छब्बीसवाँ संबलपुर पुस्स्क मेला हर दिन हजारों लोगों को आकर्षित कर रहा है। यह मेला 24 जनवरी को शुरू हुआ था और अब अपने आखिरी चरण में पहुँच गया है।

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संबल पुर :छब्बीसवाँ संबलपुर पुस्स्क मेला हर दिन हजारों लोगों को आकर्षित कर रहा है। यह मेला 24 जनवरी को शुरू हुआ था और अब अपने आखिरी चरण में पहुँच गया है। बच्चों के साहित्यूफिक्शन, नॉन-फिक्शन, शिक्षा जगत की पुस्तकें और पॉपुलर पुस्त‌कों वाले 250 से अधिक स्टॉल संबलपुर और आस-पास के जगहों से पाठकों को लगातार आकर्षित कर रहे हैं।

शिशु मंडप में राष्ट्रीय पुस्म्‌क न्यास भारत (एनबीटी) के राष्ट्रीय बाल साहित्य केंद्र (एनसीसीएल) द्वारा आयोजित अलग-अलग कार्यक्रम में विशेषज्ञ बच्चों को गाइड कर रहे हैं। आज के कार्यक्रम में अलग-अलग स्कूलों के लगभगा, हजारों विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत ‘आओ सुनें कहानी से हुई, जिसका नेतृत्व खोरीटेलर शोभामयी मोहपात्रा ने किया। बच्चे कहानियों में पूरी तरह खो गए और हंसते-खेलते हुए जोश के साथ हिस्सा लिया। इसके बाद श्री विवेक कुमार नीदिक मैथ्स मैजिक सत्र लिया, जिसमें उन्होंने अंको का इस्तेमाल करके दिलचस्प गणितीय सिद्धांत दिखाए जिससे दर्शक बहुत आकर्षित हुए। दिन का आखिरी सत्र एनसीसीएल टीम द्वारा आयोजित मंडला आर्ट कार्यशाला थी। पुस्तक मेले के पहले दिन से ही बच्चों के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग जोश के साथ शामिल हो रहे हैं।

दोपहर में सेतु द्वारा आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम मेंमीट द ऑथर सत्र हुआ जिसमें कवयित्री डॉ. सस्मिता कर ने जानी-मानी अनुवादक सुजाता शिबेन से बातचीत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेतु के वरिष्ठ सदस्य श्री सुशांत कुमार गुरु ने की। साहित्य और रचनात्मकता पर बोलते हुए, सुजाता शिबेन ने कहा कि अनूदित साहित्य की खासियत यह है कि लोग अलग-अलग भाषाएँ नहीं सीख सकते इसलिए वे अनुवाद के ज़रिए मूल पुस्त‌कें पढ़ सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि अनुवाद करने के लिए दोनों भाषाओं में माहिर होना ज़रूरी है। हिंदी मेंलैंगिक असमानता है, पर ओड़िआ में नहीं है। कोई भी जितना अधिक पढ़ेगा उतना ही वह लिखने में माहिर होगा।

श्रीमती सुजाता शिबेन ने कहा कि दोनों भाषाओं के समाजसंस्कृति और रीति-रिवाजों को जानना ज़रूरी है। क्योंकि अनुवाद व्यक्तिगत होता है इसलिए कई प्रसिद्ध पुस्तकें बिना अनुवाद के रह जाती हैं। सरकार को अनुवाद में ट्रेनिंग के लिए संस्थान बनाने चाहिए और अनुवादकों को नियुक्त करना चाहिए। ओड़िआ साहित्य बहुत समृद्ध हैडसे बड़े हिंदी भाषी क्षेत्र तक पहुँचना चाहिए। नए लेखकों को अच्छालेखक और अनुवादक होना चाहिए। साहित्य समाज को रास्ता दिखा सकता है। सेतु के सचिव हरिनारायण पांडा ने शुरुआती भाषण दिया।

दूसरे सत्र में अतिथियों ने डॉ. सस्मिता कर की लिखी काव्य पुस्मृक्मस्त्रानी’ का विमोचन किया। डॉ. कर रमादेवी महिला विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं और एक जानी-मानी साहित्यकार भी हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में मशहूर गायिका आसिमा पांडा ने अपनी दिल को छू लेने वाले प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने अपने कई लोकप्रिय गानों के साथ-साथ संबलपुरी गाने भी गाएजिससे वहाः मौजूद सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए।

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