साहित्य संस्कृति फाउंडेशन के स्थापना दिवस पर दिल्ली में हुआ ‘संस्कृति पर्व’ का आयोजन।

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संवाद की संस्कृति का देश है भारत : प्रो. बल्देव भाई

भारत संवाद की समृद्ध परंपरा और उसकी विशिष्ट सांस्कृतिक भावभूमि का देश है। वरिष्ठ पत्रकार, चिन्तक एवं कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बलदेव भाई ने उक्त आशय की बातें कही। साहित्य संस्कृति फाउंडेशन के आठवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में मंडी हाउस, नई दिल्ली स्थित त्रिवेणी कला संगम के सभागार में संस्कृति पर्व के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि भारत संवाद की संस्कृति का देश है और हमारी सांस्कृतिक परंपरा की निर्मिति के मूल में संवाद ही रहा है।


मुख्य अतिथि पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. संजय पासवान ने कहा संवाद और संविधान ही सभी तरह की समस्याओं के समाधान का एक मात्र साधन है। उन्होंने कहा कि एक ही समय में चिंतन की अलग-अलग दिशा और दृष्टि के कारण जिसे कुछ लोग संस्कृति समझते हैं उसी को दूसरे कुछ लोग विकृति मान बैठते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि ऐसा प्रायः परम्पराओं के ज्ञान के अभाव में ही होता है इसलिए हमें भारत की विशिष्ट परम्पराओं का ज्ञान होना चाहिए तथा सभी सांस्कृतिक परम्पराओं के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए।
मुख्य वक्ता पावन चिंतन धारा आश्रम के संस्थापक एवं आध्यात्मिक गुरु प्रो. पवन सिन्हा ने कहा कि विभिन्न विचारधाराओं के बावजूद सभी के विचारों का सम्मान और संवाद भारत की संस्कृति की विशिष्टता रही है। उन्होंने कहा कि संवाद युद्ध को जन्म देता है जबकि संवाद संस्कृति और प्रेम को। वहीं हंसराज कॉलेज की प्राचार्या प्रो. रमा ने कहा कि भारत में आज सबसे अधिक आवश्यकता संवाद की है। संवाद भी वैसा जो हमारी सांस्कृतिक परंपरा और संस्कृति के अनुरूप हो।
उद्घाटन सत्र के आरम्भ में अपने स्वागत वक्तव्य में फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार मिश्र ने कहा कि भारत का सभ्यतागत इतिहास, उसकी संस्कृति, भारतीय ज्ञान-परंपरा और विविधताओं में एकता के भाव-बोध की सतत चेतना एवं चिंतन में ‘संवाद’ की सर्वाधिक भूमिका रही है। उद्घाटन सत्र का संचालन मिरांडा हाउस कॉलेज की प्रो. संगीता राय ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के डॉ. मनीष ने किया।
संस्कृति पर्व के अवसर पर साहित्य संस्कृति फाउंडेशन की ओर से चर्चित कथाकार कवयित्री अलका सिन्हा को साहित्य श्री सम्मान, सभ्यता अध्ययन केंद्र के संस्थापक रविशंकर को संस्कृति श्री सम्मान, ध्रुपद गायक सुमीत आनंद पाण्डेय को कला श्री सम्मान एवं न्यूरो सर्जन डॉ. मनीष कुमार को सेवा श्री सम्मान से सम्मानित किया गया।
संस्कृति पर्व के अंतर्गत भारत में संवाद की सांस्कृतिक भावभूमि विषयक सत्र की अध्यक्षता कर रहे थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावास के स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के निवर्तमान निदेशक एवं प्रथम सचिव डॉ. चैतन्य प्रकाश ने कहा कि अलग-अलग आधारों पर परस्पर दिखने वाले भेद मिथ्या हैं और सार्थक संवाद की स्थिति में ये सारे भेद मिट जाते हैं और एकत्व और एकात्म की स्थिति आ जाती है।
आज तक के वरिष्ठ सम्पादक श्री संजय शर्मा ने कहा कि भारत में जड़ और चेतन सब में स्वयं को और ईश्वर को देखने की परम्परा का देश रहा है। यहाँ संवाद व्यक्ति का स्वयं से और प्रकृति के सभी उपादानों से निरंतर होता रहता है।
भारतीय जनसंचार संस्थान के प्रो. राकेश कुमार उपाध्याय ने कहा कि भारत में हमेशा संवाद का सम्बन्ध लोक कल्याण से रहा है। यह भाव हमें स्वार्थ से परे ले जाता है। समस्या यह है कि आज कहीं न कहीं लोक हमारी चेतना से ओझल हो गया है। परिणाम यह हुआ है कि सकारात्मक विचार और संवाद के अभाव के कारण सर्वत्र निरुत्साह और उदासीनता की स्थिति दिखने लगी है। उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता पीयूष पुष्कर ने कहा कि संवाद भारत और भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है जिसने लगातार भारतीय लोकतंत्र को संपुष्ट करने जा कार्य किया है। घटते हुए संवाद के इस दौर में हमें अनेकांतवाद और भारत की विविधता को स्वीकार करना होगा। इसके साथ ही पूछने का साहस और सुनने का धैर्य विकसित करना होगा। इस सत्र का संचालन कला समीक्षक अरविन्द ओझा ने किया।

संस्कृति पर्व के अवसर पर अजला फाउंडेशन के सहयोग से ‘मातृभूमि’ शीर्षक चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गयी। कार्यक्रम का समापन कृष्ण कला फाउंडेशन के कलाकारों प्रसिद्ध नृत्यांगना अनु सिन्हा एवं उनकी टीम की सामूहिक कत्थक नृत्य की प्रस्तुति में से हुआ। इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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