
नई दिल्ली, 12 मार्च 2026: देश में बढ़ती गर्मी और तेजी से बढ़ती कूलिंग मांग के बीच एयर कंडीशनिंग और HVAC उद्योग के प्रमुख विशेषज्ञों ने सुपर-एफिशिएंट और ह्यूमिडिटी-ऑप्टिमाइज़्ड एयर कंडीशनिंग सिस्टम को अपनाने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि इन नई तकनीकों से ऊर्जा खपत में 60% तक कमी लाई जा सकती है और बिजली की पीक मांग को आधा किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत के लगभग 60% जिले, जहां देश की 76% आबादी रहती है, अत्यधिक गर्मी के गंभीर जोखिम का सामना कर रहे हैं। हाल ही में मुंबई का तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो मार्च के औसत से करीब छह डिग्री अधिक है।
यह चर्चा “क्या आज के एयर कंडीशनर अधिक गर्म और ह्यूमिड दुनिया का सामना कर सकते हैं? वैश्विक दक्षिण के लिए किफायती और कुशल आराम प्रदान करना” विषय पर आयोजित सत्र में हुई, जिसका आयोजन Rocky Mountain Institute (RMI) और CEPT University ने मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में किया। इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के कई प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें बोश होम कम्फर्ट इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय सुधाकरन, आरएमआई की मैनेजिंग डायरेक्टर अक्षिमा घाटे, लोढ़ा के वाइस प्रेसिडेंट औन अब्दुल्ला, वोल्टास लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर मुकुंदन मेनन, क्लैस्प के चीफ स्ट्रैटेजी एंड इम्पैक्ट्स ऑफिसर बिशाल थापा, आरएमआई के प्रिंसिपल अंकित कलांकी तथा सीईपीटी यूनिवर्सिटी के सीएआरबीएसई के प्रिंसिपल रिसर्चर और सेंटर हेड डॉ. यश शुक्ला शामिल थे।
संजय सुधाकरन, मैनेजिंग डायरेक्टर, बॉश होम कम्फर्ट इंडिया लिमिटेड ने कहा कि “जैसे-जैसे हीटवेव तेज होती जा रही हैं और जलवायु पैटर्न बदल रहे हैं, भारत एक कूलिंग क्रांति के मुहाने पर खड़ा है। 2025 में भारतीय एयर कंडीशनिंग बाजार का आकार 6.15 अरब अमेरिकी डॉलर था और 2034 तक इसके 21.59 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2026 से 2034 के बीच लगभग 14.98% की वार्षिक वृद्धि दर दर्शाता है। ऊर्जा-कुशल इन्वर्टर एसी, सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं और किफायती स्मार्ट कूलिंग तकनीकें अब करोड़ों भारतीयों की पहुंच में हैं। घटती लागत, घरेलू विनिर्माण में वृद्धि और इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान जैसी नीतियां इन नवाचारों को तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।”
अनुमान है कि 2050 तक भारत में एक अरब से अधिक रूम एयर कंडीशनर इस्तेमाल में होंगे, जिससे कूलिंग से जुड़ी बिजली की मांग 2022 की तुलना में नौ गुना तक बढ़ सकती है।RMI के अनुसार, आज अधिकांश एयर कंडीशनर केवल तापमान को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किए जाते हैं, न कि नमी (ह्यूमिडिटी) को। परिणामस्वरूप जब नमी अधिक होती है, तो लोग एसी का तापमान और कम कर देते हैं, जिससे कमरे को जरूरत से ज्यादा ठंडा किया जाता है और ऊर्जा की बर्बादी होती है।
आरएमआई की मैनेजिंग डायरेक्टर अक्षिमा घाटे ने कहा कि बढ़ती गर्मी और नमी के बीच भारत को ऊर्जा-अक्षम कूलिंग समाधानों से बचना होगा। सुपर-एफिशिएंट और ह्यूमिडिटी-ऑप्टिमाइज़्ड एसी को तेजी से अपनाने से करोड़ों लोगों को किफायती और टिकाऊ कूलिंग उपलब्ध कराई जा सकती है।
चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि भारत अगली पीढ़ी के सुपर-एफिशिएंट और ह्यूमिडिटी-ऑप्टिमाइज़्ड एयर कंडीशनिंग सिस्टम के विकास और उपयोग में वैश्विक नेतृत्व कर सकता है। इसके लिए खरीदारों, निर्माताओं, मानक निर्धारण संस्थाओं और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया।
वोल्टास लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर मुकुंदन मेनन के अनुसार आने वाले पांच वर्षों में भारत का एयर कंडीशनिंग बाजार दोगुना हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि एसी के दक्षता मानक वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप हों और परीक्षण प्रोटोकॉल में नमी के प्रभाव को भी शामिल किया जाए।
क्लैस्प के चीफ स्ट्रैटेजी एंड इम्पैक्ट्स ऑफिसर बिशाल थापा ने कहा कि “नवाचार ही वह बदलाव है जिसकी भारत को जरूरत है। जैसे खेल के मैदान में बदलाव से हॉकी का खेल बदला, उसी तरह एयर कंडीशनिंग में ह्यूमिडिटी पर ध्यान देना कूलिंग के भविष्य को बदल सकता है। यदि हम अपने मानकों को नए सिरे से सोचें और सुपर-एफिशिएंट समाधानों में निवेश करें, तो भारत टिकाऊ और किफायती कूलिंग में वैश्विक मानक स्थापित कर सकता है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिया कूलिंग प्लान , बढ़ता घरेलू विनिर्माण, मजबूत ऊर्जा दक्षता मानक और अनुसंधान में निवेश भारत को वैश्विक स्तर पर टिकाऊ कूलिंग समाधानों का प्रमुख केंद्र बना सकते हैं।

