
नई दिल्ली 14 मार्च: किसी पगड़ी वाले सिख कैरेक्टर को सिगरेट पीते या हाथ में सिगरेट पकड़े दिखाना सिख धर्म के नियमों और उसूलों के बिल्कुल खिलाफ है। सिख तहज़ीब में तंबाकू (जगत जूठ) खाना “बज्जर कुर्हित” में से एक माना जाता है। यह बातें कहते हुए सरदार गुरमीत सिंह शंटी, नेशनल जनरल सेक्रेटरी शिरोमणि अकाली दल, नेशनल स्पोक्सपर्सन और पूर्व जनरल सेक्रेटरी दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी ने कहा कि फिल्म धुरंदर 2 में दिखाए जा रहे सिख कैरेक्टर के दृश्य के ज़रिए समुदाय की भावनाओं से खिलवाड़ किया जा रहा है, जो बर्दाश्त के बाहर है। उन्होंने कहा कि सिख धर्म में केस और पगड़ी गुरु साहिब जी के आशीर्वाद और पवित्रता की निशानी हैं। पगड़ी वाले व्यक्ति का सिगरेट पीना सिख धर्म के मुख्य मूल्यों का उल्लंघन माना जाता है। इसलिए, ऐसे दृश्य सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं और इसे धर्म की बेअदबी के तौर पर देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर कहानी की मांग के हिसाब से फिल्म में किसी किरदार की बुराइयां दिखानी हैं, तो आम तौर पर उसे पगड़ी पहने या अमृतधारी के रूप में नहीं दिखाया जाता, क्योंकि पगड़ी सिखों के ऊंचे नैतिक जीवन की निशानी है। उन्होंने कहा कि इसलिए हमने सेंसर बोर्ड को पत्र लिखकर मांग की है कि इस फिल्म पर तुरंत एक्शन लिया जाए और सिख किरदार के हाथों में दिखाए जा रहे ड्रग्स के दृश्य हटाए जाएं। अगर फिल्म निर्माता नहीं मानता है, तो फिल्म पर बैन लगा दिया जाए। पत्र में उन्होंने लिखा कि अगर आप इसमें असफल होते हैं, तो फिल्म के खिलाफ बड़े लेवल पर प्रोटेस्ट हो सकते हैं, जिससे सिनेमा हॉल इसे दिखाने से रोक सकते हैं। इसके साथ ही, हम आपको बताते हैं कि सिख पंथ की भावनाओं से खेलने के लिए फिल्म निर्माता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी और इस बारे में श्री अकाल तख्त साहिब में शिकायत भी दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पत्र की कॉपी जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब, शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रेसिडेंट व दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के जॉइंट कमिश्नर को कार्रवाई के लिए लिखी जाएगी । आखिर में उन्होंने कहा कि दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के मुख्य प्रबंधक व धर्म प्रचार विंग के मुखिया को इस काम के लिए आगे आना चाहिए था, लेकिन प्रचार के फील्ड में उनकी परफॉर्मेंस ज़ीरो है, इसलिए इस मामले पर उनका चुप रहना बहुत शर्मनाक है।

