
नई दिल्ली : – श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के सहयोग से “सशक्त नारी – विकसित भारत” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सामाजिक चिंतक एवं प्रखर वक्ता डॉ. कृष्ण गोपाल, सहकार्यवाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रो. रामनाथ झा (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) और महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. नीलम गोयल उपस्थित थीं। संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. शशि प्रभा कुमार, निदेशक अखिल भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान ने की।
कार्यक्रम से पूर्व, श्यामा प्रसाद महिला महाविद्यालय की एन.सी.सी. इकाई की बटालियन ने मुख्य अतिथियों को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सलामी दी। तत्पश्चात सभी महनीय अतिथियों और प्राचार्या ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा में माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके बाद सभागार में सभी अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर डॉ. ऋषि राज ने शुक्ल यजुर्वेद और सामवेद के मंत्रों का गायन किया।
अतिथियों के स्वागत और सम्मान स्वरूप उन्हें शाल, सरस्वती की प्रतिमा और तुलसी का पौधा प्रदान किया गया। विषय प्रवेश डॉ. पूजा शर्मा ने किया, जिसमें उन्होंने पाश्चात्य संस्कृति की अपेक्षा भारतीय संस्कृति और मूल्य आधारित प्रेरणा पर बल दिया। तत्पश्चात प्राचार्या प्रो. नीलम गोयल ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि स्त्री जब प्रण लेती है, तो देश भी बदल देता है।

कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका श्यामा और श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर आधारित नाटक पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. कृष्ण गोपाल ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला महिलाओं की स्थिति पर निर्भर करती है। उन्होंने भारतीय परंपरा में नारी को ‘शक्ति’ के रूप में वर्णित करते हुए कहा कि आज आवश्यकता है कि महिलाओं को शिक्षा, स्वावलंबन और सुरक्षा के माध्यम से सशक्त बनाया जाए। उन्होंने ऋग्वैदिक ऋषिकाओं, सूर्या सावित्री, संघ मित्रा, बौद्ध भिक्षुणी और वर्तमान वैश्विक संदर्भ में भारतीय स्त्री के एकात्म विचार पर जोर दिया।
प्रो. रामनाथ झा ने शिक्षा के माध्यम से नारी सशक्तिकरण पर विचार रखते हुए कहा कि शिक्षा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाती है। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सकारात्मक संकेत बताया और कहा कि भारत में नारियों ने अन्य महिलाओं को भी सशक्त बनाया।
प्रो. शशि प्रभा कुमार ने अपने समापन वक्तव्य में नारी के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तभी वे समाज और राष्ट्र के विकास में प्रभावी योगदान दे पाएंगी। उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं और सामाजिक पहलों का उल्लेख किया तथा समानता और भारतीय शास्त्र सम्मत स्त्री के ध्रुव तत्व पर बल दिया। इस सत्र का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनीष कुमार ने किया।
समापन सत्र में विशिष्ट अतिथि डॉ. सुमित नंदन (अध्यक्ष, दिल्ली स्कूल बोर्ड, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) उपस्थित रहे। उन्होंने शिक्षा और संस्कृति के माध्यम से महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य अतिथि के रूप में सांसद श्रीमती कमलजीत सहरावत ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और नेतृत्व क्षमता पर विचार व्यक्त किए और समाज में समान अवसरों की महत्ता को रेखांकित किया।
मुख्य संरक्षक के रूप में प्राचार्या प्रो. (डॉ.) नीलम गोयल ने संस्थान की उपलब्धियों और महिलाओं की शिक्षा में योगदान पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि के रूप में अध्यक्ष: डॉ. सुमीत भासिन
बोर्ड: दिल्ली पुस्तकालय बोर्ड में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय उपस्थित थे उन्होंने ने नारी शक्ति के बौद्धिक और सामाजिक पक्षों पर गहन चर्चा की। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास का आधार बताया और विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की समान भागीदारी पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सत्रों में विद्वानों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए, जिससे विषय पर व्यापक संवाद स्थापित हुआ। प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लिया और अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
अंत में कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। यह संगोष्ठी महिला सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई

