सरकारी नौकरियों में सिखों को नस्ली/ट्राइब्स आरक्षण मिले: जीके

नई दिल्ली (19 मई 2026) दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने सरकारी नौकरियों में सिखों के लिए नस्ली/ट्राइब्स आरक्षण लागू करने की वकालत की है। नेशनल माइनॉरिटी कमीशन द्वारा राज्यों के माइनॉरिटी कमीशनों की कॉन्फ्रेंस के दौरान सिख समुदाय के प्रतिनिधि के तौर पर बोलते हुए जीके ने कहा कि सिखों का विदेश प्रवास, दिमागी पलायन और धर्म परिवर्तन रोकने के लिए आज सिख युवाओं को सरकारी नौकरियों की सख्त ज़रूरत है। सिखों ने मुगलों से लेकर अंग्रेजों तक देश की आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी है। आज़ादी के बाद भी हमने अपनी सरकारों से अपने हकों के लिए लड़ाई लड़ी है। जीके ने कहा कि अंग्रेजों के राज में, सिखों को एक “नस्ली समूह” के तौर पर सारे हक़ मिलते थे। लेकिन देश की आज़ादी के बाद हमने ये हक़ खो दिए हैं। 1950 में लागू हुए संविधान के आर्टिकल 25 के तहत सिखों को कृपाण रखने की इजाज़त है। लेकिन 1959 में बने आर्म्स एक्ट में सिखों की कृपाण की लंबाई तय की गई है। जो सिखों के मौलिक और धार्मिक अधिकारों की गलत व्याख्या है। यही वजह है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान कड़ा और कृपाण के नाम पर सिख स्टूडेंट्स को परेशान और जलील किया जाता है।

जीके ने कहा कि सिखों को नस्ली/ट्राइब्स आरक्षण मिलना चाहिए। क्योंकि हम एक “नस्ली समूह” के तौर पर जंगलों में रहें हैं, घोड़ों की काठीओं पर सोए हैं। हम वो हथियारबंद नस्ली कबीला हैं, जो अपनी बहादुरी, अच्छे इरादों और लोगों की मदद करने के लिए जाना जाता हैं। हमारे सिकलीगर, लुबाणे, वंजारे, बाजीगर, घुमंतू समाज का आधार जंगल और ज़मीन से रहा है। भारत में सरकारी नौकरियों में नस्ली/ट्राइब्स आरक्षण 7.5 फीसदी है। अगर नस्ली/ट्राइब्स आधार पर सिखों को इस आरक्षण में आरक्षण मिले, तो हमारे सिख बच्चे आई.ए.एस., आई.पी.एस., आई.आर.एस. अधिकारीयों सहित न्यायपालिका में जज, विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर, पुलिस अधिकारी और सरकारी नौकरियों में दफ्तरों में नियुक्त हो सकते हैं। जो देश की भलाई के लिए फायदेमंद होगा। जीके ने सरकार को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग, दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग और पंजाबी अकादमी दिल्ली के ठप पड़े होने का दावा करते हुए इन संस्थानों में चेयरमैन और सदस्यों के खाली पड़े पदों को तुरंत भरने की मांग की।

जीके ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन द्वारा अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त कॉलेजों को एक ही नीति से धकेलने की चल रहीं नीति को गलत बताया। जीके ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन में अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त कॉलेजों के लिए एक अलग विभाग बनाने की मांग की, ताकि आर्टिकल 30(1) के तहत इन कॉलेजों को मिले अलग अधिकारों का उल्लंघन नहीं हो। जीके ने देश के लिए सिखों द्वारा किए गए कामों का जिक्र करते हुए हरित क्रांति, सीमा सुरक्षा, संकटों में निस्वार्थ सेवा और देश की तरक्की के लिए किए गए कामों को याद करवाया। साथ ही, 1984 के सिख नरसंहार को दंगा कहने के देश के गुस्ताखी का बुरा मनाते हुए जीके ने सरकार से माइनॉरिटी कम्युनिटी की संस्कृति, भाषा और नस्ली पहचान को बचाने के लिए सरकार को संविधान की भावना अनुसार ज़्यादा काम करने की अपील की।

