महिला आरक्षण बिल पर नेशनल अकाली दल का विपक्ष पर तीखा प्रहार, 25 अप्रैल को प्रदर्शन का ऐलान

भावना धवन को सौंपी गई नेशनल अकाली दल महिला विंग की राष्ट्रीय कमान

महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने से जुड़े महिला आरक्षण बिल के पारित न होने के मुद्दे पर आयोजित प्रेस वार्ता में नेशनल अकाली दल ने विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोला। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने इसे देश की आधी आबादी के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीतिक स्वार्थ हावी होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

पम्मा ने कहा कि महिला आरक्षण केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और लोकतांत्रिक भागीदारी का मूल आधार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राजनीतिक दल सार्वजनिक मंचों पर महिला सशक्तिकरण की बातें करते हैं, लेकिन जब वास्तविक निर्णय लेने का समय आता है तो वही दल संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने से पीछे हट जाते हैं। उन्होंने इसे महिलाओं के साथ सीधा अन्याय बताया।

इस मुद्दे को लेकर नेशनल अकाली दल ने विपक्ष के खिलाफ 25 अप्रैल को जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पम्मा ने कहा कि यह प्रदर्शन महिलाओं के अधिकारों की आवाज बुलंद करने और जनजागरण के उद्देश्य से किया जाएगा और इसी प्रकार दिल्ली के विभिन्न चौकों पर भी विपक्ष के खिलाफ हल्ला बोल प्रदर्शन किए जाएंगे।

प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए भावना धवन को नेशनल अकाली दल महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया। पम्मा ने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में महिला विंग नई ऊर्जा के साथ काम करेगी और महिलाओं को संगठन में नेतृत्व के प्रमुख स्थान तक पहुंचाने का कार्य करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी महिलाओं को केवल सहभागिता तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में अग्रिम भूमिका देना चाहती है।

परमजीत सिंह पम्मा व भावना धवन ने नई टीम में राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में रेणु लूथरा को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि राष्ट्रीय सचिव के रूप में रूबी जिंदल और सोना बत्रा को नियुक्त किया गया है। दिल्ली प्रदेश महिला विंग में महासचिव पद पर रोजी विरमानी तथा सचिव के रूप में सुषमा को जिम्मेदारी दी गई है।

पम्मा ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलना उनका संवैधानिक अधिकार है और इससे देश की राजनीतिक व्यवस्था में संतुलन और समावेशिता मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महिलाओं की निर्णायक भूमिका रहेगी, इसलिए नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है।

पम्मा ने यह भी कहा कि भले ही लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो पाया हो, लेकिन नेशनल अकाली दल महिलाओं को समान अवसर, सम्मान और नेतृत्व प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में महिलाओं के हितैषी हैं, तो उन्हें इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करना चाहिए, न कि राजनीतिक कारणों से इसमें बाधाएं उत्पन्न करनी चाहिए।

प्रेस वार्ता में पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विक्रांत मोहन, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह मारवाह, सोशल विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष रश्मीत कौर बिंद्रा, एजुकेशन विंग की दिल्ली अध्यक्ष रिदम चड्ढा सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने का संकल्प दोहराया।

नेशनल अकाली दल ने इस अवसर पर स्पष्ट संदेश दिया कि महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना देश का समग्र और संतुलित विकास संभव नहीं है। राजनीतिक, सामाजिक और संगठनात्मक स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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