अपोलो हास्पिटल्स ने दुर्लभ लिवर ट्रांसप्लांट कर फिलिपिनी जुड़वा भाईयों को नया जीवन दिया।

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अपोलो हास्पिटल्स ने अभी तक 645लिवर ट्रांसप्लांट मे सफलता पाई है..

नई दिल्ली: इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली ने विश्व स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हॉस्पिटल में फिलीपींस के 23 महीने के जुड़वां भाईयों का लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट करके उनकी जान बचाई गई है। यह हॉस्पिटल में आज तक किए गए बच्चों के 645 लिवर ट्रांसप्लांट्स में पहला जुड़वां बच्चों का लिवर ट्रांसप्लांट है। ये जटिल सर्जरियाँ एक के बाद एक डॉ. अनुपम सिबल, ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर एवं सीनियर पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट् और डॉ. नीरव गोयल, सीनियर कंसल्टेंट एवं हेड ऑफ लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी के मार्गदर्शन में की गईं। इससे एडवांस पीडियाट्रिक केयर में अपोलो की उपलब्धि प्रदर्शित होती है।

फिलिपिन के जुड़वां बच्चे , टायलर और केली का जन्म समय से पहले हो गया था। जन्म के समय उनका वजन केवल 2 किग्रा. और 2.4 किग्रा. था। इससे पहले भी उनके माता-पिता अपने एक बच्चे को खो चुके थे। इन जुड़वां बच्चों के जन्म के दो हफ्ते बाद ही उन दोनों को पीलिया हो गया,जाँच में सामने आया कि उन्हें एक जन्मजात बाइलियरी विकार कोलेडोकल सिस्ट् टाईप 4ए था। इस जन्मजात विकार में बाईल डक्ट बहुत ज्यादा बड़ी हो जाती है और अगर समय पर इलाज न मिले, तो लिवर को गंभीर नुकसान पहुँचता है। इस विकार के कारण दोनों बच्चों का लिवर फेल हो गया।
इसके बाद, इन जुड़वां बच्चों को बार-बार गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल ब्लीडिंग होने लगी। पेट में फ्लुइड जमा होने लगा। उनका विकास ठीक से नहीं हो पा रहा था और उन्हें बार-बार हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ता था। डॉक्टरों की पूरी कोशिश के बाद भी उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। उनकी जान बचाने का एकमात्र विकल्प लिवर ट्रांसप्लांट था।
उनके सामने चुनौती केवल सर्जरी की नहीं थी। कुछ ही दिनों में दोनों भाईयों के ट्रांसप्लांट के लिए दो अनुकूल लिविंग डोनर तलाशना बहुत ही मुश्किल था। एक भाई के लिए बच्चों की माँ के लिवर का एक हिस्सा मिल गया, फिर दूसरे बच्चे के लिए अपने लिवर का एक हिस्सा देने के लिए उनके मामा सामने आए, जिससे दोनों ट्रांसप्लांट संभव हो पाए। रिकवरी की पूरी प्रक्रिया में पिता ने अपनी पत्नी, दोनों बच्चों और उनके मामा की पूरी देखभाल की।

टायलर के ट्रांसप्लांट की सर्जरी 15 घंटे से अधिक समय तक चली, वहीं केली की सर्जरी में 13 घंटे से अधिक समय लगा। दोनों सर्जरी में कॉम्प्लेक्स सर्जिकल रिकॉन्स्ट्रक्शन शामिल था। इन दोनों जुड़वां बच्चों ने अच्छी रिकवरी की और उनका लिवर अब स्वस्थ काम कर रहा है। फौलो-अप के दौरान दोनों बच्चे स्वस्थ हैं।
शिवकुमार पट्टाभिरमन,एमडी , इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने कहा, “हर ट्रांसप्लांट के पीछे एक परिवार की उम्मीद छिपी होती है। हम फिलीपींस के इस परिवार के आभारी हैं, जिन्होंने अपने बच्चों के इलाज के लिए हम पर भरोसा करके इतनी दूर यात्रा की.इलाज के नतीजे हमारी मल्ट्रीडिसिप्लिनरी टीम की सामर्थ्य को प्रदर्शित करते हैं। अपोलो हॉस्पिटल मरीजों को जटिल मेडिकल समस्याओं के लिए आधुनिक और सहानुभूतिपूर्ण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
डॉ. अनुपम सिबल, ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर, सीनियर पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट् एवं हेपेटोलॉजिस्ट, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने कहा, “जुड़वां बच्चों में लिवर ट्रांसप्लांट के मामले देखने में नहीं आते हैं, और दोनों बच्चों का एक ही समय लिवर ट्रांसप्लांट करने के मामले तो और भी ज्यादा कम होते हैं। अपोलो हॉस्पिटल में हुए बच्चों के 645 लिवर ट्रांसप्लांट के इतिहास में जुड़वाँ बच्चों का ट्रांसप्लांट पहली बार किया गया है। ये दोनों बच्चे बहुत छोटे थे। इसलिए यह ट्रांसप्लांट और ज्यादा चुनौतीपूर्ण था। दोनों बच्चे केली और टायलर बॉर्न टुगैदर, फॉट टुगैदर और सेह टुगैदर (एक साथ जन्म, एक साथ संघर्ष और एक साथ बचने) की शक्तिशाली मिसाल पेश करते हैं।”

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