
— रविवार को मनाया गया “उत्तम सत्य धर्म” : “सच्ची राह का निर्माण करना ही उत्तम सत्य धर्म”
जयपुर। रविवार को दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन “उत्तम सत्य धर्म” पर्व श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर के विभिन्न जैन मंदिरों एवं कॉलोनियों में विराजमान आचार्य, उपाध्याय, मुनि एवं आर्यिका संघों के ससंघ सानिध्य में श्रावक-श्राविकाओं द्वारा स्वर्ण एवं रजत कलशों से कलशाभिषेक एवं शांतिधारा की गई। इसके पश्चात अष्ट द्रव्यों से जिनेन्द्र प्रभु की भक्तिभावपूर्वक आराधना करते हुए उत्तम सत्य धर्म की पूजा की गई तथा सत्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया।

अखिल भारतीय दिगंबर जैन युवा एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक जैन बिट्टू ने उत्तम सत्य धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “सत्य की बुनियाद पर मोक्ष का महल टिका होता है, जबकि झूठ की नींव पर तैयार होने वाले महल को ढहने में देर नहीं लगती। जिस प्रकार सच्चाई कभी छुप नहीं सकती, उसी प्रकार झूठे उसूलों से खुशबू नहीं आ सकती। कागज के फूलों से कभी खुशबू नहीं बन सकती, उसी प्रकार झूठे बोल बोलने से सच्ची कामयाबी भी प्राप्त नहीं हो सकती।”

उन्होंने कहा कि सत्य होते हुए भी यदि कोई वचन अप्रिय हो और उससे किसी को पीड़ा पहुंचे, तो ऐसे वचनों से भी बचना चाहिए। शास्त्रों में भी कहा गया है—
“सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्, न ब्रूयात् सत्यमप्रियम।”

अर्थात सत्य बोलना चाहिए, प्रिय बोलना चाहिए, लेकिन ऐसा सत्य नहीं बोलना चाहिए जो अनावश्यक रूप से किसी को पीड़ा पहुंचाए। उन्होंने कहा कि सदैव शास्त्रानुकूल एवं हितकारी वचन बोलने चाहिए। व्यवहार में कई बार ऐसे कथन भी होते हैं जिनका आशय सत्य ही होता है, जैसे कोई व्यक्ति गेहूं पिसाने जाता है तो सामान्य व्यवहार में कहता है कि वह आटा पिसाने जा रहा है।
अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि असत्य बोलने वाले व्यक्ति पर धीरे-धीरे विश्वास समाप्त हो जाता है। इसलिए सदैव सत्य की राह पर चलना चाहिए। सत्य असत्य के विरुद्ध खड़े रहने की शक्ति प्रदान करता है और जीवन में स्थिरता एवं विश्वास का निर्माण करता है। यही उत्तम सत्य धर्म का मूल संदेश है।
सोमवार को उत्तम संयम धर्म एवं सुगंध दशमी
राष्ट्रीय सचिव प्रमोद बाकलीवाल ने बताया कि सोमवार को दशलक्षण महापर्व के छठे दिन “उत्तम संयम धर्म” के साथ “सुगंध दशमी” पर्व श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा।
इस अवसर पर विभिन्न जैन मंदिरों में धार्मिक एवं आध्यात्मिक संदेश देने वाली झांकियों का मंचन किया जाएगा। संध्याकाल में श्रीजी की महामंगल आरती के साथ मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। सुगंध दशमी के अवसर पर श्रीजी के समक्ष धूप खेरी जाएगी तथा वातावरण को सुगंधित करते हुए जीवन से असुगंध अर्थात नकारात्मकता एवं विकारों को दूर करने का आध्यात्मिक संदेश दिया जाएगा।

