
श्री विजेन्द्र गुप्ता ने संवैधानिक सुधारों पर समावेशी विचार-विमर्श का किया आह्वान
श्री पी.पी. चौधरी ने कहा—देशव्यापी परामर्श प्रक्रिया समिति की सिफारिशों को देगी स्वरूप
चुनावी चक्रों का समन्वय व्यापक सहमति एवं संवैधानिक सुरक्षा उपायों के साथ ही संभव: दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष
नई दिल्ली, :01 जुलाई, 2026 :दिल्ली विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री विजेन्द्र गुप्ता ने आज संविधान (एक सौ उनतीसवाँ संशोधन) विधेयक, 2024 तथा संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024 पर गठित संसदीय संयुक्त समिति के सदस्यों से विधानसभा सदन में विस्तृत संवाद किया। समिति के अध्यक्ष माननीय श्री पी.पी. चौधरी के नेतृत्व में समिति अध्ययन भ्रमण के अंतर्गत दिल्ली विधानसभा पहुँची।

यह भ्रमण “एक राष्ट्र, एक चुनाव” के प्रस्तावित ढाँचे पर समिति द्वारा देशभर में किए जा रहे परामर्शों का हिस्सा था। समिति एक साथ चुनावों के संवैधानिक, विधिक, प्रशासनिक एवं निर्वाचन संबंधी विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रही है। इसके लिए राज्य सरकारों, संवैधानिक प्राधिकारियों, राजनीतिक दलों तथा अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है जिसके बाद समिति अपनी अनुशंसाएँ संसद को प्रस्तुत करेगी।

समिति के साथ अपने विस्तृत संवाद के दौरान श्री विजेन्द्र गुप्ता ने विचारार्थ अनेक महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद के प्रारंभिक दशकों में देश में एक साथ चुनाव की व्यवस्था प्रचलित थी, किंतु समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियों तथा विधानमंडलों के समयपूर्व विघटन के कारण चुनावी चक्र अलग-अलग हो गए। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों से प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, आदर्श आचार संहिता बार-बार लागू होती है तथा शासन एवं विकास कार्यक्रमों की निरंतरता प्रभावित होती है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि इस प्रकार का कोई भी सुधार व्यापक राजनीतिक सहमति तथा सुदृढ़ संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने चुनावी चक्रों के समन्वय, रचनात्मक अविश्वास प्रस्ताव, विधानमंडलों के समयपूर्व विघटन, निर्वाचक नामावलियों के सामंजस्य, निर्वाचन आयोग की लॉजिस्टिक तैयारियों को सुदृढ़ बनाने तथा भारत की लोकतांत्रिक एवं संघीय व्यवस्था की मूल भावना को सुरक्षित रखते हुए राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत व्यवस्थाओं जैसे विषयों पर व्यापक विचार किए जाने का सुझाव दिया।

संसदीय संयुक्त समिति के माननीय अध्यक्ष श्री पी.पी. चौधरी ने कहा कि संसद ने समिति को एक साथ चुनावों के लिए प्रस्तावित संवैधानिक एवं विधायी ढाँचे का परीक्षण करने का दायित्व सौंपा है। उन्होंने कहा कि यह अभ्यास भारत की लोकतांत्रिक एवं निर्वाचन व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डालने वाला है। उन्होंने बताया कि समिति देशभर में राज्य सरकारों, संवैधानिक प्राधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा अन्य संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर रही है, ताकि उसकी अनुशंसाएँ भारत की विविध संवैधानिक, राजनीतिक एवं संघीय दृष्टियों को समुचित रूप से प्रतिबिंबित कर सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह व्यापक परामर्श प्रक्रिया समिति को संसद के समक्ष एक समग्र, संतुलित एवं सुविचारित प्रतिवेदन प्रस्तुत करने में सक्षम बनाएगी।
इस अवसर पर दिल्ली विधानसभा के माननीय उपाध्यक्ष श्री मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने तथा बार-बार होने वाले चुनावों पर होने वाले बार बार होने व्यय को कम करने की दृष्टि से एक साथ चुनाव के प्रस्ताव पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संसदीय संयुक्त समिति का विचार-विमर्श देशहित में एक व्यावहारिक एवं लाभकारी निर्वाचन ढाँचे के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
इस कार्यक्रम में विधि एवं न्याय मंत्रालय, लोकसभा सचिवालय, दिल्ली विधानसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

