Nalanda Mahavihara की विरासत एवं बौद्ध चिंतन के वैश्विक प्रसार पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन Dr. Ambedkar International Centre में आयोजित

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नई दिल्ली | 24 मार्च 2026:नालंदा महाविहार की ऐतिहासिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक विरासत तथा बौद्ध चिंतन और नैतिक मूल्यों के वैश्विक प्रसार में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर केंद्रित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आज डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।

इस सम्मेलन में देश और विदेश से आए प्रतिष्ठित विद्वानों, बौद्ध भिक्षुओं, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया और नालंदा महाविहार से जुड़ी समृद्ध बौद्धिक परंपराओं पर विचार-विमर्श किया। चर्चा के दौरान यह रेखांकित किया गया कि नालंदा महाविहार विश्व के प्राचीन और प्रतिष्ठित शिक्षा केन्द्रों में से एक रहा है, जिसने एशिया सहित विश्व के अनेक भागों में बौद्ध दर्शन, ज्ञान परंपरा और नैतिक शिक्षाओं के विकास तथा प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

यह आयोजन डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के उस संस्थागत उद्देश्य के अनुरूप था, जिसके तहत सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय गरिमा से संबंधित विचारों पर शोध, संवाद और उनके प्रसार को बढ़ावा दिया जाता है। ये विचार Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar के जीवन और दर्शन से प्रेरित हैं।

सम्मेलन के वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि Gautama Buddha की शिक्षाओं को डॉ. आंबेडकर ने एक न्यायपूर्ण और मानवीय समाज के निर्माण के लिए गहन नैतिक और दार्शनिक आधार माना था। इस संदर्भ में नालंदा महाविहार की विरासत तथा बुद्ध धम्म के प्रसार में उसकी भूमिका पर हुए शैक्षणिक विचार-विमर्श को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया।

सम्मेलन में यह भी विचार किया गया कि बौद्ध शिक्षाओं की समकालीन समय में सामाजिक समरसता, नैतिक शासन व्यवस्था और मानव कल्याण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रतिभागियों ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक विमर्श बौद्ध बौद्धिक परंपराओं की समझ को और गहरा करते हैं तथा समावेशी और नैतिक समाज के निर्माण से जुड़े वैश्विक संवादों को भी सुदृढ़ करते हैं।

सम्मेलन का समापन सार्थक शैक्षणिक संवाद और विचार-विमर्श के साथ हुआ, जिसमें बौद्ध बौद्धिक परंपराओं पर आगे भी शोध और संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

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