालोल स्थित नैनो बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (NBRC) में हमने नैनो फर्टिलाइज़र, ठोस नैनो NPK, ‘धरमृत’ और समुद्री शैवाल से बने ‘सागरिका’ जैसे उत्पाद विकसित किए हैं। ये नवाचार मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे — यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।”

उन्होंने आगे कहा कि IFFCO ने कृषि में डिजिटल और एआई आधारित तकनीकों जैसे ड्रोन, सटीक खेती और मिट्टी विश्लेषण को अपनाया है, जो “डिजिटल इंडिया” और “स्मार्ट एग्रीकल्चर मिशन” के उद्देश्यों को मजबूत करता है।

“IFFCO केवल एक खाद कंपनी नहीं, बल्कि किसानों का आंदोलन है — एक सहकारी क्रांति जो विकसित भारत 2047 के बीज बो रही है,” उन्होंने कहा।

अपने संबोधन के अंत में श्री संघानी ने एचआर पेशेवरों से आह्वान किया –

“मुझे विश्वास है कि यहां उपस्थित सभी प्रोफेशनल्स ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में अपनी भूमिका निभाने पर गंभीर चर्चा करेंगे और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विज़न को साकार करने में योगदान देंगे।”


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