हंसराज कॉलेज में देशभक्ति के उल्लास के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह; प्रो. (डॉ.) रमा ने युवाओं से ‘राष्ट्र प्रथम, भारत प्रथम’ की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया

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नई दिल्ली, 14 अगस्त 2026:
हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में स्वतंत्रता दिवस पूर्व संध्या के अवसर पर देशभक्ति और उत्साह से परिपूर्ण समारोह का आयोजन किया गया। पूरे परिसर में “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “जय हिंद” के नारों से वातावरण गूंज उठा। कार्यक्रम में कॉलेज के विद्यार्थियों, शिक्षकों, एनसीसी कैडेट्स एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


समारोह का मुख्य आकर्षण हंसराज कॉलेज की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) रमा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाना रहा। ध्वजारोहण के पश्चात एनसीसी कैडेट्स ने अनुशासित एवं गरिमापूर्ण मार्च-पास्ट प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गुंजन ने किया।
अपने संबोधन में प्रो. (डॉ.) रमा ने विद्यार्थी से ‘राष्ट्र प्रथम, भारत प्रथम’ की भावना के साथ जीवन जीने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा ही विकसित भारत के वास्तुकार हैं और राष्ट्र के निर्माण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी युवा पीढ़ी के कंधों पर है।


स्वतंत्रता दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रो. (डॉ.) रमा ने इसे “ऐतिहासिक चेतना का उत्सव” बताया। उन्होंने कहा कि यह दिन हमें स्वतंत्रता संग्राम के वीरों के बलिदान को स्मरण करने और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पुनः समझने का अवसर देता है। उन्होंने युवाओं से स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग को याद करने तथा कठिन परिश्रम की चुनौती को स्वीकार करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि मूल्य व्यक्ति और राष्ट्र की सबसे मूल्यवान संपत्ति हैं। विद्यार्थियों को दूसरों के प्रयासों का सम्मान करते हुए राष्ट्र के लिए निरंतर अच्छा करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने “मनुर भव” अर्थात “मानव बनो” के संदेश को जीवन का महत्वपूर्ण आदर्श बताते हुए मानवता, करुणा और सद्भाव पर जोर दिया।
भगवान राम का उदाहरण देते हुए प्रो. (डॉ.) रमा ने कहा कि राम उच्चतम मानवीय मूल्यों के प्रतीक हैं और उन्होंने किसी से घृणा नहीं की। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में मानवीय गरिमा और संवेदनशीलता को सर्वोच्च स्थान दें। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की विशिष्टता किसी बाहरी शक्ति से नहीं, बल्कि उसके अपने कर्म, चरित्र और प्रयासों से निर्मित होती है।
युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि युवा केवल विरोध करने वाले नहीं, बल्कि रचनात्मक परिवर्तन के वाहक बनें। उन्होंने कहा कि विनाश करना आसान है, लेकिन निर्माण करना कठिन है। इसलिए युवाओं को समस्याओं की आलोचना तक सीमित न रहकर उनके समाधान और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हंसराज कॉलेज का प्रत्येक सदस्य राष्ट्र और संस्थान को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करेगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री राजेश कुमार, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) ने सभी विद्यार्थियों एवं हंसराज कॉलेज परिवार को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए प्लासी के युद्ध का उल्लेख किया और कहा कि राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन और सदाचरण को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपने संवैधानिक अधिकारों के साथ-साथ संवैधानिक कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से देश के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्य की भावना विकसित करने का आग्रह किया।
श्री राजेश कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि केवल शिक्षा और अच्छे अंक ही सफलता के मापदंड नहीं हैं। व्यक्ति की नीयत, ईमानदार प्रयास और सकारात्मक सोच ही वास्तविक परिवर्तन के प्रमुख आधार हैं।
समारोह में समाजसेवी श्री निशांत अग्रवाल ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ जीवन में मूल्यों का होना आवश्यक है। उन्होंने परिवार को सम्मान और संस्कार की प्राथमिक इकाई बताते हुए विद्यार्थियों से आग्रह किया कि जिस प्रकार राष्ट्र को स्वच्छ रखना आवश्यक है, उसी प्रकार अपने विचारों और आचरण को भी स्वच्छ रखना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के 150वें दिवस समारोह को भी विशेष रूप से मनाया गया। उपस्थित सभी लोगों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओत-प्रोत कविताओं और प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्र के प्रति अपने प्रेम और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
एनसीसी कैडेट्स के मार्च-पास्ट, देशभक्ति की कविताओं और सामूहिक राष्ट्रगीत ने पूरे कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। समारोह के दौरान पूरा परिसर “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “जय हिंद” जैसे नारों से गूंजता रहा।
प्रो. (डॉ.) रमा ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित में निरंतर प्रयास करते रहने और स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों को अपने आचरण में उतारने का आह्वान किया।
समारोह के अंत में हंसराज कॉलेज समुदाय ने राष्ट्र निर्माण, मानवीय मूल्यों, अनुशासन, संवैधानिक जिम्मेदारियों और विकसित भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। स्वतंत्रता दिवस की खुशी के अवसर पर उपस्थित प्रतिभागियों के बीच लड्डू वितरित किए गए।
हंसराज कॉलेज का यह स्वतंत्रता दिवस समारोह केवल स्वतंत्रता की ऐतिहासिक उपलब्धि के उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि हर पीढ़ी की राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका है और प्रत्येक नागरिक अपने कर्म, चरित्र और प्रयासों से भारत के भविष्य को मजबूत बना सकता है।
जय हिंद।

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