वर्ष -2047 तक जैव ईंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा भारत : केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम

नई दिल्ली। “ग्रीन पावर इंडिया-2026” सम्मेलन में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक जैव ईंधन और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में स्वच्छ ऊर्जा, जैव ईंधन, ई-वेस्ट प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। हरित ऊर्जा केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव भी है।

उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, स्थानीय ज्ञान और नवाचारों का समुचित उपयोग कर हरित अर्थव्यवस्था को नई गति दी जा सकती है। आने वाले वर्षों में जैव ईंधन भारत की ऊर्जा व्यवस्था का प्रमुख आधार बनेगा और ऊर्जा आयात पर निर्भरता लगातार घटेगी।

सम्मेलन में देशभर से आए विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, प्रशासनिक अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हरित ऊर्जा, जैव ईंधन, पर्यावरण संरक्षण, ई-वेस्ट प्रबंधन एवं सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे।

पालैस ऑफ इंडिया के नियंत्रक डॉ. नरेश ए. शर्मा ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा को जनआंदोलन का स्वरूप देना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग जगत और समाज के सामूहिक प्रयासों से ही ऊर्जा क्षेत्र में स्थायी परिवर्तन संभव है। कृषि अवशेषों से जैव ईंधन तैयार कर किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है तथा पराली जलाने जैसी समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने किसानों से हरित ऊर्जा अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत विश्व को हरित विकास का नया मॉडल देने की क्षमता रखता है तथा सौर, पवन और जैव ईंधन के क्षेत्र में तेजी से हो रहा निवेश भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

राज्यसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव (सेवानिवृत्त) श्री डी. एस. प्रसन्ना ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को संस्थागत रूप से और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने नीति निर्माण में जनभागीदारी बढ़ाने तथा हरित परिवहन को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण भारतीय संस्कृति का मूल तत्व है और प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व भी।

लोकसभा सचिवालय के पूर्व निदेशक श्री शिव कुमार बलगरामी ने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को हरित अभियान से जोड़ने का आह्वान किया।

हनुमान न्यूज़ की संस्थापक एवं अध्यक्ष सुश्री श्वेता रेड्डी ने कहा कि मीडिया जनजागरूकता का सबसे प्रभावी माध्यम है। हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सकारात्मक प्रयासों को व्यापक स्तर पर समाज तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है।

इन डिनॉन की प्रधान संपादक सुश्री लुबना ने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए समाज में व्यवहारिक परिवर्तन आवश्यक है। उन्होंने युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को हरित विकास की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया।

दूरदर्शन नेशनल के वरिष्ठ निर्माता श्री कृष्णा राव ने कहा कि जनहित से जुड़े अभियानों को जन-जन तक पहुँचाने में सार्वजनिक प्रसारण माध्यमों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

अभियोगास्म्स फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मंगेश त्रिवेदी ने योग, स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए कहा कि स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए स्वच्छ ऊर्जा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

आकलन के प्रधान संपादक श्री वी. राज बाबुल ने कहा कि विकसित भारत-2047 का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और जनभागीदारी को समान प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जैव ईंधन, हरित ऊर्जा और ई-वेस्ट प्रबंधन केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का व्यापक अभियान हैं, जिसमें सरकार, उद्योग जगत, वैज्ञानिक समुदाय, मीडिया, शिक्षण संस्थानों तथा समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित कर ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण किया जा सकता है। भारत के पास संसाधन, तकनीक, नवाचार और युवा शक्ति का अद्वितीय सामर्थ्य है, जिसके बल पर देश हरित विकास का वैश्विक नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।

समूह कप्तान (सेवानिवृत्त) श्री विश्वजीत कुमार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से ऊर्जा आत्मनिर्भरता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्वदेशी ऊर्जा क्षमता भारत को रणनीतिक रूप से और अधिक सशक्त बनाएगी।

मेइटी द्वारा ई-वेस्ट प्रबंधन के लिए नियुक्त एक्सेलरेटर कार्यक्रम के निदेशक श्री गौतम मेहरा ने कहा कि ई-वेस्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन और पुनर्चक्रण हरित अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने आधुनिक तकनीक, नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर बल दिया।

प्रसिद्ध एंकर एवं पत्रकार डॉ. दर्शिनी प्रिया ने कहा कि हरित विकास के विषय में जनजागरूकता बढ़ाने के लिए मीडिया, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को मिलकर व्यापक अभियान चलाना होगा।

कार्यक्रम के दौरान सभी विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों को आयोजकों की ओर से स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।

सम्मेलन के समापन पर सभी वक्ताओं ने वरिष्ठ पत्रकार एवं कार्यक्रम के आयोजक श्री वी. राज बाबुल के सफल नेतृत्व, दूरदर्शी सोच एवं उत्कृष्ट आयोजन की मुक्तकंठ से सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि उनके कुशल समन्वय और सार्थक पहल के कारण यह सम्मेलन हरित ऊर्जा, जैव ईंधन, ई-वेस्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प पर गंभीर और परिणामोन्मुखी विमर्श का प्रभावी मंच बना। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्री बाबुल के नेतृत्व में इस प्रकार के आयोजन भविष्य में भी जनजागरूकता बढ़ाने, नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद को सशक्त बनाने तथा हरित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

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