
नई दिल्ली, 7 नवंबर 2026: दीपावली का नाम सुनते ही लोगों के चेहरे पर खुशी और उत्साह छा जाता है। त्योहार के दिन दीये जलते हैं, घर सजते हैं, मिठाइयां बंटती हैं और पटाखे फोड़े जाते हैं। रोशनी का यह पर्व परिवारों और दोस्तों को एक साथ लाता है। लेकिन जश्न की इस रौनक में लोग अक्सर पटाखों से जुड़े खतरों को भूल जाते हैं। इस मौसम में पटाखों से लगने वाली ज्यादातर चोटें सीधे आंखों को प्रभावित करती हैं और गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।
डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल के रीजनल हेड – क्लिनिकल सर्विसेज, पद्मश्री प्रो. (डॉ.) जीवन सिंह तितियाल कहते हैं, “हमारी आंखें शरीर के सबसे कीमती अंगों में से हैं और दीपावली के जश्न में इनकी सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। पटाखों से लगी चोट कॉर्निया, लेंस और रेटिना को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है, और कई बार इसका असर आंखों की रोशनी पर हमेशा के लिए रह जाता है। मेरी अपील है कि पटाखों को नजदीक से न छुएं, बच्चों को कभी अकेला न छोड़ें और सुरक्षात्मक चश्मे का इस्तेमाल करें। उतना ही जरूरी यह भी है कि आंख में चोट लगने पर खुद इलाज करने की कोशिश न करें और नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाने में देरी न करें। आइए, रोशनी का त्योहार मनाएं, लेकिन आंखों की रोशनी को खतरे में डाले बिना।”
पटाखों से आंखों में चोट
आंखें हमारे शरीर के सबसे नाजुक अंगों में से एक हैं। एक छोटी-सी चिंगारी या कण भी आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। पटाखे चलाने वालों के साथ-साथ आसपास खड़े दर्शकों की आंखों को भी चोट लगने का खतरा रहता है।
दीपावली के दौरान आंखों में होने वाली आम चोटें:
• कॉर्नियल एब्रेशन (कॉर्निया पर खरोंच): छोटे कण, राख या चिंगारी आंख की पारदर्शी अगली परत यानी कॉर्निया में जलन पैदा कर सकते हैं। इससे दर्द, लालिमा, पानी आना और रोशनी से परेशानी होती है।
• आईबॉल रप्चर (आंख का फटना): धमाके के जोर से आंख का गोला फट सकता है।
• जलने की चोट: गर्म चिंगारी या लपटों से पलकें, बरौनियां और आंख की सतह झुलस सकती हैं।
• कंजंक्टाइवा का जलना: गर्मी या केमिकल की वजह से आंख के सफेद हिस्से को ढकने वाली पतली झिल्ली को नुकसान पहुंच सकता है।
• आंख में बाहरी कण फंसना: धूल, मलबा और बारूद के कण आंख में जा सकते हैं, जिससे जलन और अन्य नुकसान हो सकते हैं।
• आंख के अंदर रक्तस्राव: पटाखे के धमाके का असर आंख के भीतर की नाजुक रक्त नलिकाओं को क्षतिग्रस्त कर सकता है और अंदरूनी ब्लीडिंग हो सकती है।
• रेटिना की चोट: तेज धमाके से रेटिना को गंभीर नुकसान हो सकता है, जिससे धुंधला दिखाई देने लगता है या आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।
• केमिकल से चोट: ज्यादा केमिकल वाले पटाखों के रसायन आंखों में जाने पर जलन या जलने जैसी चोट पहुंचा सकते हैं।
दीपावली पर आंखों को चोट से बचाने के उपाय
• पटाखे हमेशा खुली जगह पर चलाएं, सुरक्षात्मक गियर पहनें और बाद में हाथ साफ पानी से धोएं।
• पटाखा जलाते समय हाथ भर की दूरी रखें और देखते समय कम से कम पांच मीटर दूर रहें। पटाखे को कभी चेहरे के पास न पकड़ें और न ही उस पर झुकें।
• पटाखे चलाने जाने से पहले कॉन्टैक्ट लेंस उतार दें। सिंथेटिक कपड़े न पहनें और सही फुटवियर पहनकर ही पटाखे चलाएं।
• इस्तेमाल हो चुके पटाखों को फेंकने से पहले पानी की बाल्टी में अच्छी तरह भिगोकर निष्क्रिय करें।
• पटाखों को चेहरे, बालों और कपड़ों से दूर रखें।
• अचानक आग लगने की स्थिति के लिए पानी और रेत से भरी बाल्टी पास में तैयार रखें।
• पटाखों को बंद डिब्बे में सुरक्षित जगह पर रखें, जहां बच्चों का हाथ न पहुंचे।
• जो पटाखा नहीं फूटा हो, उसे हाथ न लगाएं, क्योंकि वह अचानक फट सकता है। न तुरंत उसके पास जाएं और न ही उसे दोबारा जलाने की कोशिश करें।
• पटाखे छूने के बाद आंखों और चेहरे को अच्छी तरह धोएं।
• बच्चों को बिना बड़ों की निगरानी के पटाखे न चलाने दें।
आंख में चोट लगने पर क्या करें
पटाखों से आंख में चोट लगने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। हालांकि, कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर आंखों की रोशनी बचाने में मदद मिल सकती है:
• अगर धुआं, धूल या राख से आंखों में जलन हो तो उन्हें मलें नहीं, इससे जलन बढ़ सकती है और चोट भी लग सकती है। आंखों को कम से कम 20 मिनट तक साफ पानी से धोएं। अगर जलन फिर भी न थमे तो डॉक्टर की सलाह लें।
• बिना हाथ धोए आंखों को न छुएं।
• आंख में फंसे कण या बाहरी चीज को खुद निकालने की कोशिश न करें।
• डॉक्टर की सलाह के बिना कोई मरहम, आई ड्रॉप या घरेलू नुस्खा न लगाएं।
• अगर आंख में कोई चीज घुसने (पेनिट्रेटिंग इंजरी) का शक हो तो आंख को न धोएं और न ही दबाएं। उस पर बिना दबाव डाले कोई सख्त कवच (रिजिड शील्ड) लगाकर उसे सुरक्षित रखें और तुरंत इमरजेंसी इलाज के लिए पहुंचें।
चोट मामूली लगे या आंखों की रोशनी सामान्य लगे, तब भी डॉक्टर को दिखाने में कभी देरी न करें। पटाखे की घटना के बाद दर्द, लालिमा, धुंधला दिखना, रोशनी से परेशानी या लगातार पानी आने जैसे लक्षण हों तो तुरंत जांच कराएं।
पटाखों से आंख में किसी भी अनहोनी की स्थिति में आम लोगों के लिए इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध हैं। संपर्क करें: 95949 00385।
आइए, दीपावली को बनाएं ज्यादा सुरक्षित, हरित और सेहतमंद।
सावधानी से मनाएं दीपावली – आंखों का रखें ख्याल, सुरक्षित खेलें।
डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल के बारे में
अपने विस्तार के साथ-साथ डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में अपने अग्रणी नवाचारों के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। कई ऐतिहासिक सर्जिकल तकनीकों की परिकल्पना, विकास और पहली सर्जरी इसी के चिकित्सकों ने की, और आज दुनिया भर के नेत्र सर्जन इनका इस्तेमाल करते हैं। इनमें शामिल हैं: ग्लूड इंट्राओकुलर लेंस (ग्लूड IOL) सर्जरी, जो उन मामलों में इस्तेमाल होने वाली उन्नत टांका-रहित तकनीक है जब आंख में प्राकृतिक कैप्सूलर सपोर्ट न हो या कमजोर हो; प्री-डेसमेट्स एंडोथीलियल केराटोप्लास्टी (PDEK), जो टांका-रहित तकनीक से कॉर्निया ट्रांसप्लांट में एक बड़ी प्रगति है; सिंगल-पास फोर-थ्रो (SFT) प्यूपिलोप्लास्टी, जो बड़ी या क्षतिग्रस्त पुतली को ठीक करने की सुरक्षित, बिना गांठ वाली विधि है; पिनहोल प्यूपिलोप्लास्टी (PPP), जिसे बेहद अनियमित कॉर्निया वाले मरीजों में देखने की गुणवत्ता सुधारने के लिए तैयार किया गया है; और कॉर्नियल एलोजेनिक इंट्रास्ट्रोमल रिंग सेगमेंट्स (CAIRS), जो केराटोकोनस और कॉर्निया की अन्य कमजोरियों (एक्टेसिया) के इलाज में काम आता है।
अधिक जानकारी के लिए देखें: http://www.dragarwal.com
मीडिया के लिए नोट
यह रिलीज़ दीपावली के जश्न के दौरान आंखों की सेहत की सुरक्षा के महत्व और खासकर पटाखों से जुड़े खतरों पर रोशनी डालती है। चिंगारी, राख और केमिकल के कण कॉर्निया पर खरोंच, जलन, आंख के भीतर रक्तस्राव और रेटिना को नुकसान जैसी कई तरह की चोटें पहुंचा सकते हैं। पटाखे चलाने वालों के साथ-साथ आसपास खड़े लोगों को भी आंखों में गंभीर चोट का जोखिम रहता है।
डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल के रीजनल हेड – क्लिनिकल सर्विसेज, पद्मश्री प्रो. (डॉ.) जीवन सिंह तितियाल के विचारों के साथ यह रिलीज़ पटाखों से आंखों की चोट रोकने के जरूरी एहतियात और हादसे की स्थिति में तुरंत उठाए जाने वाले कदम बताती है। साथ ही यह घरेलू नुस्खों के भरोसे रहने या इलाज में देरी करने के बजाय समय पर डॉक्टरी सलाह लेने पर जोर देती है।
आपसे अनुरोध है कि संलग्न प्रेस नोट को कृपया प्रकाशित करें।
धन्यवाद। किसी भी अतिरिक्त जानकारी के लिए बेझिझक संपर्क करें।

