कुलवंत कौर की रिपोर्ट :-

नारायण सेवा संस्थान का दिल्ली के रोहणी मे हूआ 21 दिव्यांगजनों का सामूहिक विवाह समारोह,

नई दिल्ली :गरिमा, समावेशन और नई शुरुआत के भावपूर्ण उत्सव के रूप में, दिव्यांग पुनर्वास, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में अग्रणी संस्था नारायण सेवा संस्थान ने नई दिल्ली में अपने 46वें नि:शुल्क सामूहिक विवाह समारोह का सफल आयोजन किया। इस अवसर पर 21 दिव्यांग एवं निर्धन जोड़ों ने विवाह बंधन में बंधकर अपने नए जीवन की शुरुआत की।
इस समारोह में राजस्थान, झारखंड, बिहार, गुजरात और उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए जोड़ों ने भाग लिया। सभी ने वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार सात फेरों के पवित्र बंधन में बंधकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया।

दो दिवसीय इस आयोजन की शुरुआत शुभ धार्मिक अनुष्ठानों से हुई, जिसमें गणपति स्थापना के साथ हल्दी और मेहंदी की पारंपरिक रस्में शामिल रहीं। परिवारजनों, अतिथियों और स्वयंसेवकों ने वर-वधुओं को आशीर्वाद देकर उनके सुखद और समृद्ध जीवन की कामना की। महिलाओं द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक गीत, घूमर और लोकनृत्यों ने पूरे वातावरण को उल्लास, भावनाओं और सांस्कृतिक गरिमा से भर दिया।
समारोह के दौरान संस्था के प्रेसिडेंट प्रशांत अग्रवाल, डाइरेक्टर वंदना अग्रवाल एवं ट्रस्टी देवेंद्र चौबीसा द्वारा सैकड़ों अतिथियों और सहयोगी दानदाताओं को पारंपरिक पगड़ी, उपरना एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम में एक बड़े पैमाने पर उपहार वितरण अभियान भी शामिल था, जिसमें, नारायण सेवा संस्थान ने पलंग, अलमारी, गैस चूल्हे, पंखे, मिक्सर और 100 से अधिक प्रकार के घरेलू बर्तन प्रदान किए। साथ ही, दिल्ली के दानदाताओं ने नवविवाहित जोड़ों को विभिन्न प्रकार के उपहार भेंट किए।
इस अवसर पर प्रेसिडेंट प्रशांत अग्रवाल ने कहा, “सभी 21 जोड़ों ने वैदिक परंपरा के अनुसार अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए हैं। संस्था की ओर से प्रत्येक नवदंपति को गृहस्थ जीवन की आवश्यक सामग्री भी प्रदान की गई है, जिससे वे आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ अपने जीवन की नई शुरुआत कर सकें।”
उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, समानता और मानवता को सशक्त करने का माध्यम है। यह पहल उन दिव्यांग एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए आशा की किरण है, जो सामाजिक और आर्थिक कारणों से विवाह जैसे महत्वपूर्ण संस्कार को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करते हैं।
आशा और संघर्ष की प्रेरक कहानियाँ

इस समारोह में कई प्रेरणादायक कहानियाँ सामने आईं। इनमें झारखंड के शिबू कुमार और गीता कुमारी की कहानी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। दोनों पिछले दो वर्षों से एक-दूसरे के साथ हैं। शिबू के दोनों पैरों में विकृति है, जबकि गीता अपने दाहिने पैर से दिव्यांग हैं। आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उनका विवाह संभव नहीं हो पा रहा था।
सहायता की उम्मीद में दोनों ने नारायण सेवा संस्थान से संपर्क किया। संस्था ने गीता के उपचार में सहायता प्रदान की तथा शिबू को आधुनिक कैलीपर्स उपलब्ध कराए, जिससे उनकी गतिशीलता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। इसके बाद दोनों को 46वें सामूहिक विवाह समारोह के लिए चयनित किया गया।
भावुक गीता ने कहा, “नारायण सेवा संस्थान हमारे लिए भगवान समान है। आज संस्था की वजह से मुझे मेरा प्यार और अपना घर बसाने का अवसर मिला है।”
संघर्ष से सफलता की दूसरी कहानी
बांसवाड़ा के मुकेश और दुर्गा ने भी कठिन परिस्थितियों के बावजूद विवाह का सपना साकार किया। मुकेश के पिता का निधन हो चुका है, और उनकी मां मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करती हैं। वहीं दुर्गा, जो नारायण सेवा संस्थान में 2009 में सफल पैर ऑपरेशन के बाद स्वस्थ हुईं, वर्तमान में निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं क्योंकि उनके पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं।
आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक चुनौतियों के बीच दोनों ने नारायण सेवा संस्थान से संपर्क किया और उन्हें इस सामूहिक विवाह समारोह के लिए चयनित किया गया।
संस्था के प्रति आभार व्यक्त करते हुए दुर्गा ने कहा, “नारायण सेवा संस्थान हमारे लिए भगवान के समान है। 2009 में मेरा सफल ऑपरेशन हुआ और आज मेरी शादी का सपना भी पूरा हुआ है।”

इस समारोह के साथ नारायण सेवा संस्थान अब तक 2,582 दिव्यांग एवं निर्धन जोड़ों से कमजोर जोड़ों का विवाह संपन्न करा चुका है, जो इसके सेवा, करुणा और सामाजिक सशक्तिकरण के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।
राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित इस संस्था के संस्थापक कैलाश मानव अग्रवाल को वर्ष 2008 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वहीं संस्था के प्रेसिडेंट प्रशांत अग्रवाल को वर्ष 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
संस्था ने अब तक 39,388 से अधिक लोगों को नि:शुल्क कृत्रिम अंग प्रदान किए हैं तथा 452,000 से अधिक मरीजों का नि:शुल्क उपचार किया है, जो इसके व्यापक मानवीय योगदान को दर्शाता है।

