
दिल्ली के शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद द्वारा दिल्ली के वर्ष 2026-27 के बजट के संबंध में विधानसभा में दिए गए भाषण का सारांश.
माननीय अध्यक्ष महोदय,
आपका हृदय से धन्यवाद कि आपने मुझे दिल्ली की माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत इस महत्वपूर्ण बजट पर अपने विचार रखने का अवसर प्रदान किया। यह बजट केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि विकसित भारत की राजधानी—विकसित दिल्ली—के निर्माण का स्पष्ट रोडमैप है।
अध्यक्ष महोदय,
बजट किसी भी सरकार की नीयत, नीति और प्राथमिकताओं का आईना होता है। ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के दौरान विपक्ष की अनुपस्थिति न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह दर्शाती है कि वे दिल्ली के वास्तविक मुद्दों से विमुख हो चुके हैं और अपनी जिम्मेदारियों से बच रहे हैं।
सदन की परंपरा और विपक्ष की भूमिका
अध्यक्ष महोदय,
दिल्ली की राजनीति ने वह दौर भी देखा है जब 1993 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी और विपक्ष में जगप्रवेश चंद्र जी जैसे गंभीर और अध्ययनशील नेता हुआ करते थे। उस समय स्थिति यह थी कि वित्त मंत्री से अधिक लोग नेता प्रतिपक्ष के विचार सुनने के लिए उत्सुक रहते थे।
इसके पश्चात 15 वर्षों तक श्रीमती शीला दीक्षित जी के कार्यकाल में भी श्री जगदीश मुखी जी और श्री विजय कुमार मल्होत्रा जी जैसे नेताओं ने विपक्ष की गरिमा को बनाए रखा। वे तथ्यों के साथ, तैयारी के साथ और गहराई से आर्थिक नीतियों पर चर्चा करते थे।
आज स्थिति इसके विपरीत है।
भारतीय जनता पार्टी के सदस्य संख्या में भले कम हों, लेकिन हम हर मुद्दे पर पूरी मजबूती से दिल्ली की जनता की आवाज उठाते हैं। वहीं विपक्ष आज अपने विफलताओं को छुपाने के लिए सदन से दूर भाग रहा है।

अध्यक्ष महोदय,
मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूँ कि आज सुबह स्वयं विपक्ष के चार विधायकों ने मुझसे संपर्क किया। अनधिकृत कॉलोनियों से जुड़े इन विधायकों ने स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में उनके क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं।
यहाँ तक कि उन्होंने अपने क्षेत्रों में और अधिक ‘अटल कैंटीन’ खोले जाने की मांग भी की। विपक्ष के शीर्ष नेतृत्व को भय है कि कहीं उनके ही विधायक सदन में आकर इस बजट की सच्चाई और उपलब्धियों को उजागर न कर दें—इसी कारण उन्हें रोका जा रहा है।
“तुम्हारी आँख में आँसू, हमारे घर में शहनाई,
हमारे दिल में ऐसी दुश्मनी पाली नहीं जाती।”
हमारी प्रतिबद्धता स्पष्ट है—दिल्ली के विकास और यहाँ की बेटियों के सशक्तिकरण को किसी भी परिस्थिति में रुकने नहीं देंगे।
अध्यक्ष महोदय,

पिछले बजट के समय मैंने कहा था कि वर्षों से जमा मलबे को हटाने में समय लगेगा। मात्र 33 दिनों की सरकार में मुख्यमंत्री जी ने ₹1 लाख करोड़ का बजट प्रस्तुत कर दिल्ली के पुनरुद्धार की मजबूत नींव रखी थी। और आज, एक वर्ष बाद, पूरे विश्वास के साथ मैं कह सकता हूँ कि यह बजट “सुशासन को पुनर्परिभाषित करने वाला बजट” है।
“तूफान से कश्ती को निकाला ही नहीं है,
हमने मंज़िल का रास्ता भी दिखा दिया है।”
अध्यक्ष महोदय,
इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता है—अब तक की सर्वाधिक कैपिटल स्पेंडिंग।
2023-24: ₹21,000 करोड़, 2024-25: ₹15,000 करोड़,
2025-26: ₹28,115 करोड़, 2026-27: ₹32,000 करोड़ से अधिक
यह केवल आंकड़े नहीं हैं—यह दिल्ली के भविष्य में किया गया निवेश है।
जब पूंजीगत व्यय बढ़ता है, तो उसका सीधा असर स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, परिवहन व्यवस्था और पुलों जैसे बुनियादी ढांचे पर पड़ता है। इससे न केवल विकास को गति मिलती है, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होते हैं।
यह बजट स्पष्ट संदेश देता है
यह सरकार हेडलाइन नहीं, ग्राउंडलाइन पर काम करती है।
जब दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति हो, जब जनता की सेवा करने का सच्चा भाव हो, तभी वास्तविक विकास संभव हो पाता है। कोई भी राज्य अपनी अर्थव्यवस्था को केवल उधार के सहारे नहीं चला सकता; उसे अपने टैक्स कलेक्शन को बढ़ाना होता है, अपने राजस्व के स्रोतों को सशक्त करना होता है।
तुलनात्मक टैक्स राजस्व पर नज़र डालिए:
वर्ष 2023-24 में ₹55,000 करोड़ का टैक्स राजस्व प्राप्त हुआ।
वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर ₹58,750 करोड़ हो गया, जो 6.4% की वृद्धि दर्शाता है। और वर्ष 2025-26 में, माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी के कुशल वित्तीय प्रबंधन के कारण, 16.4% की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ ₹68,700 करोड़ का टैक्स राजस्व संग्रहित किया गया।
यह इस बात का प्रमाण है कि आज दिल्ली अपनी आय के दम पर आगे बढ़ रही है, अपनी स्पेंडिंग के लिए स्वयं संसाधन जुटा रही है और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है।
अध्यक्ष जी दिल्ली के कर्ज में भी कमी आईं है।यह हमारी सरकार के मजबूत वित्तीय प्रबंधन का प्रमाण है। विपक्ष दिल्ली को कर्ज के बोझ में छोड़कर गया था।
वर्ष 2023-24 में दिल्ली पर ₹40,323 करोड़ का कर्ज था। लेकिन हमारी सरकार के प्रभावी नेतृत्व में, वर्ष 2025-26 तक यह घटकर ₹23,557 करोड़ रह गया है।
अध्यक्ष जी यही होता है वास्तविक और जिम्मेदार वित्तीय प्रबंधन।

महंगाई पर नियंत्रण — आम जनता को राहत
आंकड़े स्वयं गवाही दे रहे हैं। दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, राजधानी में महंगाई दर देश में सबसे कम है:
वर्ष 2022 में महंगाई दर 4.61% थी।
वर्ष 2023 में यह घटकर 2.81% रह गई।
वर्ष 2024 में यह और घटकर 2.59% हुई।
और दिसंबर 2025 तक, माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में, महंगाई दर ऐतिहासिक न्यूनतम 1.13% तक पहुंच गई।
यह सीधे-सीधे आम आदमी की जेब को राहत देने का काम है।
अध्यक्ष जी बजट 2026-27 — विकास, विश्वास और प्रतिबद्धता का बजट है। यह बजट, आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की गारंटियों को धरातल पर उतारने वाला बजट है।
शिक्षा के लिए सर्वाधिक ₹19,148 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
जल एवं सीवर व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ₹9,000 करोड़ का प्रावधान है। परिवहन क्षेत्र में प्रदूषण से लड़ने के लिए EV बसों का विस्तार और महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा जारी रहेगी। महिला सशक्तिकरण के लिए ‘रानी हाट’ योजना और छात्राओं को साइकिल देने की पहल की गई है।
भ्रष्टाचार मुक्त विकास के तहत, वर्षों से अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स—जैसे सलेमपुर माजरा स्कूल और पीडब्ल्यूडी का स्विमिंग पूल—को पूरा करने का संकल्प लिया गया है।
माननीय अध्यक्ष जी,
सबसे बड़ी कैपिटल स्पेंडिंग के साथ यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रमाण है। मैं आदरणीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी के नेतृत्व को बधाई देना चाहता हूँ।
अध्यक्ष जी, अगले वर्ष नगर निगम चुनाव हैं। यदि सरकार चाहती तो लोक-लुभावन घोषणाओं की झड़ी लगा सकती थी—मेट्रो मुफ्त करने की बात होती, हाउस टैक्स माफी की घोषणा होती—जैसा कि पूर्ववर्ती सरकारें करती रही हैं। लेकिन इस सरकार ने आसान रास्ता नहीं चुना।
मुख्यमंत्री जी ने बजट और इकोनॉमिक्स को राजनीति से de-hyphenate कर दिया है। हमने हेडलाइन मैनेजमेंट नहीं, बल्कि गवर्नेंस चुना है। हमने चुना है
प्रशासनिक सुधार,
स्थिरता (stability),
निरंतरता (continuity)।
अध्यक्ष जी, पिछले 10 वर्षों आम आदमी पार्टी में बजट के नाम बदलते रहे जैसे
‘स्वराज बजट’, ‘जीरो टैक्स बजट’, ‘देशभक्ति का बजट’, ‘रामराज्य का बजट’—
लेकिन ज़मीन पर हकीकत कुछ और ही थी।
‘साफ़-सुंदर दिल्ली’ के दावों के बीच सफाई कर्मचारियों की हड़तालें हुईं।
‘रामराज्य’ के नाम पर भी संसाधनों का सही उपयोग नहीं हुआ। नाम बदले, लेकिन नीयत और नतीजे नहीं बदले।
हमने क्या किया?
हमने Consistency लाई।
2023-24: ₹78,000 करोड़, 2024-25: ₹76,000 करोड़, 2025-26: ₹1 लाख करोड़, 2026-27: ₹1,03,700 करोड़
यह सिर्फ वृद्धि नहीं है—यह विश्वास का निर्माण है।
निवेशक, व्यापारी और उद्योग—आज दिल्ली की अर्थव्यवस्था में विश्वास के साथ निवेश कर रहे हैं।
अध्यक्ष जी, अगर विकास की बात करें तो पहले दिल्ली की विकास दर राष्ट्रीय औसत से कम थी।
2023-24: देश 8.6%, दिल्ली 7.4%
2024-25: देश 6.5%, दिल्ली 6.1%
और आज देश: 7.4%
दिल्ली: 8.53% यह बदलाव है, यह उपलब्धि है।
हमने लोक-लुभावन घोषणाएं नहीं, बल्कि कठिन फैसले लिए भ्रष्टाचार रोकने के लिए पिंक कार्ड, 2007 से बढ़ते रेगुलेटरी एसेट्स का समाधान, एमसीडी कर्मचारियों की हड़ताल का अंत, विश्वविद्यालयों के विवादों का समाधान,
कूड़े के पहाड़ खत्म करने की दिशा में ठोस कदम।
इन निर्णयों ने दिल्ली की अर्थव्यवस्था में नया optimism पैदा किया है।
माननीय अध्यक्ष जी,
केवल 90 दिनों में 5 रुपये में स्वादिष्ट और गरम भोजन उपलब्ध कराने की हमारी पहल के तहत अब तक 28 लाख से अधिक मील सर्व किए जा चुके हैं। 25 दिसंबर से शुरू हुई 70 अटल कैंटीन आज गरीब और श्रमिक वर्ग के लिए सम्मानजनक भोजन का माध्यम बन चुकी हैं।
जरा कल्पना कीजिए—वह पल्लेदार, वह मजदूर जो दिनभर कड़ी मेहनत करता है, उसे सुबह-शाम मात्र 5 रुपये में गरम और सम्मानजनक भोजन मिल रहा है। यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि गरीब के सम्मान की सोच है, जिसे माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी ने अटल जी के जन्मदिवस पर साकार किया।
माननीय अध्यक्ष जी,
पिछली सरकार जहाँ बजट आवंटित करके भी उसे खर्च नहीं कर पाई, वहीं हमने 600 करोड़ रुपये का पूरा उपयोग किया। इस वर्ष झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में सड़क, नाली, शौचालय और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए 800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
यह सरकार ‘अंत्योदय’ के संकल्प के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह सरकार केवल बड़े-बड़े पुल और इमारतें ही नहीं बना रही, बल्कि मजदूर और आम नागरिक के जीवन को भी आसान बना रही है।
पावर सेक्टर में, पिछले वर्षों की निष्क्रियता के विपरीत, अब 17,000 करोड़ रुपये के पावर मास्टर प्लान और 8,000 करोड़ रुपये के DTL प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति दी गई है।
चांदनी चौक सहित कई क्षेत्रों में बिजली की तारों को अंडरग्राउंड करने का कार्य तेजी से चल रहा है।
बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से निवेश बढ़ता है और उद्योगों को भी गति मिलती है।
हाल की दुखद अग्निकांड घटना से हम सभी व्यथित हैं। मुख्यमंत्री जी ने पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें सहायता राशि प्रदान की।
इस वर्ष फायर सर्विस को सशक्त बनाने के लिए 674 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिससे नए फायर स्टेशन और आधुनिक कंट्रोल कमांड सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
1,03,700 करोड़ रुपये का यह बजट हर क्षेत्र को स्पर्श करता है। इसमें से 76,200 करोड़ रुपये अपने संसाधनों से जुटाने का लक्ष्य हमारी मजबूत वित्तीय प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है।
विपक्ष चाहे कुछ भी कहे, लेकिन यह बजट दिल्ली को एक नई दिशा देने वाला है।
अध्यक्ष जी हमने शिक्षा में एक्सेस (Access) और क्वालिटी (Quality) दोनों को साथ लेकर चलने का काम किया है।
एक्सेस का मतलब क्या है?
एक्सेस का मतलब है—हर बच्चे तक शिक्षा की पहुंच।
इसी सोच के तहत लगभग 1,30,000 बेटियों को साइकिल दी जा रही है, ताकि वे सुरक्षित और आसानी से स्कूल पहुंच सकें। नए स्कूल भवनों का निर्माण, स्कूलों में विज्ञान शिक्षा का विस्तार, और डिजिटल इंटरवेंशन—जैसे ICT लैब्स, स्मार्ट बोर्ड और डिजिटल लाइब्रेरी—इन सबके माध्यम से शिक्षा को आधुनिक बनाया जा रहा है।
साथ ही ‘निपुण संकल्प’, ‘नींव’ और टीचर्स ट्रेनिंग के जरिए हम शिक्षा की गुणवत्ता को लगातार बेहतर कर रहे हैं।
सीएम श्री स्कूल: शिक्षा के नए मानक माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में, सरोजिनी नगर का ‘सीएम श्री’ स्कूल हो या दिल्ली का कोई भी दूरस्थ स्कूल—
ये सिर्फ इमारतें नहीं हैं, बल्कि शिक्षा के नए बेंचमार्क बन रहे हैं। ‘सीएम श्री’ के 75 स्कूल पूरी तरह NEP 2020 के अनुरूप विकसित किए जा रहे हैं, जिनके 8 प्रमुख स्तंभ हैं:
हर क्लासरूम स्मार्ट क्लासरूम
AI आधारित लैंग्वेज लैब
डिजिटल लाइब्रेरी
मल्टी-सेक्टोरल स्किल लैब
करियर काउंसलिंग लैब
कॉम्पिटेंसी बेस्ड असेसमेंट
सोशल-इमोशनल लर्निंग
शिक्षकों की विशेष ट्रेनिंग
मैं आप सभी को आमंत्रित करता हूँ—आइए, सरोजिनी नगर के ‘सीएम श्री’ स्कूल का दौरा कीजिए
और खुद देखिए दो शिक्षा मॉडलों का अंतर।
उपलब्धियाँ और लक्ष्य (2025–27)
31 मार्च 2026 तक:
9,000 स्मार्ट क्लासरूम
9,000 ICT लैब्स
100 डिजिटल लाइब्रेरी
100 लैंग्वेज लैब
नवाचार (Innovation):
5,000 से अधिक टीमों को ₹20,000 प्रति टीम—कुल ₹10 करोड़—दिए गए हैं, ताकि नए विचारों को उड़ान मिल सके।
बजट 2026–27 में
9,000 से अधिक नए स्मार्ट क्लासरूम और 175+ ICT लैब्स का प्रावधान।
स्वास्थ्य, सुरक्षा और सशक्तिकरण, हर सरकारी स्कूल में मेडिकल रूम
महिलाओं के लिए क्रेच सुविधा, AI आधारित एग्जाम असेसमेंट, बेटियों के लिए ₹90 करोड़ से अधिक की साइकिल योजना—ताकि वे आत्मनिर्भर और सुरक्षित बन सकें।
उच्च और तकनीकी शिक्षा में बदलाव
शाहदरा ITI को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जा रहा है
नरेला एजुकेशन हब—160 एकड़ में विश्वस्तरीय साझा कैंपस, अंबेडकर यूनिवर्सिटी का नया कैंपस
GB Pant इंजीनियरिंग कॉलेज—₹500 करोड़ की लागत से पुनर्निर्माण।
अंत में अध्यक्ष जी,
मैं केवल चार पंक्तियों के साथ अपनी बात समाप्त करता हूँ—
“तुम यह न समझ लेना कि हम वादा-शिकन निकले,
कुछ देर तो लगती है वादों को निभाने में।”
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की हर गारंटी को पूरा करने का संकल्प, मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी के नेतृत्व में यह सरकार निभा रही है।
यह बजट—विकास का रोडमैप ही नहीं, विश्वास की गारंटी है।

