
नई दिल्ली : सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय ने मिशन सह- संकल्प
(आजीविका संवर्धन के लिए ज्ञान-आधारित कार्रवाई हेतु विज्ञान और उन्नत नेटवर्क) के अंतर्गत नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में राष्ट्रीय प्रदर्शनी-सह-तकनीकी कार्यक्रम का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन पीएसए प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने किया और इसमें जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), सूक्ष्म, मध्यम और लघु उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई), ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी), वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), पंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर) सहित केंद्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों और शैक्षणिक संस्थानों, वित्तीय और विकास संगठनों, उद्योग हितधारकों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को देश में स्थायी आजीविका प्रणालियों को मजबूत करने के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाने पर विचार-विमर्श करने के लिए आमंत्रित किया गया।

अपने मुख्य भाषण में, प्रोफेसर सूद ने तकनीकी नवाचार और जमीनी स्तर पर इसके अनुप्रयोग के बीच के अंतर को खत्म करने की आवश्यकता पर बल दिया। देश के मजबूत विज्ञान और नवाचार इको-सिस्टम को उजागर करते हुए उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मुख्य चुनौती नवाचार को सामुदायिक स्तर पर सुलभ, अपनाने योग्य और प्रभावशाली सुनिश्चित करने में है। उन्होंने मांग-आधारित नवाचार और सहयोगात्मक समस्या-समाधान को बढ़ावा देने में ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह (आरयूटैग), आरयूटैग स्मार्ट ग्राम केंद्र (आरएसवीसी) और मंथन मंच जैसी पहलों की भूमिका का भी उल्लेख किया।
इस कार्यक्रम में मिशन सह-संकल्प के लोगो जारी किया गया और सतत आजीविका प्रणालियों के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी हस्तक्षेपों पर संसाधन पुस्तिका का विमोचन किया गया। यह संसाधन पुस्तिका विभिन्न मंत्रालयों और वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा विकसित 350 से अधिक तैयार तकनीकों का राष्ट्रीय भंडार है। इसे कार्यान्वयन के लिए एक व्यावहारिक उपकरण के रूप में तैयार किया गया है। यह राज्य सरकारों, कार्यान्वयन एजेंसियों और विकास भागीदारों को आजीविका कार्यक्रमों में प्रासंगिक समाधानों की पहचान करने, उन्हें अपनाने और उनका विस्तार करने में सक्षम बनाता है। इसके बाद पीएसए, प्रोफेसर सूद द्वारा प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।
पहुंच और प्रसार को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, “आजीविका के लिए प्रौद्योगिकी: नवाचार और प्रभाव का सेतु” शीर्षक से एक ऑनलाइन भंडार सक्रिय किया गया है। यह चुनिंदा प्रौद्योगिकी समाधानों तक खुली पहुंच प्रदान करता है और उपयोगकर्ताओं को डिजिटल रूप से अपनाने के तरीकों का पता लगाने में सक्षम बनाता है। इस भंडार को https://psa.gov.in/livelihood-analytics पर देखा जा सकता है।
इस कार्यक्रम में प्रमुख भागीदार मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें उन्होंने भारत की आजीविका संरचना में विज्ञान और प्रौद्योगिकी (एस एंड टी) को एकीकृत करने पर अपने विचार साझा किए। चर्चाओं में प्रमुख कार्यक्रमों में समन्वय, नवाचारों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए संस्थागत तंत्र और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
विभिन्न हितधारक समूहों की भागीदारी वाली तीन पैनल चर्चाओं ने जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्यों, मौजूदा कमियों और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से लोगों की आजीविका में सुधार के लिए सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

पैनल चर्चाओं में आजीविका परिवर्तन के महत्वपूर्ण आयामों का पता लगाया गया। पहले सत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को डिजाइन करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह लचीलापन, स्थिरता और समावेश को मजबूत करते हैं। दूसरे सत्र में नवाचारों को पायलट परियोजनाओं से लेकर राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों तक विस्तारित करने के मार्गों की जांच की गई, इसमें संस्थागत ढांचे, वित्तपोषण और कार्यान्वयन प्रणालियों पर बल दिया गया। तीसरे सत्र में आजीविका प्रणालियों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में साझेदारी, नवाचार मंचों और सामुदायिक भागीदारी की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
इस कार्यक्रम में आजीविका को मजबूत करने के लिए 100 से अधिक प्रौद्योगिकियों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में फैली विभिन्न प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया। इससे नवप्रवर्तकों, कार्यान्वयन एजेंसियों और विकास भागीदारों के बीच प्रत्यक्ष जुड़ाव संभव हुआ और ज्ञान के आदान-प्रदान और संभावित सहयोग को बढ़ावा मिला।
अपने समापन भाषण में, पीएसए कार्यालय की वैज्ञानिक सचिव डॉ (श्रीमती) परविंदर मैनी ने कहा कि दिन भर की चर्चाओं ने अभिसरण, स्थानीय प्रासंगिक और किफायती प्रौद्योगिकियों, संस्थागत साझेदारियों और समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोणों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सह-संकल्प मिशन का उद्देश्य एक ऐसा सहयोगात्मक इको-सिस्टम बनाना है जो विज्ञान को समाज से जोड़े, जिससे प्रौद्योगिकी-आधारित, समावेशी और टिकाऊ आजीविका परिवर्तन को बड़े पैमाने पर संभव बनाया जा सके। उन्होंने हितधारकों से निरंतर सहयोग का आह्वान किया ताकि देश भर में आजीविका परिणामों को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक नवाचारों को व्यावहारिक, विस्तार योग्य समाधानों में परिवर्तित किया जा सके।
मिशन सह-संकल्प, सार्वजनिक सेवा सलाहकार कार्यालय की एक प्रमुख पहल है। इसे प्रधानमंत्री की विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (पीएम-एसटीआईएसी) द्वारा अनुशंसित किया गया है। यह सतत आजीविका के लिए व्यापक और स्थानीय रूप से प्रासंगिक समाधान विकसित करने के लिए अभिसरण-संचालित और मांग-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाता है। इस मिशन का उद्देश्य संरचित प्रौद्योगिकी तैनाती को सक्षम बनाकर, संस्थागत समन्वय को मजबूत करके और नवप्रवर्तकों को अंतिम उपयोगकर्ताओं से जोड़कर नवाचार और उसके उपयोग के बीच के अंतर को खत्म करना है।

