
नेविल तुली की ‘स्वराज’ प्रदर्शनी शुरू, तस्वीरों और दस्तावेजों के जरिए दिखेगा भारत का राजनीतिक इतिहास
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस से पहले नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर की विजुअल आर्ट्स गैलरी में ‘स्वराज: री-विजुअलाइजिंग इंडियाज पॉलिटिकल हिस्ट्री’ प्रदर्शनी शुरू हुई। द तुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज (टी.आर.आई.एस.) की ओर से आयोजित इस प्रदर्शनी के क्यूरेटर नेविल तुली हैं। प्रदर्शनी 12 अगस्त से दर्शकों के लिए खुली है।

नेविल तुली का कहना है कि भारत को जानने का दावा करने से पहले यह समझना जरूरी है कि इतिहास को हमने किस तरह दर्ज और देखा है। उनके अनुसार भारतीय इतिहास की समझ लंबे समय तक लिखित दस्तावेजों तक सीमित रही, जबकि तस्वीरों, ध्वनि, फिल्मों, विज्ञापनों, पोस्टरों, कलाकृतियों और वस्तुओं में भी इतिहास की महत्वपूर्ण स्मृतियां सुरक्षित हैं।

प्रदर्शनी में फेलिसे बीटो, हेनरी कार्तिए-ब्रेसां और बाद के रॉयटर्स के फोटो पत्रकारिता कार्यों के साथ समाचार पत्र, पुस्तकें, छापे, राजनीतिक प्रचार सामग्री, फिल्म प्रचार कला और ऐतिहासिक वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं।

प्रदर्शनी में 1857, बंगाल पुनर्जागरण, स्वदेशी आंदोलन, राष्ट्रवाद, भारत माता, तिरंगे के विकास और महात्मा गांधी से जुड़े दृश्य और दस्तावेज शामिल हैं। स्वामी विवेकानंद, दादाभाई नौरोजी, बाल गंगाधर तिलक, रासबिहारी बोस, एनी बेसेंट, सी. राजगोपालाचारी, जवाहरलाल नेहरू और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे प्रमुख व्यक्तित्व भी इसमें नजर आते हैं।
प्रदर्शनी स्वतंत्रता के बाद की घटनाओं को भी अपने दायरे में रखती है, जिसमें विभाजन, संविधान, रियासतों का एकीकरण, युद्ध, आपातकाल, साम्प्रदायिक तनाव, विरोध और जन आंदोलनों की झलक मिलती है।
तुली के अनुसार स्वराज केवल 1947 में मिली राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है। यह स्वयं को समझने, सवाल पूछने और बौद्धिक रूप से स्वतंत्र होने की निरंतर प्रक्रिया है। उनका संदेश है—“जीवित होने की जिम्मेदारी के प्रति अपना मन खोलिए।”

